ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों को उम्मीद थी कि वे महज 48 घंटे में ईरान पर कब्जा कर लेंगे. पेजेशकियान ने इसकी तुलना सीरिया में हुए घटनाक्रम से करते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि ईरान के साथ भी वैसा ही होगा. हालांकि, उनके मुताबिक तमाम मुश्किलों और दबाव के बावजूद ईरान आज एक ताकतवर देश के तौर पर खड़ा है और दुनिया में उसे गरिमा और सम्मान के साथ देखा जाता है.
राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा, "उन्हें लगा था कि वे 48 घंटे में ईरान पर कब्जा कर लेंगे, जैसे उन्होंने सीरिया में किया." उन्होंने कहा कि हालात आसान नहीं थे और ईरान को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन देश इन दबावों के बावजूद मजबूती से खड़ा रहा.
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अमेरिका से बातचीत पर ईरान ने क्या कहा?
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिका के साथ संपर्क को लेकर भी स्थिति साफ की. उनके मुताबिक, ताजा हमलों के बाद अमेरिका की तरफ से बातचीत का संदेश आया था. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है.
गरीबाबादी ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी संभावित समझौते में विदेशी या बाहरी भूमिका की बात भी खारिज की. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर संभावित समझौते की चर्चा चल रही है. अमेरिका की तरफ से स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि ईरान किसी बाहरी दखल को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है.
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मोजतबा खामेनेई से संपर्क मुश्किल
राष्ट्रपति पेजेशकियान ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस वक्त उनसे संपर्क करना काफी मुश्किल है. हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि खामेनेई की मौजूदगी ईरान के लिए एक बड़ी ताकत है और देश को आगे बढ़ने में इससे मजबूती मिलती है.
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