यमन में हूती हमलों के बीच ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है. दोनों पक्षों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और असुरक्षा पर चर्चा की और संकट को फैलने से रोकने के साथ इलाके में स्थिरता और सुरक्षा लौटाने के लिए सहयोग और कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया.
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब यमन में लड़ाई तेज हुई है और हूती हमलों को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर एक आर्टिलरी हमले का आरोप लगाया था, जिसमें तीन बच्चों की मौत हुई. वहीं, सऊदी अरब ने ईरान समर्थित समूह पर अपने बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाने का आरोप लगाया.
बुधवार को सामने आए इन दावों के बीच हूतियों ने 12 घंटे के दौरान सऊदी अरब की ओर से किए गए 54 हवाई हमलों के जवाब में कार्रवाई करने की बात कही थी. सऊदी समर्थित सरकारी बलों और हूतियों के बीच फिर शुरू हुई यह लड़ाई ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ युद्ध के कारण क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है.
पाकिस्तान ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि हूतियों के लगातार हमले हाल ही में हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को सक्रिय कर सकते हैं. यह सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच आपसी सुरक्षा समझौता है.
पहले भी बातचीत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने शनिवार को भी द्विपक्षीय मुद्दों, क्षेत्रीय घटनाक्रम और स्थिरता बहाल करने के कूटनीतिक प्रयासों को लेकर बातचीत की थी. इस दौरान वॉशिंगटन की आक्रामक कार्रवाइयों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई असुरक्षा का मुद्दा भी उठा था. दोनों पक्षों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और असुरक्षा को देखते हुए सहयोग और कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि संकट को फैलने से रोका जा सके और इलाके में स्थिरता और सुरक्षा वापस लाई जा सके. ईरानी अधिकारी लगातार कहते रहे हैं कि पश्चिम एशिया में स्थायी सुरक्षा बाहर से थोपी नहीं जा सकती. उनका कहना है कि तनाव बढ़ने से रोकने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय देशों को खुद लेनी चाहिए.
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