इजरायल जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला करने वाले को-पायलट ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया था, ऐसी संभावना जताई जा रही है. रविवार को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियां अभी हमले के मकसद का पता लगाने में जुटी हैं.
को-पायलट की पहचान की ऑफिशियल पुष्टि अभी भी नहीं
आरोपी को-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हमामी के रूप में बताई जा रही है, लेकिन ऑफिशियली अभी उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की मानें तो कट्टरपंथी विचारों को लेकर ही अल-हमामी को पहले ओमान में विमान उड़ाने से रोक दिया गया था.
को-पायलट ही था अकेला हमलावर?
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, एक इजरायली अधिकारी ने जांच से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर कहा कि संदिग्ध ने संभवतः अकेले ही हमला किया था. एक अन्य इजरायली सोर्स ने कहा कि फिलहाल इजरायल को आरोपी के किसी संगठन या सरकार से संबंध होने की जानकारी नहीं मिली है.
सभी तरह के संदेह और संभावनाओं पर पड़ताल जारी
हालांकि, दोनों अधिकारियों ने साफ किया कि यह जांच की मौजूदा स्थिति के आधार पर उनकी समझ है. सीबीएस न्यूज ने भी इजरायल की शुरुआती जांच के हवाले से बताया कि विमान को कथित तौर पर हाईजैक करने की कोशिश 'लोन-वुल्फ' हमला हो सकती है. हालांकि, जांच अभी जारी है और सभी संभावनाओं की पड़ताल की जा रही है.
संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल दोनों इस मामले की जांच कर रहे हैं. वहीं, सऊदी अरब का गृह मंत्रालय भी जांच में जुटा है, जहां विमान की आपात लैंडिंग कराई गई थी. यूएई ने शनिवार को कहा था कि उसकी जांच में सामने आया है कि सह-पायलट ने 'आतंकवादी कृत्य' को अंजाम देने की कोशिश की थी.
क्या हुआ था फ्लाइट में?
बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 दुबई से इजरायल जा रही थी, तभी कैप्टन स्मित मछार पर हमला हुआ. इस दौरान विमान कुछ ही मिनटों में हजारों फीट नीचे आ गया. घायल होने के बावजूद कैप्टन मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को खतरे का संकेत दिया. इसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने कॉकपिट में पहुंचकर विमान को नियंत्रण में लेने में मदद की.
विमान में कुल 174 यात्री सवार थे. घटना के दौरान विमान ने आपात संकेत भेजे और करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट से अधिक की तेजी से गिरावट दर्ज की. इस बीच जांच ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गई है. ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस अल-हमामी के देश से संबंधों की जांच कर रही है.
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के मुताबिक, उसे 2014 में छात्र वीजा मिला था और उसने 2015 से 2017 तक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी. बाद में 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था. एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वीजा उसके चरित्र से जुड़े किसी आधार पर नहीं, बल्कि पढ़ाई में नामांकन नहीं रहने के कारण रद्द किया गया था.
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