कोर्ट के बाहर पुलिस, राष्ट्रपति की अचानक वापसी... पोलैंड में आधी रात क्यों मचा बवाल?

न्यायपालिका के नियंत्रण को लेकर पोलैंड में सरकार-विपक्ष के बीच विवाद बढ़ गया है. न्याय मंत्री वाल्डेमार जुरेक ने संवैधानिक अदालत के प्रमुख जज बार्तोमिएज स्विएचकोव्स्की और उपाध्यक्ष की कानूनी सुरक्षा खत्म कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की है. इसके बाद अदालत के बाहर प्रदर्शन हुए और पुलिस तैनात करनी पड़ी.

Advertisement
यह ताजा विवाद पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर लंबे समय से जारी विवाद का हिस्सा है. (Photo-Reuters) यह ताजा विवाद पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर लंबे समय से जारी विवाद का हिस्सा है. (Photo-Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST

पोलैंड में न्यायपालिका के नियंत्रण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है. विवाद इतना बढ़ा कि संवैधानिक अदालत के बाहर पुलिस तैनात करनी पड़ी. प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर सामान फेंके. 

पुलिस ने बताया कि इस दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया गया. इस बीच राष्ट्रपति कारो्ल नावरोत्स्की ने अपना सेनेगल दौरा बीच में छोड़ दिया और वारसॉ लौट आए. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति का देश में रहना जरूरी है. दरअसल, पोलैंड के न्याय मंत्री वाल्डेमार जुरेक ने संवैधानिक अदालत के प्रमुख जज बार्तोमिएज स्विएचकोव्स्की और कोर्ट के उपाध्यक्ष बार्तोमिएज सोचांस्की की कानूनी सुरक्षा खत्म करने की मांग की है. सरकार इन दोनों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करना चाहती है.

Advertisement

जुरेक का आरोप है कि दोनों जजों ने संसद की ओर से चुने गए नए जजों को अदालत की कार्यवाही में शामिल होने से रोका. सरकार का कहना है कि इस वजह से न्यायपालिका में सुधार की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.

शुक्रवार शाम अदालत की वेबसाइट पर स्विएचकोव्स्की के निलंबन से जुड़ी जानकारी प्रकाशित की गई थी. हालांकि, इसके कुछ देर बाद वेबसाइट बंद हो गई. इस कारण निलंबन के आधिकारिक कारणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.

राष्ट्रपति ने बीच में छोड़ा सेनेगल दौरा

पोलैंड के राष्ट्रपति कारो्ल नावरोत्स्की ने इस विवाद के बीच अपना विदेश दौरा छोटा कर दिया. वह सेनेगल की राजधानी डकार में समर यूथ ओलंपिक खेलों में शामिल होने जा रहे थे. लेकिन घटनाक्रम के बाद उन्होंने विमान से ही वापस लौटने का ऐलान कर दिया.

Advertisement

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है. मैं सेनेगल के लिए अपनी उड़ान बीच में रोक रहा हूं. मैं वापस लौट रहा हूं. राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ ने बताया कि वारसॉ पहुंचने के बाद नावरोत्स्की संवैधानिक अदालत में भी गए. राष्ट्रपति को विपक्षी लॉ एंड जस्टिस पार्टी (PiS) का समर्थन हासिल है.

दरअसल, पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर विवाद कई साल से चल रहा है. साल 2015 से 2023 तक सत्ता में रही लॉ एंड जस्टिस पार्टी की सरकार ने न्याय व्यवस्था में कई बदलाव किए थे. इन बदलावों को लेकर पोलैंड के अंदर और यूरोपीय संघ में सवाल उठे थे. आलोचकों का कहना था कि इन बदलावों से सत्ताधारी पार्टी को न्यायिक संस्थाओं पर ज्यादा नियंत्रण मिल गया.

इस टकराव ने पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है. (Photo-Reuters)

यूरोपीय मानवाधिकार अदालत और यूरोपीय संघ की अदालत ने भी संवैधानिक अदालत की नियुक्तियों और उसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठाए थे. अदालतों ने कहा था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए तीन जजों का चुनाव सही तरीके से नहीं हुआ था, क्योंकि उनकी जगह पहले ही पिछली संसद भर चुकी थी.

Advertisement

टस्क सरकार ने न्यायिक व्यवस्था बदलने का किया वादा

डोनाल्ड टस्क 2023 में प्रधानमंत्री बने थे. उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहाल करने और पिछली सरकार के बदलावों को पलटने का वादा किया था. हालांकि, इस काम में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है.

राष्ट्रपति नावरोत्स्की और उनके पूर्ववर्ती आंद्रेज डूडा ने कई प्रस्तावित सुधारों पर वीटो किया है. नावरोत्स्की ने मार्च के बाद संसद की ओर से चुने गए पांच जजों को शपथ दिलाने से भी इनकार किया है. उनका कहना है कि इन जजों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल हैं. इन पांच जजों में से एक अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का को फिलहाल अदालत की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपनी सरकार के कदम का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि कानून का राज बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है. टस्क के मुताबिक, पिछली सरकार के कार्यकाल में न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा था और उसे ठीक करने की प्रक्रिया आसान नहीं है.

वहीं, विपक्षी PiS के नेताओं ने जज स्विएचकोव्स्की के निलंबन की आलोचना की है. पूर्व न्याय मंत्री ज्बिग्निएव जियोब्रो ने इसे संवैधानिक व्यवस्था पर आपराधिक हमला बताया और लोगों से विरोध करने की अपील की.

कानूनी विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल

सरकार के कदमों पर कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं. वकील मार्सिन माटचाक ने कहा कि स्विएचकोव्स्की का निलंबन कानूनी आधार के बिना किया गया है. उन्होंने अदालत के बाहर हथियारबंद पुलिस की तैनाती और न्याय मंत्री के अधिकारों की सरकार की व्याख्या पर भी चिंता जताई.

Advertisement

यूरोप की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े मामलों पर सलाह देने वाली वेनिस कमीशन ने भी इस महीने राष्ट्रपति से संसद की ओर से चुने गए पांच जजों को शपथ दिलाने की अपील की थी.

यह भी पढ़ें: जब जर्मनी और रूस ने पोलैंड को आपस में बांट लिया

पोलैंड में यह विवाद अगले साल होने वाले संसदीय चुनाव से पहले और अहम हो गया है. सरकार के कुछ समर्थक टस्क पर न्यायिक बदलावों को तेजी से लागू नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं, दूसरे पक्ष के लोग सरकार के कदमों के कानूनी आधार पर सवाल उठा रहे हैं. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर देश की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »