वानुअतु में भूकंप के दो जोरदार झटके, 7.2 और 6.9 की तीव्रता से कांपी धरती

वानुआतू द्वीप में 24 अक्टूबर को सुबह 8:01 बजे 7.1 तीव्रता का भूकंप आया. वानुआतू ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में लगभग 1,750 किलोमीटर दूर स्थित है. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है.

Advertisement
वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है. (Representative Image) वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है. (Representative Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST

वानुआतू द्वीप में भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई है. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है. यह भूकंप दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित वानुआतू के कई द्वीपों को प्रभावित कर सकता है. 

यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, उसी क्षेत्र में लगभग 25 सेकंड के अंतराल पर 6.9 तीव्रता का एक और भूकंप भी दर्ज किया गया.

Advertisement
वानुअतु में भूकंप (Photo: X/USGS)

पहली भूकंप रिपोर्ट में भूकंप का केंद्र सोला, वानुअतु से लगभग 200 किमी पश्चिम में 10 किमी की गहराई पर दर्ज किया गया. वहीं, दूसरी रीडिंग में भूकंप का केंद्र पोर्ट-ओलरी के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में लगभग 197 किमी दूर, 10 किमी की गहराई पर था.

दोनों रीडिंग दक्षिण प्रशांत के एक ही हिस्से में उथली भूकंपीय गतिविधि की ओर इशारा करती हैं.

यह भी पढ़ें: धरती के नीचे 200 साल से जमा है ऊर्जा, तिब्बत के भूकंप के बाद हिमालय पर कितना बड़ा खतरा?

भूकंप के बाद वानुअतु में भूकंप के तेज झटकों के बाद जान-माल के नुकसान या इमारतों को पहुंची क्षति के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. 

सुनामी की स्थिति के बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है. 

वानुआतू दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्विपीय देश है. वानुआतू ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और फिजी के पश्चिम में पड़ता है. यह कई छोटे बड़े द्वीपों से मिलकर बना है. वानुआतू ऑस्ट्रेलिया से लगभग 1,750 किलोमीटर पूर्व में स्थित है. 

Advertisement

क्यों आते हैं भूकंप

पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी हुई हैं. ये प्लेटें लगातार चलती रहती हैं लेकिन इनकी गति बहुत धीमी रहती है. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के खिलाफ रगड़ खाती हैं, तो इनमें भारी दबाव और ऊर्जा पैदा होती है. जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो धरती हिलने लगती है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »