अमेरिका और ईरान दोनों ने दी बड़े हमले की वॉर्निंग... पढ़ें- युद्ध के तीसरे दिन क्या-क्या हुआ

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है. सवाल यह है कि क्या यह एक रणनीतिक कार्रवाई थी या महायुद्ध की शुरुआत.

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ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद उठता धुआं. (Photo: AP) ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद उठता धुआं. (Photo: AP)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:35 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. इस घटना के बाद न सिर्फ मध्य-पूर्व में हालात विस्फोटक हो गए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी भूचाल आ गया है. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि खामेनेई के खात्मे के पीछे आखिर किसका हाथ है? क्या यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला था, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति, सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान या फिर किसी बड़े वैश्विक गठजोड़ की साजिश? खामेनेई की मौत के बाद कई थ्योरी सामने आ रही हैं और अटकलों का बाजार गर्म है. हम इन थ्योरी की पड़ताल करेंगे, लेकिन पहले जानते हैं अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से जुड़े आज के 10 बड़ी अपडेट.

युद्धविराम पर कोई बातचीत नहीं: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर कोई वार्ता नहीं होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की तरफ से बातचीत की पेशकश की गई है.

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मिडिल ईस्ट पर हमलों को जवाबी कार्रवाई: ईरान ने मिडिल ईस्ट के देशों पर हवाई हमलों को जवाबी कार्रवाई बताया. दावा किया कि ये हमले मिडिल ईस्ट के देशों पर नहीं, बल्कि अमेरिकी ठिकानों पर किए जा रहे हैं. ये अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों का पलटवार हैं.

30 घंटों में 2000 से ज्यादा बम: ईरान पर 30 घंटों के दौरान अमेरिका और इजरायल ने 2000 से ज्यादा बम बरसाए. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल भी किया गया. अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले हुए, जिसमें 555 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.

कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमान क्रैश: कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमान के क्रैश का वीडियो सामने आया. ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया, वहीं अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरान ने नहीं, बल्कि कुवैत ने गलती से अमेरिका के तीन F-15E लड़ाकू विमानों को मार गिराया.

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अरामको की रिफाइनरी पर ड्रोन हमला: सऊदी की कंपनी अरामको की रिफाइनरी पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया. अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है. हमले के बाद रिफाइनरी से धुएं का गुबार उठा और इसे बंद करना पड़ा. कंपनी का दावा है कि हमले में कोई हताहत नहीं हुआ.

नतांज न्यूक्लियर साइट पर हमला: ईरान ने नतांज न्यूक्लियर साइट पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आरोप लगाया. दावा किया कि परमाणु साइट को निशाना बनाया गया. IAEA का बयान है कि नतांज पर कोई हमला हुआ ऐसा कोई सबूत नहीं है और न ही एटमी सेंटर को कोई नुकसान पहुंचा है.

नेतन्याहू के दफ्तर पर मिसाइल हमला: IRGC ने नेतन्याहू के दफ्तर पर मिसाइल से हमले का दावा किया. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री के दफ्तर के साथ-साथ इजरायली वायुसेना के टॉप कमांडर के ठिकाने को निशाना बनाया गया. इजरायल ने दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई हमला इजरायल की जमीन पर नहीं हुआ है.

लेबनान पर इजरायली हमले: लेबनान पर इजरायल ने ताबड़तोड़ हमले किए. कई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक में 31 से ज्यादा लोग मारे गए. ये हमले तब हुए जब हिज्बुल्लाह ने खामेनेई की मौत के बाद इजरायल पर रॉकेट से हमले किए थे.

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आयरन बीम का पहला इस्तेमाल: इजरायल ने पहली बार आयरन बीम एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया. हिज्बुल्लाह की तरफ से दागे गए रॉकेटों और ड्रोन को लेजर डिफेंस सिस्टम की मदद से हवा में ही रोक दिया. इजरायल के आयरन डोम ने ईरान की घातक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया.

ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जंग लंबी खिंच सकती है. ये जंग कुछ दिनों में खत्म नहीं होगी, इसे खत्म होने में पांच हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग सकता है.

आइए अब जानते हैं कि अली खामेनेई की मौत की रणनीति कैसे और कहां बनी...

तेहरान के लीडरशिप हाउस कंपाउंड पर 28 फरवरी की सुबह हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह हमला अमेरिका और इजरायल के साझा सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा था. हमले के बाद पूरे ईरान में अफरा-तफरी मच गई, जबकि अमेरिका-ईरान टकराव खुली जंग में तब्दील होता नजर आने लगा. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ऑपरेशन खामेनेई' को लेकर बड़ा खुलासा किया है. ट्रंप का कहना है कि अगर वह अली खामेनेई की मौत की तारीख तय नहीं करते तो खुद इतिहास की एक तारीख बन जाते.

