चीन की मीडिया में ITBP चीफ के बयान की चर्चा, कहा- ये भारत की रणनीतिक चाल

ITBP के चीफ शत्रुजीत कपूर की ओर से अरुणाचल बॉर्डर को लेकर दिए गए बयान की चर्चा चीन की मीडिया में है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय पक्ष द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोप निराधार थे. अखबार ने लिखा है कि गश्त से जुड़े मुद्दों पर बयान देना एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी.

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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन के बीच 1126 KM लंबी सीमा है. (Photo: Pexels) अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन के बीच 1126 KM लंबी सीमा है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:47 PM IST

अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन के बीच टकराव की खबरों पर चीन की मीडिया भारत को दोष दे रहा है. चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इस मामले को अलग नजरिए से पेश किया है. ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में भारत के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें भारत की घरेलू राजनीति से जुड़ी रणनीति करार दिया है. चीन के दूसरे अखबार और हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने इस घटनाक्रम को भारत और चीन के बीच रिश्तों में आई नाजुक गर्मजोशी के लिए नई चुनौती बताया है.

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चीन की सरकार का मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन के बयान को प्रमुखता दी है. गुओ ने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच हुए प्रासंगिक समझौतों और साझा सहमतियों का सख्ती से पालन करता है. उनके मुताबिक, चीनी सेना अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य गश्त और नियंत्रण गतिविधियां संचालित करती है.

चीन के विदेश मंत्रालय का ये बयान तब आया है जब भारत ने कहा था कि बॉर्डर पर स्थिति तब बिगड़ती है जब चीन की सेना गश्त के तय तौर तरीकों को तोड़ती हैं. 

भारत के विदेश मंत्रालय ने ये बयान तब दिया है ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल में कई जगहों पर फेस-ऑफ की स्थिति बनी और यह जारी है. उनके बयान को इसलिए अहम माना गया क्योंकि यह उन घटनाओं को लेकर भारत के एक टॉप अधिकारी की ओर से सार्वजनिक पुष्टि थी. LAC पर टकराव की खबरें पहले भी सामने आ रही थीं. भारत के इस बयान पर चीन के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी थी. 

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अब चीन की मीडिया में इस बयान की चर्चा है. 

त्सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फेंग ने 'ग्लोबल टाइम्स' को बताया कि, 'भारतीय पक्ष द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए निराधार आरोप, गश्त से जुड़े मुद्दों पर एक सोची-समझी रणनीतिक चाल थी. इसमें कुछ हद तक घरेलू राजनीतिक समीकरण भी शामिल थे लेकिन साथ ही मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों से आगे बातचीत की गुंजाइश भी बनी थी.'

कियान ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने का जिम्मा भारत पर डालते हुए कहा कि सीमा संबंधी मुद्दों को द्विपक्षीय संबंधों में आ रहे सुधार की गति में बाधा बनने से रोकने के लिए भारत को सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा समझौतों का पालन करना चाहिए. 

हालांकि अखबार ने इस संबंध में चीन की जिम्मेदारियों का जिक्र नहीं किया.  

लेख में कहा गया है कि दोनों पक्षों को अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए स्थापित राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्रों का उपयोग जारी रखना चाहिए, ताकि ऐसी किसी भी गलतफहमी से बचा जा सके जिसका असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है. 

ग्लोबल टाइम्स ने कियान के हवाले से लिखा है कि सीमा से जुड़े अलग-अलग विवादों को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर असर डालने देने के बजाय, इन मुद्दों को स्थापित तंत्रों के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए.  इसमें दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जैसे उपाय शामिल हैं. 

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वहीं हॉन्गकॉन्ग से प्रकाशित हो रहे अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने कहा है कि, 'चीन और भारत के बीच बनी नाजुक सुलह एक बार फिर परीक्षा के दौर से गुजर रही है, क्योंकि इन दोनों एशियाई पड़ोसियों के बीच विवादित सीमा पर सैन्य आमना-सामना होने की खबरें सामने आई हैं.'

अखबार ने लिखा है कि पिछले एक साल में बीजिंग और नई दिल्ली ने संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाए हैं. इन घटनाओं ने दोनों देशों के आपसी संबंधों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था. पांच साल के अंतराल के बाद पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो गईं. 

सात वर्षों में पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले महीने भारत का दौरा किया.  इस दौरान उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की. 
 

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