बिहार की पांच राज्यसभा सीट पर 6 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं, जिसके चलते मुकाबला काफी रोचक हो गया है. एनडीए की चार राज्यसभा सीटों पर जीत तय है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उपेंद्र कुशवाहा की राह काफी मुश्किल भरी है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पांचों विधायक ने आरजेडी कैंडिडेट अमरेंद्र धारी सिंह को समर्थन का ऐलान कर राहत दी, लेकिन कांग्रेस के चार विधायक 'नॉट रिचेबल' होने से महागठबंधन की सियासी टेंशन बढ़ गई. अब मतदान के लिए कांग्रेस के चार विधायक पहुंचे हैं, लेकिन क्या महागठबंधन की राह आसान करेंगे.
राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है, जो चार बजे तक चलेगी. इसके बाद शाम पांच बजे नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे. विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी से नितिन नबीन और शिवेश कुमार तो जेडीयू से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत तय है. इसके बाद एनडीए के बचे 38 विधायक पांचवें प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा को अपना वोट देंगे, लेकिन जीत के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए.
एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा की अग्निपरीक्षा विपक्ष के तीन विधायकों के वोट का समर्थन हासिल करने की है. वहीं, ओवैसी की पार्टी AIMIM के समर्थन के बाद तेजस्वी यादव को हौसले बुलंद हैं, लेकिन विपक्षी विधायकों को लामबंद करके रखना किसी चुनौती से कम नहीं है.
बिहार राज्यसभा की पांचवीं सीट कौन जीतेगा
बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत है. विधानसभा में सदस्यों की संख्या के आधार पर एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं जबकि विपक्ष के पास 35 विधायक हैं. इसके अलावा छह विधायक अन्य हैं. बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा को अपनी जीत के लिए आरजेडी से दो-दो हाथ करना होगा.
कुशवाह को तीन अतरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए तो आरजेडी के अमरेंद्र सिंह को 6 विधायकों का समर्थन चाहिए. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पांच विधायक ने आरजेडी प्रत्याशी अमरेंद्र सिंह को समर्थन करने का ऐलान कर दिया है. इतना ही नहीं बसपा विधायक सतीश यादव भी खुलकर आरजेडी के साथ खड़े हैं.ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के लिए तीन वोट जुटाना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है.
असदुद्दीन ओवैसी और तेजस्वी की जोड़ी
महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जिसमें आरजेडी,कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने अपना रुख स्पष्ट किया है. पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने पुष्टि की है कि एआईएमआईएम के सभी पांच विधायक राज्यसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे. एआईएमआईएम के पांच विधायक आरजेडी के समर्थन में आ गए हैं तो ये आंकड़ा 40 तक पहुंच चुका है.
बीएसपी के इकलौते विधायक सतीश यादव ने अगर अपना वोट आरजेडी के पक्ष में दिया तो तेजस्वी के उम्मीदवार जीत की दहलीज को पार कर जाएंगे. बसपा विधायक शुरू से आरजेडी के साथ है. हालांकि, राजनीति इतना भी आसान नहीं होती है कि कैलकुलेटर पर प्लस-माइनस कर लीजिए. राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए आरजेडी को अपने और कांग्रेस के विधायक के समर्थन को भी बनाए रखना होगा, क्योंकि राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का खतरा कम नहीं है.
कांग्रेस के विधायकों ने बढ़ाई आरजेडी की टेंशन
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के समर्थन और बसपा विधायक के खुलकर अमरेंद्र सिंह के समर्थन में उतरने के बाद आरजेडी ने राज्यसभा की एक सीट जीतने का नंबर जुटा लिया है, लेकिन कांग्रेस के 6 में 4 विधायक ट्रेसलेस बताए जा रहे हैं. संख्या बल के आधार पर पांचवीं सीट के लिए फंसा पेच अब कांग्रेस विधायकों के इर्द-गिर्द सिमट गया है. होटल पनाश में कांग्रेस के दो विधायक ही पहुंचे हैं, किशनगंज विधायक कमरुल होदा और चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन.
महागठबंधन ने अपने कुनबे को बचाने के लिए विधायकों को पटना के होटल पनाश में रखा है, लेकिन कांग्रेस के चार विधायकों की गैरहाजिर रहे. तेजस्वी यादव की किलेबंदी में कांग्रेस विधायकों ने सियासी टेंशन बढ़ा दी है. कांग्रेस के 6 विधायकों का समीकरण भी काफी जटिल हैं. इनमें से एक विधायक उपेंद्र कुशवाहा के करीबी माने जाते हैं, जबकि एक अन्य जेडीयू से आए हैं. इसके अलावा कांग्रेस के चार में तीन विधायक राजनीति में नए हैं.
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद मोर्चे पर डटे हुए हैं. वे देर रात तक होटल पनाश में विधायकों के साथ रणनीति बनाते रहे, लेकिन कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी ने टेशन बढ़ा रखी है. मनोहर सिंह (मनिहारी), मनोज विश्वास (फारबिसगंज), अब्दुर रहमान (अररिया सदर) और सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मिकीनगर) नहीं पहुंचे थे. इसीलिए अब इन्हीं विधायकों पर राज्यसभा चुनाव टिका हुआ है, ये जिस तरफ पलटी मारेंगे, उसी का गेम बनना तय है. राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग करने कांग्रेस के 6 में से 4 विधायक पहुंचे हैं, लेकिन किसे वोट देंगे यह तय नहीं है. इसके अलावा दो विधायकों से अभी भी संपर्क नहीं हो पा रहा है.
कुशवाहा क्या सियासी मझधार में तो नहीं फंस गए
एनडीए की तरफ से पांच कैंडिडेट राज्यसभा चुनाव में उतरे हैं, जिसमें बीजेपी और जेडीयू के दो-दो उम्मीदवार हैं. एनडीए ने अपने 202 विधायकों में से 41-41 विधायकों को जेडीयू और बीजेपी के उम्मीदवार को वोट देने के लिए फाइनल कर दिया है. इसके बाद बचे 38 विधायकों को उपेंद्र कुशवाहा को वोट देने के लिए कहा है. कुशवाहा को वोट देने के लिए जिन विधायकों को कहा गया है, उसमें 7 बीजेपी, तीन जेडीयू, चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक और जीतनराम मांझी की पार्टी के विधायक हैं. इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के चार विधायक हैं, लेकिन इन्हें मिलकर 38 वोट ही हो रहे हैं.
उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा पहुंचने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए, जिसके लिए उन्हें तीन विपक्ष वोटों को अपने साथ मिलाना होगा. आरजेडी की तरफ से दावा किया जा रहा है कि उनके साथ 48 विधायक हैं, लेकिन चर्चा है कांग्रेस के तीन से चार विधायक होटल नहीं पहुंचे हैं. हालांकि कांग्रेस के चार विधायकों के ट्रैसलेस होने की खबर का कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने खंडन किया है.
बताया जा रहा है कि पांचवीं सीट पर फंसी पेंच को सुलझाने के लिए विधायकों को एकजुट रखा जा रहा हैं, लेकिन खेमेबंदी ने दोनों की सियासी धड़कने बढ़ा रखी है. उपेंद्र कुशवाहा के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. ऐसे ही तेजस्वी यादव के लिए अपने उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह को जिताने की टेंशन बनी हुई है. अब देखना है कि कौन सियासी बाजी मारता है?