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डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि अली खामेनेई उनकी हत्या की प्लानिंग कर रहे थे. ईरान की ओर से उनकी हत्या की दो बार साजिश रची गई थी, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने वक्त रहते नाकाम कर दिया. सवाल यह है कि क्या ट्रंप और खामेनेई की निजी अदावत ईरान के सुप्रीम लीडर के खात्मे की वजह बन गई? ट्रंप को लगता था कि खामेनेई उनके खून के प्यासे हैं. उनका यह बयान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर मुहर है, जिसमें कहा गया था कि ईरान की सरकार ने ट्रंप को मरवाने की साजिश रची थी. ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में अमेरिकी एजेंसियों ने फरहाद शेकेरी नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एजेंट बताया गया था.

बीते साल ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी के बाद अली खामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जंग का ऐलान किया था. ट्रंप लगातार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहे थे. खामेनेई के सलाहकार मुशीर मोहम्मद जवाद लारीजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को जान से मारने की धमकी दी थी. ईरान के सरकारी टीवी पर उन्होंने कहा कि ट्रंप अपने घर मार-ए-लागो में भी सुरक्षित नहीं हैं, ईरान एक ड्रोन से उन्हें निशाना बना सकता है. ट्रंप ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्हें धूप सेंकने में दिलचस्पी नहीं है.

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ऑपरेशन खामेनेई: कैसे बुना गया प्लान?

डोनाल्ड ट्रंप के टेबल पर खामेनेई को मारने का प्लान बीते साल जून में ही रखा गया था, जब ईरान और इजरायल के बीच युद्ध हुआ. लेकिन तब ट्रंप ने हरी झंडी नहीं दी थी. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान में अपने लोकल नेटवर्क से खामेनेई की पूरी मूवमेंट की डिटेल हासिल कर रखी थी. ट्रंप ने 17 जून, 2025 को कहा था, 'हमें ठीक-ठीक पता है कि ईरान के सुप्रीम लीडर कहां छिपे हैं. वह एक आसान लक्ष्य हैं, लेकिन अभी सुरक्षित हैं. हम उन्हें मार नहीं सकते, कम से कम अभी तो नहीं.' मतलब, सीआईए और मोसाद का नेटवर्क खामेनेई की सरकार के नाक के नीचे एक्टिव था.

ट्रंप का 17 जून 2025 का दावा 28 फरवरी 2026 को सच साबित हुआ. इजरायल और अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने ईरान में घुसकर दिन के उजाले में खामेनेई और उनके टॉप कमांडरों को मौत की नींद सुला दिया. ईरान की खुफिया एजेंसी और सेना अमेरिका-इजरायल की एजेंसियों को मात देने में नाकाम रही. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईए पिछले कई महीनों से खामेनेई की मूवमेंट पर नजर रखे हुए थी. खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों के बाद सीआईए ने अपना नेटवर्क एक्टिव किया. दो बड़े इनपुट मिले- ईरान अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल बना रहा है और ट्रंप ईरान की हिट लिस्ट पर हैं. इसी इनपुट के आधार पर खामेनेई के डेथ वारंट पर दस्तखत हुए.

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सीआईए को पुख्ता जानकारी मिली कि 28 फरवरी की सुबह तेहरान के लीडरशिप कंपाउंड में अली खामेनेई की मौजूदगी में टॉप अफसरों की बैठक है. अमेरिका ने यह डिटेल इजरायल के साथ साझा की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले इस हमले को रात में अंजाम देने की तैयारी थी, लेकिन रणनीति बदलकर दिन के उजाले में हमला किया गया, ताकि खामेनेई के साथ-साथ ईरान की पूरी टॉप लीडरशिप को निशाना बनाया जा सके. 28 फरवरी की सुबह 6 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ. दो घंटे बाद इजरायली फाइटर जेट्स से दागी गई लंबी दूरी की मिसाइलों ने तेहरान के लीडरशिप हाउस कंपाउंड को तबाह कर दिया. करीब 30 बम गिराए गए, जिससे पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया. 

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी हमले किए हैं. मिसाइल और ड्रोन हमलों से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है. ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं, जबकि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया है. वहीं, वैश्विक मंच पर इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या खामेनेई का खात्मा एक सोची-समझी रणनीति थी या फिर यह एक बड़े युद्ध की शुरुआत है. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आगे यह टकराव किस दिशा में जाएगा. 

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