नेपाल में तबाही के बीच जगी उम्मीद... त्रिशूली नदी पर रस्सी के सहारे शुरू हुआ रेस्क्यू, पहुंच रही राहत सामग्री

नेपाल में तबाही के बीच अब लोगों ने खुद राहत की कमान संभाली है. त्रिशूली नदी पर रस्सी के पुल बनाकर फंसे लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा, जिससे कई लोग एक हफ्ते बाद अपने परिवारों से मिले.

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त्रिशूली नदी पर केबल और रस्सी के पुल बनाकर लोग राहत कार्य में जुटे हुए हैं. (Photo-ITG) त्रिशूली नदी पर केबल और रस्सी के पुल बनाकर लोग राहत कार्य में जुटे हुए हैं. (Photo-ITG)

आशुतोष मिश्रा

  • काठमांडू,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

नेपाल में आई भीषण तबाही के एक हफ्ते बाद भी कई इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है. सड़कें बह चुकी हैं. भारी पुल टूट चुके हैं. कई गांवों तक पहुंचना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे मुश्किल वक्त में नेपाल के आम लोग, स्थानीय प्रशासन और अलग-अलग संगठनों के स्वयंसेवक मिलकर ऐसा काम कर रहे हैं, जिससे मुश्किल हालात में लोगों में उम्मीद जगी है.

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त्रिशूली नदी के ऊपर जहां कभी भारी पुल लोगों की आवाजाही का जरिया थे, वहां अब लोगों की मदद के लिए रस्सियों और केबल से हल्के पुल तैयार किए गए हैं. इन्हीं के सहारे उन इलाकों से लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ है, जो पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह कटे हुए थे.

रस्सी के पुल से शुरू हुआ रेस्क्यू

त्रिशूली नदी का तेज बहाव बेहद खतरनाक है. इसके बावजूद स्थानीय लोगों और राहत टीमों ने सुरक्षा इंतजामों के साथ रोपवे जैसे अस्थायी रास्ते तैयार किए हैं. इनका इस्तेमाल अब बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित इलाकों तक पहुंचाने में किया जा रहा है. इन पुलों के जरिए लोगों को बाहर निकालने के साथ ही प्रभावित परिवारों तक खाना, जरूरी दवाएं और दूसरे राहत के सामान भी पहुंचाए जा रहे हैं.

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जिन रास्तों पर गाड़ियां और सामान्य राहत दल नहीं पहुंच पा रहे, वहां ये अस्थायी पुल जीवन की अहम कड़ी बन गए हैं. तबाही के बाद कई परिवार अपने घर नहीं लौट पाए हैं.  कुछ लोग एक तरफ फंसे हैं तो उनके अपने नदी के दूसरी ओर हैं.  कई परिवारों को एक-दूसरे की खबर तक नहीं मिल पाई. अब राहत अभियान के साथ बिछड़े लोगों को तलाशने और परिवारों को फिर से मिलाने की कोशिश भी तेज हो रही है.
 

एक हफ्ते बाद लौट रही उम्मीद

ठीक एक हफ्ते पहले आई बाढ़ और तबाही ने गांव के गांव उजाड़ दिए थे.  सड़कें और पुल बह जाने से राहत और बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो गया था. लेकिन स्थानीय लोगों की हिम्मत ने इस चुनौती को कुछ हद तक आसान बनाया है. ग्राउंड जीरो से सामने आ रही तस्वीरें दिखाती हैं कि आपदा के बीच नेपाल के लोग खुद राहत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं.

त्रिशूली के ऊपर बना ये अस्थायी रास्ता लोगों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचा रहा, साथ ही ये पुल लंबे इंतजार के बाद लोगों को अपने घर, परिवार और अपने प्रियजनों तक लौटने की उम्मीद भी दे रहा है.

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