ईरान-अमेरिका में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 10 फीसदी टैरिफ लगाना सही नहीं है. कोर्ट ने इसे अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है.
अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने पाया कि लगाए गए 10% 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत कानूनी रूप से उचित नहीं है. इस कारण इसे रद्द करने का फैसला सुनाया है. यह टैरिफ ट्रंप ने ग्लोबल स्तर पर 24 फरवरी 2026 को दुनियाभर से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर लगाया था.
10 फीसदी का नया आयात शुल्क, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के व्यापक टैरिफ के रद्द करने के बाद लगाया गया था. 10 फीसदी का टैरिफ लगाए जाने के बाद इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था. अब फेडरल कोर्ट ने इसे रद्द करने का फैसला सुनाया है.
फैसला रद्द करते हुए कोर्ट ने क्या कहा?
अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है. वहीं एक जज का कहना था कि अभी भी छोटे बिजनेस के खिलाफ फैसना सुनाना अभी जल्दबाजी होगी. छोटे व्यवसायों ने तर्क दिया था कि नए टैरिफ अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले को दरकिनार करने की कोशिश थी, जिसने रिपब्लिकन राष्ट्रपति द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत लगाए गए 2025 के टैरिफ को रद्द कर दिया था.
कानून के तहत टैरिफ लगाना उचित नहीं था
अपने फरवरी के आदेश में, ट्रंप ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का हवाला दिया, जो गंभीर 'भुगतान संतुलन घाटे' को ठीक करने या डॉलर में गिरावट को रोकने के लिए 150 दिनों तक शुल्क लगाने की अनुमति देता है.
गुरुवार को अदालत के फैसले में पाया गया कि यह कानून उन व्यापार घाटे के लिए एक उपयुक्त कदम नहीं था जिनका जिक्र ट्रंप ने अपने फरवरी के आदेश में किया था. अब अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है.
किन सेक्टर पर असर नहीं?
गौरतलब है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के तहत नहीं आते हैं.