'ईरान में बस होने वाला तख्तापलट', चुनाव के बीच नेतन्याहू के गजब के दावे

दक्षिणी सीरिया के दौरे के दौरान इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार गिरने के बेहद करीब है. उन्होंने बताया कि इजरायल इस लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच चुका है और ईरान से जुड़े पूरे नेटवर्क का पतन होगा. आतंकी शासन को गिराना इजरायल का मुख्य लक्ष्य है.

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इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ईरान में जल्द तख्तापलट का दावा किया है. (File Photo-Reuters) इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ईरान में जल्द तख्तापलट का दावा किया है. (File Photo-Reuters)

aajtak.in

  • यरूशलम,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार गिरने के बेहद करीब है. ईरान के मौजूदा शासन को खत्म करने के लिए अभी कुछ काम बाकी है. लेकिन इजरायल इस लक्ष्य के बहुत करीब पहुंच चुका है.

नेतन्याहू ने यह दावा बुधवार को दक्षिणी सीरिया के दौरे के दौरान किया. वह इजरायली सैनिकों से मिलने पहुंचे थे. उनके साथ रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज भी मौजूद थे. माउंट हर्मोन के सीरियाई हिस्से में सैनिकों से बात करते हुए नेतन्याहू ने ईरान के साथ चल रही जंग का जिक्र किया.

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'आतंकी शासन को गिराना मुख्य लक्ष्य'

नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के शासन को गिराना इजरायल का मेन टारगेट है. यह लक्ष्य अब दूर नहीं है. ईरान से जुड़े पूरे नेटवर्क का भी आगे चलकर पतन होगा. दरअसल, इजरायल और ईरान के बीच करीब छह महीने से संघर्ष जारी है. इस दौरान दोनों देशों के बीच लगातार हमले हुए हैं. हाल के दिनों में लड़ाई और तेज हुई है. ऐसे में नेतन्याहू का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है.

हालांकि, ईरान की सरकार को लेकर नेतन्याहू का यह दावा उनकी ओर से किया गया आकलन है. उन्होंने यह नहीं बताया कि ईरान की सरकार गिरने की स्थिति किस तरह बन सकती है या इसके लिए कितने समय की जरूरत होगी.

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नेतन्याहू ने जिस इलाके का दौरा किया, वहां इजरायली सेना की मौजूदगी भी विवाद का मुद्दा है. दिसंबर 2024 में लंबे समय तक सीरिया पर शासन करने वाले बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद इजरायल ने दक्षिणी सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई.

इजरायली सेना इस इलाके में एक 'सिक्योरिटी जोन' में तैनात है. यह इलाका पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले बफर जोन का हिस्सा था. 1974 से इस बफर जोन ने इजरायल और सीरिया की सेनाओं को अलग रखने में मदद की थी.

इजरायल का कहना है कि वह अपनी सीमा के पास किसी भी आतंकी संगठन या सशस्त्र समूह को पैर नहीं जमाने देगा. नेतन्याहू ने बुधवार को एक बार फिर  यही बात दोहराई. उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी सीमा पर किसी आतंकी सेना को स्थापित नहीं होने देगा.

सीरिया ने इजरायल की कार्रवाई का किया विरोध

दक्षिणी सीरिया में इजरायल की सैन्य मौजूदगी को लेकर सीरिया लगातार विरोध करता रहा है. रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज करीब दो हफ्ते पहले भी इस इलाके में मौजूद इजरायली सैनिकों से मिलने गए थे. उनकी यात्रा पर दमिश्क ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

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सीरिया ने इजरायल की कार्रवाई को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन बताया था. इसके बावजूद इजरायल ने इलाके से अपनी सेना हटाने के संकेत नहीं दिए हैं.

बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद इजरायल सीरिया में सैकड़ों हवाई हमले कर चुका है. इजरायली सेना कई बार सीरियाई इलाके में भी दाखिल हुई है. इजरायली अधिकारी लगातार कहते रहे हैं कि सुरक्षा क्षेत्र में सेना की मौजूदगी जारी रहेगी. इजरायल इस इलाके में और बड़ा डिमिलिट्राइज्ड जोन बनाने की मांग भी कर रहा है.
 

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