मिडिल ईस्ट जंग 'तेल युद्ध' में बदली... ईरानी गैस फील्ड पर हमले के जवाब में क़तर और UAE पर काउंटर अटैक

ईरान-इज़रायल युद्ध अब ऑयल वॉर बन गया है. ऊर्जा ठिकानों पर हमले, होर्मुज़ स्ट्रेट बाधित, तेल क़ीमतों में उछाल से ग्लोबल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है.

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इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड को निशाना बनाया. (File Photo: AP) इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड को निशाना बनाया. (File Photo: AP)

मोहम्मद साक़िब मज़ीद

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:28 AM IST

ईरान पर यूएस-इज़रायल के हमले के बाद बीसवें दिन भी मिडिल ईस्ट में भयानक जंग जारी है. ईरान की टॉप लीडरशिप बड़ा नुक़सान हुआ है लेकिन तेहरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इज़रायल की तरफ़ लगातार मिसाइलें दाग रहा है. इधर से इज़रायल की तरफ़ से भी एयर स्ट्राइक जारी है.

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि बीते 24 घंटों में यह सीधे-सीधे ‘ऑयल वॉर’ में बदल गया है. क्योंकि इस जंग में एनर्जी ठिकानों पर सीधे हमले हो रहे हैं, जिसका असर दुनिया के कई अन्य इलाकों में भी पड़ा है.

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ऑयल की ग्लोबल सप्लाई भी बाधित हुई है और तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है.

तेहरान में स्थित एक तेल भंडारण केंद्र पर इजरायल ने 7 मार्च को भी अटैक किया था. (Photo: AP)

कैसे शुरू हो गया 'ऑयल वॉर'?

मिडिल ईस्ट जंग में बड़े बदलाव की शुरुआत तब हुई, जब इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमला किया. खाड़ी के नीचे मौजूद यह गैस फ़ील्ड दुनिया का सबसे बड़ा गैस फ़ील्ड है. यह ईरान और क़तर के बीच बंटा हुआ है. ईरान की तरफ़ इसे 'साउथ पार्स' और क़तर की तरफ़ इसे 'नॉर्थ फ़ील्ड' कहा जाता है.

ईरान के सरकारी मीडिया ने बुधवार को बताया कि इज़रायल ने ईरान के 'साउथ पार्स' प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमला किया है, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस संसाधनों का हिस्सा है और देश की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा ज़रिया. 

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ईरान की धमकी...

सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, बुधवार को ईरान के खाड़ी तट पर 'असालुयेह' के पास स्थित इस गैस क्षेत्र से जुड़ी सुविधाओं में आग लग गई थी. इसके जवाब में ईरान ने क़सम खाई कि वह खाड़ी इलाक़े के अन्य देशों में स्थित ऊर्जा सुविधाओं पर जवाबी हमला करेगा. 

ईरान जंग ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और लिक्विफ़ाइड प्राकृतिक गैस (LNG) के ज़्यादातर निर्यात को रोक कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा के क्षेत्र में एक ज़बरदस्त झटका दिया है. ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों में स्थित प्रमुख निर्यात सुविधाओं पर भी हमले किए हैं, जिससे ऊर्जा की क़ीमतों पर और ज़्यादा दबाव बढ़ा है. यह सब तब हो रहा है, जब खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देश (सऊदी अरब, क़तर, ओमान, इराक़ और संयुक्त अरब अमीरात) ईरान पर हो रहे अमेरिका-इज़रायल के हमलों में शामिल नहीं हैं.

क़तर में ईरानी हमले ने मचाई हलचल 

सऊदी अरब, UAE और क़तर को चेतावनी देने के कुछ घंटों पर तेहरान ने अटैक किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ईरान के हमले से क़तर की एक बड़ी गैस सुविधा में आग लग गई और उसे ढांचागत नुकसान पहुंचा. इससे यह डर और बढ़ गया है कि यह युद्ध अब सिर्फ़ सैन्य ठिकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब यह दुनिया के सबसे ज़रूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी सीधा ख़तरा बन गया है. 

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'QatarEnergy' ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, "एक मिसाइल ने उसकी विशाल 'रास लफ़ान' द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) सुविधा पर हमला किया, जिससे आग लग गई और उसे बुझाने से पहले काफी नुक़सान हुआ. ईरानी हमलों के कारण कंपनी पहले ही वहां प्रोडक्शन रोक चुकी थी.

क़तर की सबसे अहम गैस सुविधाओं में से एक, रास लफ़ान कॉम्प्लेक्स पर हुए मिसाइल हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया के एनर्जी बाज़ारों में हलचल मचा दी है. यह हमला ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच चल रहे युद्ध में एक ख़तरनाक मोड़ है. 

सऊदी तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अटैक

ईरान ने सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत पर भी हमला किया, जहां उसके कई तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थित हैं. इसके साथ ही कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात पर भी हमला किया गया.

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने गुरुवार को ईरान की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, "पहले जो थोड़ा-बहुत भरोसा था, वह पूरी तरह से टूट गया है." प्रिंस फैसल बिन फरहान ने यह बात खाड़ी अरब देशों और अन्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक के बाद कही. यह बैठक ईरान के उन हमलों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी, जिनसे पूरे मिडिल-ईस्ट में तनाव फैल रहा है.

प्रिंस फैसल ने कहा, "मेरे देश और मेरे उन पड़ोसी देशों पर हुए हमले, जो इस संघर्ष में शामिल नहीं हैं, बस मेरी दिलचस्पी इन्हीं बातों में है. हम इन हमलों को रोकने के लिए अपने पास मौजूद हर तरीक़े का इस्तेमाल करेंगे, चाहे वह सियासी हो, आर्थिक हो, कूटनीतिक हो या कोई और तरीके हों.

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उन्होंने कहा, "ईरान अपने पड़ोसियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी यह कोशिश कामयाब नहीं होगी."

तेल की क़ीमतों में लगी 'आग'

इजरायल के हमले के बाद ईरान ने जवाब देने की धमकी दी. इस खबर के बाद तेल की कीमतों में उछाल आ गया. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर में 6% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और कीमतें उच्चतम स्तर पर पहुंचकर 110 डॉलर प्रति बैरल के क़रीब पहुंच गईं.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेल की क़ीमतें एक बार फिर 5 फ़ीसदी बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. इसके चलते पेट्रोल और अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ गईं. तेल के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक क़रीब 50 फ़ीसदी बढ़ चुकी हैं.

और ज्य़ादा 'तंग' हुआ होर्मुज़ स्ट्रेट!

जब से युद्ध शुरू हुआ है ईरान, तुर्की, भारत और अन्य जगहों से बहुत कम संख्या में जहाज़ 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' से गुज़र पाए हैं, जो फ़ारसी खाड़ी को खुले समंदर से जोड़ता है. ईरान का ज़ोर देकर कहना है कि यह जलमार्ग खुला है, बस अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए नहीं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर बढ़ती नाराज़गी ज़ाहिर की है कि किसी भी सहयोगी देश ने जलडमरूमध्य को खोलने में मदद की पेशकश नहीं की है. 

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पूरे मिडिल ईस्ट में गैस और तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी हैं. इसके साथ ही, तेल सप्लाई की सबसे बड़ी चेन होर्मुज़ को ईरान ने पहले अमेरिका-इज़रायल और इसके सहयोगियों के लिए बंद कर रखा है. इस बीच तेल की क़ीमतों में भारी उछाल भी हुआ है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि मिडिल ईस्ट की जंग अब 'ऑयल वॉर' में तब्दील हो चुकी है, जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है.

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