scorecardresearch
 

बिहार: घरवालों को बिना बताए चुपचाप निकलीं, लौटीं तो गले में था गोल्ड मेडल, हौसला बढ़ा देगी माहिरा और संध्या की कहनी

मुजफ्फरपुर की स्लम बस्ती में रहने वाली माहिरा कुमारी और संध्या कुमारी ने आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद राज्य स्तरीय वुशु चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर मिसाल कायम की है. दोनों लड़कियों ने परिवार को बताए बिना प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. अब उनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जहां वे बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी.

Advertisement
X
तंग गलियों से निकलकर चमकीं दो बेटियां. (Photo: Manibhushan Sharma/ITG)
तंग गलियों से निकलकर चमकीं दो बेटियां. (Photo: Manibhushan Sharma/ITG)

स्कूल जाने की इजाजत ही बड़ी मुश्किल से मिलती थी. ऐसे में खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की बात घरवालों को बताने की हिम्मत नहीं हुई. जब गोल्ड मेडल जीतकर घर लौटी तो पूरे परिवार और मोहल्ले को पता चला. इसके बाद सभी ने बधाई दी और हमारा हौसला बढ़ाया. यह कहना है मुजफ्फरपुर की 11 वर्षीय माहिरा कुमारी का, जिसने अपनी साथी संध्या कुमारी के साथ राज्य स्तरीय वुशु चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर एक नई मिसाल कायम की है.

मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्लम बस्ती की रहने वाली माहिरा और संध्या ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर, महंगे संसाधन या मजबूत आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती. अगर मेहनत और लगन हो तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपनों को पूरा किया जा सकता है.

भागलपुर के खेल भवन में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय सब-जूनियर एवं जूनियर वुशु चैंपियनशिप में दोनों लड़कियों ने अपने-अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. प्रतियोगिता में जीत के बाद दोनों खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भी हो गया है. अब वो बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी और राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी.

माहिरा और संध्या दोनों अप्पन पाठशाला की छात्राएं हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली इन बच्चियों ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी अपना भविष्य बनाने का सपना देखा. हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि खेल की ड्रेस और जरूरी सामान आसानी से खरीदा जा सके. इसके बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी और लगातार अभ्यास जारी रखा.

Advertisement

सब्जी बेचने वाले पिता की बेटी ने राज्य में जीता गोल्ड

11 वर्षीय माहिरा कुमारी के पिता सब्जी बेचकर परिवार का खर्च चलाते.  उनकी मां मजदूरी करती हैं. माहिरा पिछले पांच वर्षों से अप्पन पाठशाला में पढ़ाई कर रही है. करीब डेढ़ साल पहले उसने वुशु खेलना शुरू किया था. नियमित अभ्यास और मेहनत के दम पर उसने राज्य स्तर तक का सफर तय किया और अब स्वर्ण पदक विजेता बन गई है. 

माहिरा बताती है कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसने सबसे पहले अपने शिक्षक को फोन कर यह खुशखबरी दी. उसके लिए यह पल बेहद खास था क्योंकि शिक्षकों और प्रशिक्षकों ने हर कदम पर उसका साथ दिया. माहिरा अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य लेकर तैयारी कर रही है.

दूसरी तरफ 12 वर्षीय संध्या कुमारी अंबेडकर नगर स्लम बस्ती की रहने वाली है. उसके पिता पलदारी का काम करते हैं, जबकि मां घरों में चौका-बर्तन करके परिवार की मदद करती हैं. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद संध्या ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया. वह कई वर्षों से पढ़ाई के साथ-साथ वुशु का नियमित अभ्यास कर रही है.

संध्या का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है. वह कहती है कि यह सफलता उसके सफर की शुरुआत है और वह आगे भी कड़ी मेहनत करके देश के लिए पदक जीतना चाहती है. राज्य स्तर पर गोल्ड जीतने के बाद उसका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है. अप्पन पाठशाला के संस्थापक सुमित कुमार बताते हैं कि दो वर्ष पहले वुशु प्रशिक्षकों के सहयोग से बच्चों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था. इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना था.

Advertisement

बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण और खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई. आज माहिरा और संध्या की सफलता उसी प्रयास का परिणाम है. वुशु प्रशिक्षक सुनील कुमार का कहना है कि दोनों खिलाड़ी बेहद प्रतिभाशाली हैं. उन्होंने कम समय में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, वह उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है. राष्ट्रीय प्रतियोगिता को देखते हुए दोनों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे बड़े मंच पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें.

अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बिहार का नाम रोशन करने की तैयारी

माहिरा और संध्या की सफलता केवल दो खिलाड़ियों की जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. स्लम बस्ती की तंग गलियों से निकलकर राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली इन दोनों बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि अवसर मिलने पर हर बच्चा अपनी प्रतिभा से नई पहचान बना सकता है. अब पूरे मुजफ्फरपुर और बिहार की निगाहें राष्ट्रीय प्रतियोगिता पर टिकी हैं. लोगों को उम्मीद है कि राज्य स्तर पर स्वर्ण जीतने वाली ये दोनों बेटियां राष्ट्रीय मंच पर भी शानदार प्रदर्शन करेंगी और बिहार का नाम रोशन करेंगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement