मिडिल ईस्ट पहुंचा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS George Washington, लिंकन को 250 दिनों बाद मिलेगी राहत

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में USS George Washington एयरक्राफ्ट कैरियर को तैनात किया है, जो लंबे समय से क्षेत्र में मौजूद USS Abraham Lincoln की जगह लेगा.

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यूएसएस अब्राहम लिंकन को अब 250 दिन बाद जंग से राहत मिलेगी. (File Photo: Getty) यूएसएस अब्राहम लिंकन को अब 250 दिन बाद जंग से राहत मिलेगी. (File Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपने USS George Washington एयरक्राफ्ट कैरियर को एरिया में तैनात कर दिया है. अमेरिकी सेना ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. एशिया में तैनात रहने वाला USS George Washington अब लंबे समय से मिडिल ईस्ट में मौजूद USS Abraham Lincoln की जगह लेगा. Lincoln की लंबी तैनाती के दौरान क्रू में टेंशन, मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों और जरूरी सामान की कमी की खबरें सामने आई थीं.

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मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालने वाली US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि USS George Washington बुधवार को क्षेत्र में पहुंच गया. हालांकि USS Abraham Lincoln अमेरिका कब वापस पहुंचेगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि वापसी के दौरान वह किसी बंदरगाह पर रुकेगा या नहीं. मिडिल ईस्ट से अमेरिका तक इसकी यात्रा में एक महीने से ज्यादा का समय लग सकता है.

250 दिनों से ज्यादा लगातार समुद्र में रहा Lincoln

USS Abraham Lincoln की लंबी तैनाती को लेकर पिछले कुछ समय से सवाल उठ रहे थे. एयरक्राफ्ट कैरियर ने 250 दिनों से ज्यादा समय तक बिना किसी ब्रेक के लगातार समुद्र में रहने का रिकॉर्ड बनाया है. इस दौरान क्रू में तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ खाने-पीने और हाइजीन से जुड़े सामान की कमी की रिपोर्ट भी सामने आईं.

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अमेरिका के कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने Lincoln पर मौजूद परिस्थितियों को लेकर रक्षा विभाग से जवाब मांगा है. हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि हालात को पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया गया है. हेगसेथ ने पिछले सप्ताह Lincoln के क्रू से बातचीत भी की थी. इसके बाद US Central Command के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताहांत जहाज का दौरा किया. कूपर ने क्रू के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है और अब उनके घर लौटने का समय है.

ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी

एयरक्राफ्ट कैरियर की लंबे समय तक तैनाती से न केवल सैनिकों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि जहाज और उसके उपकरणों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल के हफ्तों में तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर दोबारा लगाई गई नाकेबंदी को लागू कर रही है. ट्रंप प्रशासन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को किस तरह समाप्त करना चाहता है. रक्षा मंत्री हेगसेथ का कहना है कि अमेरिका इस नाकेबंदी को अनिश्चितकाल तक जारी रखने में सक्षम है.

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी USS Lincoln पर खराब परिस्थितियों से जुड़ी रिपोर्ट्स को ज्यादा तवज्जो नहीं दी. Lincoln नवंबर में सैन डिएगो स्थित अपने होमपोर्ट से रवाना हुआ था और जनवरी में मिडिल ईस्ट पहुंचा था. ट्रंप ने करीब नौ महीने की तैनाती को लंबा मानने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसैनिक इससे भी ज्यादा समय तक समुद्र में रह चुके हैं.

मिडिल ईस्ट में अब दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर

USS George Washington अब मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद USS George H.W. Bush के साथ तैनात होगा. इसके चलते फिलहाल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का कोई एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मौजूद नहीं रहेगा.

यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. हालांकि अमेरिकी नौसेना अगले कुछ महीनों में किसी अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर को प्रशांत क्षेत्र में तैनात कर सकती है. विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान के साथ लंबे समय से जारी अमेरिकी सैन्य अभियान नौसैनिकों और संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

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