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Import Duties Hike: बढ़ती डिमांड से टेंशन में सरकार, क्या सोने-चांदी को लेकर बजट में होने वाला है ये खेल?

सोने-चांदी के दाम हर रोज बढ़ रहे हैं. 28 जनवरी 2026 को सोने की कीमत बढ़कर 1,64,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है, जबकि चांदी की कीमत बढ़कर रिकॉर्ड 3,84,000 रुपये प्रति किलो हो गई है.

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बजट में सोने-चांदी को लेकर बड़े ऐलान संभव. (Photo: PTI)
बजट में सोने-चांदी को लेकर बड़े ऐलान संभव. (Photo: PTI)

कीमतें बढ़ती जा रही हैं, फिर भी लोग खरीदते जा रहे हैं, बात सोने-चांदी की हो रही है, अब सरकार भी बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाना चाहती है. लेकिन कीमतें बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हैं. लेकिन भारत में जिस तेजी से लोग सोने-चांदी में निवेश कर रहे हैं, वो सरकार के लिए थोड़ा चिंता का विषय है. ऐसे में सामने बजट है, यानी चंद दिन के बाद बजट पेश किए जाएंगे, जिसमें सोने-चांदी को लेकर सरकार बड़े फैसले ले सकती है. 

खबर है कि सोना और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के विकल्प पर सरकार विचार कर रही है, इसकी बड़ी वजह ये है कि कीमतों में ताबड़तोड़ उछाल के बावजूद सोने-चांदी का आयात रिकॉर्ड स्तर पहुंच गया है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है और व्यापार घाटे में इजाफा होता दिख रहा है. हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में सोने और चांदी की मांग कम नहीं हो रही है.

सोने-चांदी की डिमांड में लगातार उछाल 

साल 2025 में भारत का सोना आयात करीब 59 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि चांदी का आयात सालाना आधार पर 44 फीसदी बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर रहा. इतनी बड़ी मात्रा में आयात से विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ा है और रुपये में कमजोरी देखी जा रही है. दोनों कीमती धातुओं का भारत के कुल 750 अरब डॉलर के आयात बिल में लगभग 9% हिस्सा था. फिलहाल सोन-चांदी पर देश में 6 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लागू है. पहले यह दरें 15 फीसदी तक थीं,

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विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के चलते निवेशकों का रुझान सोना-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स की ओर बढ़ा है. इसके अलावा गोल्ड (Gold) और सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) में रिकॉर्ड निवेश ने भी मांग को और मजबूत किया है. 

सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों से सरकार टेंशन में

अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि आयात पर नियंत्रण कैसे किया जाए, इसलिए आयात शुल्क में इजाफा एक विकल्प के तौर पर दिख रहा है, ताकि गैर-जरूरी आयात को काबू में लाया जाए और चालू खाते के घाटे को थोड़ा कम किया जा सके. हालांकि ड्यूटी बढ़ाने से तस्करी का खतरा भी बढ़ जाता है.

तमाम रिपोर्ट्स की मानें तो बजट- 2026 से पहले इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है. ऐसे में अगर सरकार शुल्क बढ़ाने का फैसला करती है, तो इसका असर घरेलू सोना-चांदी की कीमतों, ज्वेलरी इंडस्ट्रीज और निवेशकों पर पड़ सकता है. फिलहाल बाजार और उद्योग की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है. 

बता दें, 28 जनवरी 2026 को सोने की कीमत बढ़कर 1,64,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है, जबकि चांदी की कीमत बढ़कर रिकॉर्ड 3,84,000 रुपये प्रति किलो हो गई है.

हालांकि इतिहास बताता है कि आयात शुल्क बढ़ाने से सोने की मांग पर अंकुश लगाने में कोई खास सफलता नहीं मिली है. अगस्त 2013 में सोने पर आयात शुल्क को 2% से बढ़ाकर 10% किया गया था, तब भी मांग बनी हुई थी.

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(नोट: सरकार की ओर से कोई संकेत नहीं दिए गए हैं, बजट से पहले इंडस्ट्रीज एक्सपर्ट्स के आधार पर ये अनुमान लगाए जा रहे हैं.)

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