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RTI में बाहर आया 'क्रैश-टेस्ट' का सच! Bharat NCAP में फाइनल रेटिंग से पहले दोबारा टेस्ट हुई थीं ये कारें

Bharat NCAP Crash Test: भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (Bharat NCAP) भारत सरकार द्वारा 22 अगस्त 2023 को लॉन्च किया गया था. इसके तहत वाहनों को उनके क्रैश टेस्ट के बाद मजबूती के आधार पर सेफ्टी रेटिंग दी जाती है. अब एक RTI में इसके क्रैश टेस्ट प्रोसेस का खुलासा हुआ है.

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Bharat NCAP द्वारा बलेनो और बसाल्ट को छोड़कर ज्यादाकर कारों को 5-स्टार रेटिंग मिली है. Photo: ITG
Bharat NCAP द्वारा बलेनो और बसाल्ट को छोड़कर ज्यादाकर कारों को 5-स्टार रेटिंग मिली है. Photo: ITG

Bharat NCAP Crash Test, RTI: आजकल कार कंपनियां गाड़ी बेचने से पहले एक चीज सबसे ज्यादा बेचती हैं - “सेफ्टी.”  लॉन्चिंग के दौरान गाड़ी स्टेज पर आती है. बड़ी-बड़ी स्क्रीन चमकती हैं. तकनीकी और फीचर्स गिनवाए जाने के बाद एक लाइन सबसे जोर से बोली जाती है - “5 स्टार सेफ्टी रेटिंग.” लेकिन ये स्टार आखिर मिलते कैसे हैं? कौन तय करता है कि कौन सी गाड़ी सुरक्षित है और कौन सी नहीं? अब इसी खेल की अंदर की कहानी एक RTI से बाहर आई है. पता चला है कि Bharat NCAP में कई गाड़ियों का दोबारा टेस्ट हुआ, कुछ रिजल्ट रोके गए और सरकार ने अब तक खुद किसी कार को टेस्ट के लिए नहीं चुना. यानी मामला सिर्फ गाड़ी टकराने का नहीं, आंकड़ों और नियमों का भी है. आइये विस्तार से समझते हैं.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से एक (राइट टू इंफॉर्मेशन) RTI के जवाब में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. इस खुलासे से पता चला है कि भारत में कारों के क्रैश टेस्ट और सेफ्टी रेटिंग का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और किन कारणों से कुछ गाड़ियों का दोबारा टेस्ट किया गया. यह आरटीआई मार्च 2026 में दाखिल की गई थी. TeamBHP की एक पोस्ट के मुताबिक इसमें पूछा गया था कि Bharat NCAP में गाड़ियों का चयन कैसे होता है, क्रैश टेस्ट के दौरान कौन-कौन से मॉडिफायर इस्तेमाल किए जाते हैं और किन परिस्थितियों में किसी कार का दोबारा टेस्ट किया जाता है.

RTI के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक Bharat NCAP कुल 35 कार मॉडलों का टेस्ट कर चुका है. खास बात यह रही कि इन सभी गाड़ियों को कंपनियों ने खुद टेस्टिंग के लिए भेजा था. सरकार की तरफ से अब तक किसी भी कार को सीधे टेस्ट के लिए नहीं चुना गया. हालांकि AIS-197 नियमों के तहत सरकार को यह अधिकार मिला हुआ है कि वह किसी भी वाहन को टेस्टिंग के लिए नॉमिनेट कर सकती है.

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Bharat NCAP RTI
Bharat NCAP द्वारा 7 कारों को फाइनल रेटिंग से पहले री-टेस्ट किया गया था. Photo: TeamBHP

इन गाड़ियों की दोबारा टेस्टिंग

आरटीआई के जवाब में यह भी खुलासा हुआ कि देश में बेची जाने वाली 7 गाड़ियों का फाइनल सेफ्टी रेटिंग जारी होने से पहले दोबारा टेस्ट या री-असेसमेंट किया गया था. इनमें मारुति सुजुकी डिजायर, टाटा पंच (ICE), टाटा सिएरा (ICE), टाटा कर्व (ICE), महिंद्रा एक्सयूवी 3एक्सओ, महिंद्रा एक्सयूवी 400 ईवी, और महिंद्रा बीई 6 जैसी कारें शामिल हैं.

मंत्रालय के मुताबिक यह री-टेस्ट AIS-197 के क्लॉज 6.2 के तहत किए गए थे. नियमों के अनुसार अगर किसी टेस्ट में डेटा अधूरा हो, कुछ जरूरी पैरामीटर गायब हों या रिजल्ट तय सीमा से बाहर हों तो दोबारा टेस्ट या री-असेसमेंट किया जा सकता है. इसी नियम के आधार पर इन गाड़ियों को दोबारा टेस्ट किया गया था. इसके बाद इन कारों की फाइनल रेटिंग तय की गई. बता दें कि, इन सभी कारों को Bharat NCAP में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग दी गई है. 

क्यों जरूरी है री-टेस्ट

Bharat NCAP में दोबारा टेस्ट होना कोई असामान्य बात नहीं मानी जाती. दुनिया के दूसरे बड़े सेफ्टी प्रोग्राम भी कई बार री-असेसमेंट करते हैं. इसका मकसद टेस्ट रिजल्ट को पूरी तरह सही बनाना और किसी सुधार की सही तरीके से पुष्टि करना होता है. इसके बाद ही गाड़ियों की फाइनल सेफ्टी रेटिंग जारी की जाती है. इस खुलासे के बाद अब साफ हो गया है कि उपर बताई गईं कारें केवल एक बार में क्रैश टेस्ट में पास नहीं हुईं थीं. 
 

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