आज जेल में बंद इमरान खान तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे. बात 2018 की है. तब नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था. एक साल बाद तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके नवाज को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मिल गई. इसके बाद लाहौर हाई कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत दे दी. नवाज लंदन चले गए और 2023 तक वहीं रहे.
तब तक पाकिस्तान की सियासी फिजा बदल चुकी थी. इमरान पीएम पद से हट चुके थे. करप्शन मामले में गिरफ्तारी के बाद वे जेल गए. इसके साथ ही नवाज शरीफ का निर्वासन खत्म हुआ.
क्या पाकिस्तान में यही सियासी स्क्रिप्ट फिर से दोहरायी जा रही है.
इंडिया टुडे से बात करते हुए पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट हामिद मीर कहते हैं, "पाकिस्तान में कुछ भी हो सकता है। हालात साफ़ दिख रहे हैं"
मीर ने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान के उतार-चढ़ाव भरे इतिहास ने दिखाया है कि कैसे कोर्ट से मिली ऐसी राहत ने नेताओं को राजनीतिक रूप से फिर से ज़िंदा कर दिया है."
इमरान को अदालत से मिली राहत का ज़िक्र करते हुए मीर ने कहा, "पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में यह कोई नई बात नहीं है. इतिहास खुद को दोहरा रहा है."
इस हफ़्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि इमरान की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अदियाला जेल से किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया जाए. भ्रष्टाचार के कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) के प्रमुख अगस्त 2023 से जेल में हैं. हालांकि शहबाज सरकार ने तुरंत इस आदेश को चुनौती दी.
इसके साथ ही प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर PTI को बातचीत के लिए बुलाया है. उन्होंने कहा कि वे हमेशा विपक्ष के साथ सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं. और वे एक बार फिर सार्थक बातचीत के लिए पीटीआई को बुला रहे हैं.
पाकिस्तानी पत्रकार मीर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पाकिस्तान में अदालत के ऐसे आदेशों को अक्सर किसी गुप्त समझौते या पर्दे के पीछे हुई किसी डील के संकेत के तौर पर देखा जाता है. उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से शरीफ परिवार परेशान हो गया होगा.
सीनियर पत्रकार ने कहा, "नवाज शरीफ को खुद भी चुपचाप और गुप्त समझौते करके अदालतों और संबंधित हलकों से राहत मिली थी. इसलिए शरीफ़ परिवार को लग रहा होगा कि इमरान ख़ान को भी अब किसी गुप्त समझौते के ज़रिए राहत मिल रही है."
हाल ही में PML-N के सीनेटर नासिर भट्ट ने कहा कि शरीफ परिवार के खिलाफ साजिश रची जा रही है और दावा किया कि इमरान को जल्द ही उनके घर भेज दिया जाएगा.
बता दें कि पाकिस्तान की राजनीति में ताकतवर सेना का मुल्क की सियासत पर काफी असर होता हो. इमरान को मिली राहत ने इस बारे में अटकलें तेज़ कर दी हैं कि क्या इसमें सेना की भी सहमति थी.
राजनीति में सेना के रोल पर हामिद मीर मुस्कुराते हुए कहते हैं कि पाकिस्तान की फौज का दावा है कि वो सियासत में दखल नहीं देती है.
शरीफ फैमिली में टेंशन क्यों है?
इमरान खान की रिहाई के समय ने शरीफ परिवार की चिंता और बढ़ा दी है. हाल ही में पाकिस्तान की सत्ताधारी गठबंधन में दरारें आ गई हैं. हाल ही में PML-N की सहयोगी पार्टी PPP के बिलावल भुट्टो ने शरीफ परिवार को चेतावनी दी कि उनका "उल्टी गिनती" शुरू हो गई है.
भुट्टो ने शहबाज शरीफ सरकार पर PoJK चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है और इलाके में अशांति के लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव पर भी PPP की राय शहबाज़ से अलग रही है. मीर ने कहा, "बिलावल भुट्टो आजकल सरकार से नाराज़ हैं."
हामिद मीर ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की हालिया टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि देश का "सिस्टम ध्वस्त हो गया है."
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नकवी लंबे समय से प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते रहे हैं.
मीर के अनुसार शरीफ परिवार की घबराहट का तीसरा कारण पाकिस्तान में "कॉकरोच मूवमेंट" का खतरा है, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शनों की तर्ज पर हो सकता है.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में कॉकरोच मूवमेंट का खतरा है. क्योंकि कुछ लोगों ने अब यह कहना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान के युवा सिस्टम से खुश नहीं हैं. युवाओं को संसद और न्यायपालिका पर कोई भरोसा नहीं है."
इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी द्वारा 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक मार्च की घोषणा करने से मीर को लगता है कि इससे PTI कार्यकर्ताओं में जोश आ सकता है और शरीफ सरकार पर दबाव बढ़ सकता है.
क्या इमरान कमबैक कर सकते हैं?
इस मुद्दे पर अभी कुछ खास नहीं कहा जा सकता है लेकिन इस बात की काफी चर्चा है कि क्या कोर्ट से इमरान को मिली थोड़ी-सी राहत उनके एक्टिव पॉलिटिक्स में लौटने का रास्ता बना सकती है?
मीडिया रिपोर्ट में पीटीआई चीफ कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं. उन्हें ब्लड प्रेशर का उतार-चढ़ाव झेलना पड़ रहा है, दिल की धड़कन गिर गई है और वे तनाव में हैं. हालांकि मीर ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इमरान "फिजिकली ठीक" हैं, लेकिन उनकी आंखों की हालत अच्छी नहीं है.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान की लोकप्रियता पर कोई शक नहीं है. हालांकि उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उन्हें अस्पताल ले जाने का आदेश मिलिट्री की तरफ से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आया था.
हालांकि उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पाकिस्तान के पॉलिटिकल माहौल ने बार-बार अनुमानों को गलत साबित किया है.
हामिद मीर ने कहा, "अगर नवाज़ शरीफ़ जेल से बाहर आ सकते हैं, बरी हो सकते हैं और पॉलिटिक्स में लौट सकते हैं, तो कुछ भी हो सकता है. इमरान खान कभी भी बाहर आ सकते हैं."
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