नेपाल में आई भीषण तबाही के एक हफ्ते बाद भी कई इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है. सड़कें बह चुकी हैं. भारी पुल टूट चुके हैं. कई गांवों तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे मुश्किल वक्त में नेपाल के आम लोग, स्थानीय प्रशासन और अलग-अलग संगठनों के स्वयंसेवक मिलकर ऐसा काम कर रहे हैं, जिससे मुश्किल हालात में लोगों में उम्मीद जगी है.
त्रिशूली नदी के ऊपर जहां कभी भारी पुल लोगों की आवाजाही का जरिया थे, वहां अब लोगों की मदद के लिए रस्सियों और केबल से हल्के पुल तैयार किए गए हैं. इन्हीं के सहारे उन इलाकों से लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ है, जो पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह कटे हुए थे.
रस्सी के पुल से शुरू हुआ रेस्क्यू
त्रिशूली नदी का तेज बहाव बेहद खतरनाक है. इसके बावजूद स्थानीय लोगों और राहत टीमों ने सुरक्षा इंतजामों के साथ रोपवे जैसे अस्थायी रास्ते तैयार किए हैं. इनका इस्तेमाल अब बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित इलाकों तक पहुंचाने में किया जा रहा है. इन पुलों के जरिए लोगों को बाहर निकालने के साथ ही प्रभावित परिवारों तक खाना, जरूरी दवाएं और दूसरे राहत के सामान भी पहुंचाए जा रहे हैं.
एक हफ्ते बाद लौट रही उम्मीद
ठीक एक हफ्ते पहले आई बाढ़ और तबाही ने गांव के गांव उजाड़ दिए थे. सड़कें और पुल बह जाने से राहत और बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो गया था. लेकिन स्थानीय लोगों की हिम्मत ने इस चुनौती को कुछ हद तक आसान बनाया है. ग्राउंड जीरो से सामने आ रही तस्वीरें दिखाती हैं कि आपदा के बीच नेपाल के लोग खुद राहत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं.
त्रिशूली के ऊपर बना ये अस्थायी रास्ता लोगों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचा रहा, साथ ही ये पुल लंबे इंतजार के बाद लोगों को अपने घर, परिवार और अपने प्रियजनों तक लौटने की उम्मीद भी दे रहा है.
आशुतोष मिश्रा