स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद ‘बाब अल-मंडेब’ होगा बंद! हूतियों ने दी धमकी, यूरोप तक बढ़ेगा तेल-गैस संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद अब यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को ब्लॉक करने की धमकी दी है. अगर ऐसा होता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल की आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है.

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बाब अल-मंदेब बंद होने से बड़ा संकट पैदा हो सकता है. (Photo: Google Maps/AP) बाब अल-मंदेब बंद होने से बड़ा संकट पैदा हो सकता है. (Photo: Google Maps/AP)

सुशीम मुकुल

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:15 AM IST

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लगी है. खाड़ी क्षेत्र में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पहले से ही बंद होने की खबरों के बीच, अब यमन के हूती विद्रोहियों ने 'बाब अल-मंडेब' स्ट्रेट को ब्लॉक करने की धमकी दी है.

युद्ध के तीसरे हफ्ते में एंट्री लेते ही यमन स्थित हूती विद्रोहियों ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. ईरान के समर्थित इस लड़ाकू समूह ने कहा है कि वो किसी भी पल जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं. 

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हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने बताया कि उनके बल 'ट्रिगर पर उंगली' रखे हुए हैं और संघर्ष बढ़ने की स्थिति में वो हस्तक्षेप करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि ये ईरान की 'तीन चरणों वाली रणनीति' का हिस्सा है.

क्या हैं तीन चरण?

पहला चरण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करना है, जो पहले ही किया जा चुका है. दूसरा चरण लेबनान और गाजा के मोर्चों से इजरायल को उलझाना है और तीसरा चरण हूतियों के जरिए बाब अल-मंडेब को बंद करना है.

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क्यों अहम है बाब अल-मंडेब?

बाब अल-मंडेब का मतलब 'आंसुओं का द्वार' है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. ये यमन को जिबूती और इरिट्रिया (अफ्रीका के हॉर्न) से अलग करता है. ये लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है. स्वेज नहर के माध्यम से एशिया और यूरोप के बीच होने वाले व्यापार के लिए हर जहाज को इसी 29 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरना पड़ता है.

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बाब अल-मंडेब बंद होने का नुकसान

अगर ये रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से घूमकर जाना होगा. इससे यात्रा में 10 से 15 दिन की देरी होगी और ईंधन का भारी खर्च बढ़ेगा. अगर होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों एक साथ बंद हो जाते हैं, तो ये ग्लोबल ट्रेड के लिए किसी बड़ी आपदा से कम नहीं होगा.

बाब अल-मंडेब से गुजरता है दुनिया का 30% समुद्री तेल

इन दोनों रास्तों से दुनिया का लगभग 30% समुद्री तेल गुजरता है. अकेले बाब अल-मंडेब से प्रतिदिन 8.8 मिलियन बैरल तेल निकलता है. कच्चे तेल की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं, जो पहले से ही 100 डॉलर के करीब हैं. एशिया से यूरोप जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अनाज की सप्लाई रुक जाएगी.

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आसमान छूएंगी तेल की कीमतें

लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ मारियो नवल कहते हैं, 'युद्ध अब और भी व्यापक और बदसूरत होने वाला है.'  उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, 'अगर हूती ईरान के साथ पूर्ण सैन्य गठबंधन कर लेते हैं और एक और अहम जलमार्ग (बाब अल-मंडाब) को बंद कर देते हैं, तो लाल सागर पूरी तरह से प्रतिबंधित क्षेत्र बन जाएगा, तेल की कीमतें फिर से आसमान छू लेंगी और वैश्विक व्यापार और भी बुरी तरह से प्रभावित होगा.'

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दुनिया की दिग्गज शिपिंग कंपनी मर्सक ने सुरक्षा कारणों से लाल सागर से गुजरने वाली अपनी उड़ानों और जहाजों को अस्थायी रूप से रोक दिया है. कंपनी का कहना है कि सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के कारण बाब अल-मंडेब से गुजरना फिलहाल सुरक्षित नहीं है.

क्यों अहम है हूतियों की धमकी?

विशेषज्ञ मोहम्मद एल-दोह के मुताबिक, हूतियों के पास इस क्षेत्र में बड़ा फायदा है. उनके ड्रोन और मिसाइलें सस्ती हैं, जबकि उन्हें रोकने के लिए पश्चिमी देशों को करोड़ों डॉलर की रक्षा प्रणालियां लगानी पड़ती हैं. हूती पहले भी 100 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले कर चुके हैं, इसलिए उनकी धमकी को हलके में नहीं लिया जा सकता.

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इजरायल का नया दांव

इस तनाव के बीच इजरायल ने भी अपनी रणनीति बदली है. इजरायल ने सोमालीलैंड (सोमालिया का एक अलग क्षेत्र) को मान्यता दी है और वहां एक सैन्य बेस बनाने की योजना बना रहा है. इसका मकसद हूतियों पर सीधी नजर रखना और लाल सागर में अपनी स्थिति मजबूत करना है. इससे युद्ध का भौगोलिक दायरा अब अफ्रीका तक फैलने की आशंका है.

इतिहास के सबसे बड़े समुद्री संकट की आशंका

ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (हमास, हिजबुल्ला और हूती) अब एक साथ सक्रिय होते दिख रहे हैं. अगर बाब अल-मंडेब को ब्लॉक किया गया, तो दुनिया आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े समुद्री संकट का सामना कर सकती है.

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