बिहार के वैशाली जिले में साल 1992 के जानलेवा हमले के मामले में सजा पाए 85 वर्षीय दीप राय को जमानत मिल गई है. उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें राहत दी, जिसके बाद वे हाजीपुर जेल से रिहा होकर बाहर आ गए. उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए कोर्ट में जमानत की अर्जी दी गई थी, जिसमें बताया गया कि दीप राय खुद चलने-फिरने में असमर्थ हैं. उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं.
जानकारी के मुताबिक, राघोपुर क्षेत्र में साल 1992 में हुए जानलेवा हमले के मामले में एक ही परिवार के पांच लोगों को दोषी ठहराया गया था. इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद एडीजे-1 कोर्ट के जज मनोज तिवारी ने फैसला सुनाया था. फैसले के बाद दोषियों में शामिल 85 साल के दीप राय को भी जेल भेजा गया.
कोर्ट ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें जमानत दे दी. जमानत मिलने के बाद आज बुधवार को वे हाजीपुर जेल से बाहर निकले. एक ओर 35 साल पुराने मामले में फैसला आया, वहीं दूसरी ओर उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर एक बुजुर्ग दोषी को राहत मिल गई.
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, इस मामले की शुरुआत 10 मई 1992 से होती है. उस समय पुलिस के पास केस दर्ज कराया गया था, जिसमें पीड़ित ने आरोप लगाया कि राघोपुर इलाके में एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ घर के दरवाजे पर बैठा था. तभी एक ही परिवार के पांच लोग वहां पहुंचे और विवाद के दौरान उन पर हमला कर दिया. शिकायत में आरोप लगाया गया कि हमलावर हथियारों से लैस थे और उन्होंने फायरिंग के साथ जानलेवा हमला किया.
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घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. जांच शुरू हुई और अगले साल यानी 1993 में पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी. इसके बाद केस की सुनवाई शुरू हुई, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि फैसला आने में तीन दशक से ज्यादा का समय लग गया.
इस दौरान केस में नामजद पांच आरोपियों में से चार की मौत हो गई. आखिरकार केस के अंत तक सिर्फ एक आरोपी, दीप राय उर्फ जिसा राय जीवित बचे. कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें दंगा, घातक हथियार के साथ हमला और हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं के तहत दोषी करार दिया.