जर्मन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने अपने प्लांट के लिए अचानक से भेड़ों को काम पर लगा दिया है. जर्मन ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन ने पोलैंड के पोजनान में स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के नीचे की घास को मेंटेन रखने के लिए 100 भेड़ों के झुंड को तैनात किया है.
फॉक्सवैगन के 18.3 मेगावाट के सोलर एनर्जी प्लांट में स्थापित 31,000 से ज्यादा पैनलों के नीचे भेड़ें चरती हैं. यह प्लांट कारखाने की सालाना बिजली जरूरतों का लगभग 25% पूरा करता है और धूप वाले दिनों में प्लांट की पूरी बिजली मांग को पूरा कर सकता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) के अनुसार, प्लांट पर भेड़ों को काम पर लगाने के इस कदम से न केवल मशीनों से घास काटने से जुड़ी लागत में कमी आती है, बल्कि रखरखाव लागत भी कम होती है और जैव विविधता को भी संरक्षण मिलता है.
फॉक्सवैगन पोजनान की डायरेक्टर मारजेना पिलिच ग्रोन्स्का ने कहा कि फोटोवोल्टाइक फार्म सिर्फ ग्रीन इलेक्ट्रिकसिटी नहीं देता है, बल्कि यह जैव विविधता, स्थानीय एग्री और वैज्ञानिक रिसर्च को भी बढ़ावा देता है. उन्होंने आगे कहा कि भेड़ चराने का प्रोजेक्ट्स यह दिखाता है कि आधुनिक उद्योग नेचर के साथ सामंजस्य बनाकर काम कर सकता है.
घास काटने से कहीं ज्यादा
इस पहल को सिर्फ घास काटने की लागत से ही जोड़कर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा है. फॉक्सवैगन, पोजनान यूनिवर्सिटी ऑफ लाइफ साइंसेज के साथ मिलकर इस बात का अध्ययन कर रहा है कि पशुधन और नवीकरणीय ऊर्जा इंफ्रा प्रभावी ढंग से एक साथ कैसे रह सकते हैं? रिसर्चर पशु कल्याण, मिट्टी की क्वालिटी, जैव विविधता, वनस्पति और स्थल के सूक्ष्म जलवायु पर भेड़ चराने के प्रभाव की भी स्टडी कर रहे हैं. वैज्ञानिक यह भी वैल्यूवेशन कर रहे हैं कि क्या सौलर पैनलों द्वारा प्रदान की गई छाया पशुओं के लिए गर्मी के तनाव को कम करने में सहायक होंगी.
भेड़ें अपने नए वर्कप्लेस में ढल चुकी हैं
भेड़ों के झुंड की मालकिन जस्टिना नोवाक-गजेक के अनुसार, भेड़ें अपने असामान्य परिवेश में जल्दी से ढल गई हैं. उन्होंने कहा कि हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि झुंड सुरक्षित महसूस कर रहा है. भेड़ें स्वाभाविक रूप से छोटे-छोटे समूहों में बंट जाती हैं और सोलर फार्मा के अलग-अलग हिस्सों में शांति से चरती हैं. यह इस बात का सबसे अच्छा प्रमाण है कि वे इन परिस्थितियों में अच्छी तरह से ढल गई हैं.