US में पढ़ाई के बाद नौकरी करना होगा महंगा! विदेशी छात्रों को देनी पड़ सकती है 83 लाख की फीस

अमेरिका में विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद नौकरी करने में अब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. दरअसल ट्रंप सरकार अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां नौकरी करने की परमिशन देने के लिए लाखों रुपए बतौर फीस वसूलने की तैयारी में है. हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर व्हाइट हाउस की अंतिम मंजूरी बाकी है.

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ट्रंप OPT प्रोग्राम के तहत फीस ले सकती है. (Photo- ITGD) ट्रंप OPT प्रोग्राम के तहत फीस ले सकती है. (Photo- ITGD)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:49 AM IST

ट्रंप सरकार अमेरिका में उच्च शिक्षा लेने वाले विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी में है. इसके तहत अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेशी छात्रों को काम करने के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की फीस देनी पड़ सकती है. 

अमेरिकी सरकार ये फीस 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) प्रोग्राम पर लागू करेगी. ये व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने स्टूडेंट वीजा पर ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद एक से तीन साल तक अमेरिका में काम करने की परमिशन देती है. 

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साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 4,19,000 विदेशी छात्र इस प्रोग्राम के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे. सूत्रों की मानें तो अगर ये नियम लागू होता है, तो अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का विदेशी छात्रों का रुझान काफी कम हो सकता है. 

इस कदम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लीगल इमिग्रेशन को सीमित करने के फैसले के तहत भी देखा जा रहा है. इस फैसले से अमेरिकी विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है, जो विदेशी छात्रों की फीस पर काफी हद तक निर्भर हैं. इसके अलावा सिलिकॉन वैली और वॉल स्ट्रीट की दिग्गज तकनीकी और वित्तीय कंपनियों को भी तकनीकी पदों पर टैलेंट्स हायर करने में भारी मशक्कत करनी पड़ेगी.

H-1B वीजा विवाद के बाद नया कदम

इससे पहले ट्रंप सरकार ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की लेवी लगाने की कोशिश की थी. हालांकि, बोस्टन की एक अदालत ने पिछले सप्ताह ही सरकार को H-1B फीस वसूलने से रोक दिया था. अब माना जा रहा है कि OPT पर ये भारी फीस लगाकर सरकार अपने उसी मकसद को हासिल करना चाहती है. 

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हालांकि, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) में अभी इस पर चर्चा जारी है. व्हाइट हाउस इसे अंतिम मंजूरी देगा या नहीं, ये फैसला होना अभी बाकी है. साथ ही ये भी तय नहीं हुआ है कि ये फीस छात्र खुद भरेंगे या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियां.

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