बाढ़ संकट में साथ खड़े भारत की नेपाल ने की तारीफ, PM मोदी का जिक्र कर कहा- वो बहुत दरियादिल

ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई भीषण बाढ़ में 675 लोगों की मौत हो चुकी है. 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं. इस बीच नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने प्रधानमंत्री मोदी की उदारता की प्रशंसा की है. उन्होंने भारत की ओर से की संकट के बीच की जा रही मदद की सराहना की है.

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नैपाल वित्त मंत्री ने बाढ़ के बीच भारत की मदद को सराहा है. (File Photo-PTI) नैपाल वित्त मंत्री ने बाढ़ के बीच भारत की मदद को सराहा है. (File Photo-PTI)

aajtak.in

  • काठमांडू,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:25 PM IST

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. इस बीच इस मुश्किल समय में भारत की ओर से मिल रही मदद की नेपाल ने तारीफ की है.  नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत उदार शख्स बताया है. उन्होंने कहा कि संकट के समय भारत ने नेपाल की मदद के लिए तेजी से कदम उठाए हैं. बाढ़ और मलबे की इस आपदा में 675 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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वाग्ले ने कहा कि भारत ने पुनर्निर्माण के लिए भी बड़ी सहायता देने के संकेत दिए हैं. नेपाल को इस समय अपने पड़ोसी देशों से सहयोग मिल रहा है. भारत की मदद इसमें खास तौर पर अहम है.

दरअसल, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों का बड़ा मलबा नीचे की ओर आया. इसके साथ पानी, कीचड़ और मलबे की तेज धारा बह निकली. इस आपदा ने मध्य नेपाल के कई शहरों और गांवों में भारी तबाही मचाई. बाढ़ के पानी और मलबे में कई घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए. कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है. आपदा के बाद कई इलाकों का संपर्क दूसरे हिस्सों से कट गया है.

नेपाल में 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. प्रभावित क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश हो रही है. इससे राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं.

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भारत ने भेजी 57.6 टन राहत सामग्री

भारत ने बुधवार से नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में 57.6 टन राहत सामग्री भेजी है. इसके अलावा भारत की 11 सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंची है. इसमें मेडिकल कर्मी और सुरंगों में बचाव अभियान के विशेषज्ञ शामिल हैं. नेपाल की अपील के बाद यह टीम वहां पहुंची है. टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर राहत और बचाव अभियान में मदद कर रही है.

नेपाल के वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस संकट से चरणबद्ध तरीके से निपट रही है. फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान लोगों की जान बचाने पर है. जो लोग बाढ़ में फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है. जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों को भी निकालने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

नेपाल सेना ने अब तक 1,930 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला है. सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण धुंचे, रसुवा और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल है. इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के जरिए सामान पहुंचाया जा रहा है.

11 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे

नेपाल में खोज और बचाव अभियान के लिए 11 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. इनमें नेपाल सेना के 5 हजार से ज्यादा जवान शामिल हैं. टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रही हैं. वाग्ले ने बताया कि बचाव अभियान के बाद शुरुआती राहत और पुनर्वास पर ध्यान दिया जाएगा. इसके तहत अस्थायी घर बनाए जाएंगे. लोगों को काम के बदले पैसे देने की योजनाएं भी शुरू की जाएंगी. इसके बाद बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण का काम होगा.

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वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने 2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद को भी याद किया. उन्होंने कहा कि उस समय भारत सरकार ने नेपाल की काफी सहायता की थी. मौजूदा संकट में भी भारत हमारा अहम साथी बना.

वाग्ले ने कहा कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुश्किल समय में बेहद उदारता दिखाई है. उन्होंने बताया कि नई दिल्ली से विशेष राहत सामग्री भी भेजी गई है. भारत ने पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता देने का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि नेपाल को अपने सभी पड़ोसी देशों से सहयोग मिल रहा है. इस संकट से निकलने के लिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद की जरूरत होगी.

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