300 अरब डॉलर का टैक्स, लाखों रोजगार... सिर्फ 1.5% भारतीय-अमेरिकी कैसे बढ़ा रहे US की अर्थव्यवस्था? जानें

एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की आबादी में भारतीय-अमेरिकी डेढ़ फीसदी हैं, लेकिन वहां के कारोबार, विज्ञान, राजनीति समेत तमाम क्षेत्रों में इनकी अहम भूमिका है. बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ भारतीय अमेरिकी हैं.

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अमेरिका की आबादी में महज डेढ़ भारतीय-अमेरिकी हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर) अमेरिका की आबादी में महज डेढ़ भारतीय-अमेरिकी हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2024,
  • अपडेटेड 9:41 AM IST

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या अब 50 लाख से भी ज्यादा हो गई है. अमेरिका में सबसे प्रभावशाली अप्रवासी समुदाय भारतवंशियों का ही है. भारतीय-अमेरिकियों से जुड़े एक गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा का कहना है कि अमेरिका की आबादी में 1.5% होने के बावजूद भारतवंशियों का यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ा योगदान है.

इंडियास्पोरा ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया है कि कैसे भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाई है.

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भारतीय-अमेरिकी और अर्थव्यवस्था

रिपोर्ट में बताया गया है कि फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से 16 के सीईओ भारतीय मूल के हैं, जिनमें सुंदर पिचाई (गूगल) और रेशमा केवलरमानी (वर्टेक्स फार्मास्यूटिकल्स) शामिल हैं. जिन 16 कंपनियों के सीईओ भारतवंशी हैं, उनसे 27 लाख अमेरिकियों को नौकरियां मिलती हैं. ये कंपनियां हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर का रेवेन्यू जनरेट करती हैं.

इतना ही नहीं, अमेरिका के स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी भारतीय-अमेरिकियों का बड़ा योगदान है. अमेरिका के 648 यूनिकॉर्न स्टार्टअप में से 72 के को-फाउंडर भारतीय-अमेरिकी हैं. यूनिकॉर्न स्टार्टअप उन्हें कहा जाता है, जिनकी मार्केट वैल्यू 1 अरब डॉलर से ज्यादा होती है. भारतीय-अमेरिकियों के स्टार्टअप की कुल वैल्यू 195 अरब डॉलर है और इनसे 55 हजार लोगों को रोजगार मिलता है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के 60% होटलों के मालिक भी भारतीय-अमेरिकी हैं. इसके अलावा भारतीय-अमेरिकियों के कारोबार से अप्रत्यक्ष रूप से 1.1 करोड़ से 1.2 करोड़ अमेरिकियों को रोजगार मिलता है.

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अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी हर साल 250 से 300 अरब डॉलर का टैक्स भरते हैं, जो कुल टैक्स में 5-6% होता है. 

विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी

रिपोर्ट के मुताबिक, 1975 और 2019 के बीच अमेरिका में भारतीय मूल के इनोवेटर्स के पास पेटेंट की हिस्सेदारी से 2% से बढ़कर 10% हो गई. 2023 में भारतीय मूल के सभी वैज्ञानिकों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से 11% की ग्रांट मिली. अमेरिकी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज की फुल टाइम फैकल्टीज में 2.6% भारतीय-अमेरिकी ही हैं. 

सांस्कृतिक रूप से अमेरिका पर कितना असर डाला?

भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिका को सांस्कृतिक रूप से काफी हद तक प्रभावित किया है. विकास खन्ना और मनीत चौहान जैसे भारतीय मूल के शेफ ने अमेरिका में भारत के खान-पान को लोकप्रिय बनाया है. जबकि, दीपक चोपड़ा जैसी हस्तियों ने आयुर्वेद को पहचान दिलाई है.

स्वामी विवेकानंद का योग अमेरिकियों की दिनचर्या में रच-बस गया है. 2023 के आखिर तक 10% अमेरिकी यही योग करते थे. दिवाली और होली जैसे भारतीय त्योहार भी अब अमेरिका में जोर-शोर से मनाए जाते हैं.

राजनीति में भी भारतीय-अमेरिकी तेजी से बढ़ रहे हैं. अमेरिका की संघीय सरकार में 150 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी अहम पदों पर हैं. जबकि, 2013 तक लगभग भारतीय-अमेरिकी थे. 

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