मोदी सरकार के बाद अब बारी नीतीश कुमार के अगुवाई बिहार सरकार के बजट की है. बिहार विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया है. विधानसभा चुनाव के बाद बनी नीतीश सरकार का पहला बजट सत्र है. आरिफ मोहम्मद खान के विधानमंडल में अभिभाषण से बजट सत्र का आगाज हो गया है. नीतीश सरकार में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव मंगलवार को बजट पेश करेंगे, जिसके जरिए एनडीए सरकार के भविष्य का रोडमैप तय होगा?
बिहार विधानमंडल का सत्र 27 फरवरी तक चलेगा. इस दौरान कुल 19 बैठकें होगी. एनडीए सरकार के लिए यह मौका अपनी प्राथमिकताएं और रोडमैप रखने का है, जबकि विपक्ष इसे घेरने की तैयारी में है. विपक्ष तमाम मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति बनाई है. ऐसे में सभी की निगाहें मंगलवार को सदन में पेश होने बजट पर है. नीतीश सरकार क्या ऐलान करती है?
बिहार सरकार में वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे. इसके बाद 5 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और मतदान होगा. ऐसे में सत्र के पहले ही सप्ताह में सरकार की नीतियों और नीयत, दोनों की परीक्षा होनी तय है. ऐसे में कुल मिलाकर, बिहार बजट 2026-27 विकास और संतुलन का बजट साबित हो सकता है, जिसमें आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रोजगार, शिक्षा, सड़क और महिला सशक्तिकरण पर मजबूत फोकस देखने को मिलेगा.
बजट से तय होगी नीतीश सरकार का रोडमैप
बिहार में नीतीश कुमार के अगुवाई वाली एनडीए सरकार बजट पेश कर अपना भविष्य का रोडमैप सामने रखेगी. माना जा रहा है कि बजट का सबसे बड़ा फोकस ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ पर रह सकता है. इसके तहत पात्र महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 2-2 लाख रुपये देने का प्रावधान किया जा सकता है. सरकार का लक्ष्य है कि हर परिवार में एक महिला उद्यमी बने. इसके लिए बजट में बड़ी राशि रखे जाने की संभावना है, क्योंकि एनडीए की जीत में महिला वोटरों का रोल अहम था.
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि इस बार का बजट बिहारवासियों के लिए बेहद खास होगा. उत्साह से भरा होगा. अभी सबकुछ नहीं बता सकता अभी ही सब बता देंगे कि बिहारवासियों की उत्साह ख़त्म हो जाएगी. बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए कहा कि इससे बिहार को काफी फायदे होंगे. हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बिहार से होकर गुज़रेगा. वहीं, जल मार्ग को बेहतर बनाया जाएगा.
बिहार में पेश होने बजट को लेकर दिलीप जायसवाल ने कहा कि मंगलवार को एनडीए सरकार का पेश होने वाला बजट बिहार को बेहतर बनाने की दिशा पर केंद्रित होगा. इस बजट में उद्योग के क्षेत्र में रोज़गार के क्षेत्र में काफी काम होगा. बिहार में सड़कों का जाल बिछाने की तस्वीर कैसी होगी वो साफ नज़र आएगा. बजट के जरिए एनडीए सरकार के विकास का रोडमैप होगा.
चुनावी वादों को अमलीजामा पहने का प्लान
नीतीश सरकार का यह पहला बजट है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं. ऐसे में चुनावी वादों के बाद आर्थिक दबाव के बीच यह बजट रोजगार, महिलाओं, किसानों, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर केंद्रित हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, इस बार बजट का आकार करीब 3.70 लाख करोड़ रुपए हो सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक का इजाफा होगा, हालांकि यह वृद्धि पिछले बजट की तुलना में कुछ कम मानी जा रही है.
एनडीए सरकार की कोशिश रहेगी कि पिछले साल के लगभग 13 प्रतिशत बजट वृद्धि की रफ्तार को किसी तरह बरकरार रखा जाए. चुनावी साल खत्म होने के बाद संसाधनों पर दबाव जरूर है, लेकिन सरकार विकास की गति धीमी नहीं होने देना चाहती. इसके अलावा एनडीए सरकार की सत्ता में वापसी, जिन वादों पर हुई है, उसे भी अमलीजामा पहनाने का दबाव है.
नौकरी और रोजगार पर रहेगा फोकस
बजट 2026-27 का सबसे अहम फोकस नौकरी और रोजगार रहेगा. नीतीश सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी या रोजगार उपलब्ध कराना है. पहले साल करीब 20 लाख युवाओं को रोजगार देने की योजना है. इसके लिए हर जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं और इसके लिए करीब 2000 करोड़ रुपए के प्रावधान की उम्मीद है.
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू का फोकस युवाओं पर रहा है. नीतीश सरकार ने पांच साल में एक करोड़ रोजगार का वादा कर रखा है. यही वजह है कि पहले साल 20 लाख रोजगार और नौकरी देने की दिशा में कोई बड़ा ऐलान कर सकती है. बिहार में प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे कम मानी जाती है और बड़े पैमाने पर पलायन एक गंभीर समस्या है. ऐसे में उद्योगों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता है. इससे बेरोजगारी घटेगी, पलायन कम होगा और लोगों की आय में बढ़ोतरी होगी.,
सड़क और कृषि उद्योग को मिलेगी रफ्तार
बजट में सड़क और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी बड़ा दांव खेला जा सकता है. माना जा रहा है कि बजट में बिहार में कई नए एक्सप्रेस-वे के लिए फंड का प्रावधान किया जा सकता है. ग्रामीण सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए करीब 9000 करोड़ रुपए, जबकि हाईवे, पुल-पुलिया और बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 5500 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है.
नीतीश सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के किसी भी कोने से पटना तक पांच घंटे से कम समय में पहुंचा जा सके. बेहतर सड़कों से न सिर्फ आम लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और उद्योगों को लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलने में भी मदद मिलेगी. नए उद्योगों को आकर्षित करने के लिए बजट में निजी निवेश, टेक हब और औद्योगिक विस्तार पर जोर रहेगा.
सरकार बिहार में मखाना, डेयरी और ‘हर खेत को पानी’ जैसी योजनाओं के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने की तैयारी में है. इसके साथ ही बिहार सरकार की नई बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2026 के तहत आईटी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित किया जाएगा. ऐसे में देखना है कि मंगलवार को नीतीश कुमार के पिटारे से क्या क्या निकलता है?