मुकेश कुमार गजेंद्र वर्तमान में आजतक डिजिटल (इंडिया टुडे ग्रुप) में सीनियर असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. न्यूज डेस्क पर अपनी भूमिका निभाते हुए वे नेशनल और इंटरनेशनल खबरों के लेखन, संपादन और विश्लेषण में सक्रिय हैं. न्यूज एनालिसिस और ओपिनियन राइटिंग उनकी प्रमुख विशेषज्ञता मानी जाती है, जहां वे जटिल मुद्दों को सरल, तथ्यपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से पाठकों तक पहुंचाते हैं. एंटरटेनमेंट और क्राइम बीट पर उनका लंबा अनुभव रहा है, जिसने उनकी रिपोर्टिंग को गहराई और संतुलन दिया है.
आजतक से पहले वे दैनिक भास्कर डिजिटल, टाइम्स ग्रुप, इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप, पिंकविला और लोकसभा टीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनकी एक मजबूत पहचान रही है. दैनिक भास्कर डिजिटल में कार्य करते हुए उन्होंने निठारी कांड, आरुषि मर्डर केस, ज्योति मर्डर केस (कानपुर) और बदायूं गैंगरेप केस जैसे चर्चित मामलों की गहन और प्रभावशाली कवरेज की. निठारी कांड की रिपोर्टिंग के दौरान वे लखनऊ, नोएडा से लेकर उत्तराखंड के मंगरूखाल (अल्मोड़ा) तक पहुंचे और मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली के परिवार से बातचीत कर उसका पक्ष सामने लाया. उनका यह एक्सक्लूसिव कवरेज देशभर में चर्चा का विषय बना और केस की दिशा पर भी व्यापक असर पड़ा.
मुकेश कुमार गजेंद्र फिल्म पत्रकार और क्रिटिक के रूप में भी व्यापक पहचान रखते हैं. वे अब तक 300 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज का रिव्यू कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों और फिल्मकारों के इंटरव्यू किए हैं. इनमें अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सौरभ शुक्ला, आयुष्मान खुराना, मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, तापसी पन्नू, परिणीति चोपड़ा, कृति सैनन और कार्तिक आर्यन जैसे नाम शामिल हैं. उनके इंटरव्यू और समीक्षाएं अपनी स्पष्टता, संतुलन और विश्लेषणात्मक दृष्टि के लिए जानी जाती हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य और मास कम्युनिकेशन में पोस्टग्रेजुएशन किया है. इसके अलावा हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा, साइंस और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म में स्पेशलाइजेशन भी किया है. साल 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय मुकेश लगातार बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ खुद को ढालते हुए सियासत, सिनेमा और समाज के बीच नई कहानियों को खोजने, समझने और गढ़ने का काम कर रहे हैं. उनकी लेखनी का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को सोचने, समझने और जुड़ने के लिए प्रेरित करना है.