अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने ग्लोबल टेंशन को बढ़ाया है और कच्चे तेल को लेकर दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है. हमलों के बीच कतर, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों ने प्रोडक्शन में कटौती का फैसला लेकर चिंता बढ़ाई, तो वहीं ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट डालने ये और भी बढ़ गई. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेल की किल्लत को रोकने के लिए बड़े संकेत दिए हैं और कहा है कि वे कुछ देशों पर लगे प्रतिबंध हटा रहे हैं. ऐसे में ये चर्चाएं भी तेज हैं कि क्या रूसी तेल पर लगा बैन भी अमेरिका हटा रहा है?
तेल की बढ़ती कीमतें रोकने की मुहिम
बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट की मानें, तो Crude Oil Price में वृद्धि को रोकने के लिए Donald Trump रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहे हैं और वे Russian Oil Ban को अस्थाई रूप से हटा सकते हैं. इसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी को रोकने के लिए रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहे हैं.
'दुनिया में तेल की कमी नहीं होगी'
डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनका प्रशासन तेल बाजार (Oil Market) को स्थिर करने के प्रयास कर रहा है और इसके तहत कुछ देशों पर लगे प्रतिबंध हटा रहा है. उन्होंने कहा कि हमने कुछ देशों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट में शांति बहाल होने तक प्रतिबंध हटा रहे हैं. इस कदम का उद्देश्य Middle East War के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच Global Oil Supply को बढ़ावा देना है. ट्रंप के मुताबिक, दुनिया में वे तेल की कमी नहीं होने देंगे.
मिडिल ईस्ट में जंग जारी
Middle East में जंग लगातार जारी है. ईरान और अमेरिका ने युद्ध की आगे की स्थिति को लेकर एक-दूसरे को चेतावनी जारी की है. ईरान ने बहरीन में एक पेट्रोलियम परिसर अल मा'मीर सहित खाड़ी क्षेत्र में कई हमले किए हैं. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा कि वे युद्ध का अंत तय करेंगे. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पास सैन्य दृष्टि से अब कुछ भी नहीं बचा है. उन्होंने कहा है कि ईरानी नौसेना खत्म हो चुकी है, सब कुछ समुद्र के भीतर पड़ा है.
ट्रंप के संकेतों से तेल फिसला
बता दें कि बीते कारोबारी दिन सोमवार को Brent Crude Price तूफानी तेजी के भागते हुए 25 फीसदी से अधिक उछल गए थे और साल 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा था. ये 115 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गया था, लेकिन ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर दिए गए बयान के बाद इसमें अचानक तेज गिरावट देखने को मिली और ये 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया.