भारत-चीन बॉर्डर पर हालात कैसे हैं? चाइनीज विदेश मंत्रालय ने कुछ बताया, कुछ छिपाया!

भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों का नाम बदलने से चीन को मिर्ची लगी है. हालांकि चीन ऐसा खुद भी करता आया है. चीन ने भारत के इस कदम पर कहा है कि भारत द्वारा गैर-कानूनी रूप से बनाए गए तथाकथित 'अरुणाचल प्रदेश' को मान्यता नहीं देता है. इसके बाद खबरें आई थी कि चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं. लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

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अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले का दिरांग गांव. (Photo: Getty) अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले का दिरांग गांव. (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

भारत-चीन बॉर्डर पर मौजूदा हालात को लेकर चीन ने कुछ स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. बुधवार को चीन ने कहा कि चीन-भारत सीमा पर हालात "फिलहाल आम तौर पर स्थिर हैं." चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसके लिए "Generally stable at the moment" वाक्य का इस्तेमाल किया है. लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने की खबरों पर चुप्पी साध ली है. 

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए ये बातें कहीं. मीडिया ने गुओ जियाकुन से पूछा था कि क्या हाल ही में भारत के साथ कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने उस राज्य के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं, जिसे चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है. 

इस सवाल के जवाब में गुओ ने कहा, "चीन-भारत सीमा पर हालात फिलहाल आम तौर पर स्थिर हैं."

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन और भारत ने पिछले हफ़्ते चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए बने वर्किंग मैकेनिज़्म की 36वीं बैठक की.

उन्होंने आगे कहा, "दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के ज़रिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं."

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चीन ने यह नहीं बताया कि क्या उसने अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास अपनी गतिविधियां बढाई हैं?

भारत ने मंगलवार को कहा कि वह चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को "बेहद गंभीर" मानता है. साथ ही, भारत ने ज़ोर देकर कहा कि 'लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना "सबसे ज़रूरी" है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के आपसी संबंधों की दिशा तय करेगी. 

ये बयान अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आए हैं. 

नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं की आधिकारिक तौर पर उनके स्टैंडर्ड नामों से पहचान करने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया।.

भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह राज्य भारत का "अटूट और अभिन्न" हिस्सा है और कोई भी चीज़ इस "अविवादित सच्चाई" को बदल नहीं सकती. 

2020 में गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़पों और उसके बाद चार साल से ज़्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था. इसके बाद रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले एक साल से ज़्यादा समय में कई कदम उठाए हैं.

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अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले आखिरी दो इलाकों डेपसांग और डेमचोक से सेना पीछे हटाने (डिसइंगेजमेंट) के समझौते को पक्का किया था. 

समझौता पक्का होने के कुछ दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कज़ान में बातचीत की और रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए कई फ़ैसले लिए.

पिछले साल अगस्त में PM मोदी सालाना SCO समिट में शामिल होने के लिए चीन के शहर तियानजिन गए थे. मोदी और शी ने SCO (शंघाई सहयोग संगठन) समिट के दौरान विस्तार से बातचीत की. 

बैठक में मोदी ने कहा था कि भारत आपसी भरोसे, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन ने अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं. 

रिपोर्ट के अनुसार जुलाई के आखिर में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी ज़िले में तिब्बत से सटे दूर-दराज़ के सीमावर्ती गांव 'टक्सिंग (Taksing)' के पास भारतीय और चीनी सेना की पेट्रोलिंग टीमें आमने-सामने आ गईं थीं. 

चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जिसे वह 'ज़ांगनान' कहता है. भारत का कहना है कि यह राज्य उसके इलाके का एक अहम और अविभाज्य हिस्सा है. 

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