'यदि कोई देश ईरान को प्रतिबंधों से बचाने में...', मोदी-पेजेश्कियान मीटिंग पर रुबियो का बड़ा बयान

मार्को रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी व्यवस्था बनाने में ईरान की मदद ना करे, जिसके जरिए ईरान पैसा कमा सके. फिर उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने या परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में करे.

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ईरान पर फिर सख्त हुए मार्को रुबियो. (Photo: Reuters) ईरान पर फिर सख्त हुए मार्को रुबियो. (Photo: Reuters)

रोहित शर्मा

  • वॉशिंगटन,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:36 AM IST

ईरान के साथ अमेरिका की तनातनी बरकरार है. दोनों देश एक दूसरे पर वार और पलटवार से नहीं चूक रहे हैं. इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन देशों को चेताया है जो ईरान के साथ कारोबार कर रहे हैं या कारोबार करने की योजना बना रहे हैं.

रुबियो ने साफ लफ्जों में कहा है कि भले ही वो देश कोई भी हो, यदि वह ईरान के साथ ट्रेड जारी रखता है तो उसके खिलाफ ट्रंप प्रशासन प्रतिबंध लगाने से नहीं हिचकिचाएगा.

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दरअसल, मार्को रुबियो से किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO मीटिंग से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया था. सवाल यह था- पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान और ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की. ऐसा लग रहा था कि वे किसी तरह का व्यापार समझौता करने की तैयारी कर रहे हैं. पाकिस्तान ने भी दो सप्ताह पहले ऐसा किया था. उन देशों के लिए आपका क्या संदेश है?

इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है. जाहिर है, हर देश अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाता है. दुनिया के कई देश ईरानी शासन के साथ बातचीत करते हैं. यहां तक कि हमने भी ईरानी शासन के कुछ लोगों से बैठक की है और उनके साथ संपर्क हुआ है'.

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उन्होंने कहा, 'लेकिन आखिर में बात स्पष्ट है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बिल्कुल साफ कर दिया है. किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने में मदद नहीं करनी चाहिए. कोई भी देश ऐसी व्यवस्था बनाने में ईरान की मदद ना करे, जिसके जरिए ईरान पैसा कमा सके. फिर उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को समर्थन देने या परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में करे. अगर कोई देश ऐसा करने का फैसला करता है, तो हमें उस देश पर भी प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे'.

दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई?
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए.

वहीं पेजेश्कियान ने हालिया युद्ध के दौरान भारत के समर्थन और सहयोग की सराहना की और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए नई दिल्ली से अपनी कूटनीतिक क्षमताओं का इस्तेमाल करने की अपील की.

ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पेजेश्कियान ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की है. उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करने के बजाय उसने युद्ध और असुरक्षा का रास्ता चुना.

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ये बोले पीएम मोदी
भारत की ओर से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष और बदलती परिस्थितियों पर विचार साझा किए.

पीएम मोदी ने क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत लगातार इस बात का समर्थन करता रहा है कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

उन्होंने समुद्री आवागमन और व्यापार की स्वतंत्रता की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इसमें जहाज और उन पर काम करने वाले नाविक भी शामिल हैं.

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