ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है. तेहरान ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका की ओर से जमीनी कार्रवाई या ईरानी क्षेत्र में घुसने की कोशिश की जाती है तो उसका जवाब सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के राजनीतिक ब्यूरो प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यदोल्लाह जावानी ने कहा कि अब तक ईरान की कोशिशें रक्षात्मक रही हैं, लेकिन आगे ये आक्रामक रूप ले सकती हैं. उन्होंने विरोधियों को ‘रणनीतिक सरप्राइज’ के लिए तैयार रहने को कहा.
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते का समय खत्म हो रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा था कि अमेरिका जल्द होर्मुज को अपना क्षेत्र घोषित कर सकता है. व्हाइट हाउस ने बाद में उनके बयान को मजाक बताया, लेकिन ईरान ने इसे गंभीरता से लिया.
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ईरान ने दी ‘रणनीतिक सरप्राइज’ की चेतावनी
IRGC अधिकारी जावानी ने यह साफ नहीं किया कि ईरान की संभावित आक्रामक कार्रवाई किस तरह की होगी. हालांकि, IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर अमेरिका ईरान के नागरिक ढांचे को निशाना बनाता है तो अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के ऊर्जा नेटवर्क, बिजली संयंत्र और इंटरनेट से जुड़े ढांचे भी निशाने पर आ सकते हैं.
ईरान के कट्टरपंथी नेताओं और मीडिया में अमेरिका के खिलाफ जमीनी कार्रवाई की संभावना पर भी चर्चा हो रही है. इसमें बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी हितों को निशाना बनाने जैसे विकल्पों का जिक्र किया गया है. हालांकि, विश्लेषकों ने इसकी व्यवहारिकता और संभावित जोखिमों पर सवाल उठाए हैं और अमेरिका की ओर से ईरान में जमीनी अभियान की कोई हालिया पुष्टि नहीं है.
होर्मुज को लेकर भी बढ़ा टकराव
ईरान ने होर्मुज के आसपास अपनी सुरक्षा और तेज प्रतिक्रिया देने वाली यूनिट्स को मजबूत किया है. ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अगर अमेरिकी सैनिक किसी ईरानी द्वीप पर उतरने की कोशिश करते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा. खार्ग द्वीप जैसे अहम तेल निर्यात केंद्रों की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है.
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इस बीच ईरान ने यह भी कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिकी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा. ओमान के साथ समुद्री रास्ते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन कानूनी और तकनीकी पेचीदगियों के चलते अभी कोई अंतिम व्यवस्था नहीं बन सकी है.
यानी फिलहाल ईरान सीधे अमेरिका पर जमीनी हमला करने जा रहा है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन तेहरान के ताजा बयानों से इतना जरूर साफ है कि वह अब अमेरिका की संभावित कार्रवाई का जवाब देने के लिए रक्षात्मक के साथ-साथ आक्रामक विकल्प भी खुले रखना चाहता है.
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