इमरान खान के इलाज को लेकर सरकार और PTI आमने-सामने, मामला फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

निजी अस्पताल में इलाज के आदेश को लेकर इमरान की पार्टी और मौजूदा सरकार के बीच तकरार जारी है. अब सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे.

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इलाज को लेकर विवाद बढ़ गया है पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के इलाज को लेकर विवाद बढ़ गया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:19 PM IST

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सरकार और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बीच टकराव एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. PTI ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दोबारा अवमानना याचिका (Contempt Petition) दाखिल की है. पार्टी का आरोप है कि सरकार ने अदालत के उस आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें इमरान खान को इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का निर्देश दिया गया था. यह याचिका इमरान खान की बहन उजमा खान ने दाखिल की है.

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कोर्ट ने इससे पहले तकनीकी आपत्तियों के चलते याचिका वापस कर दी थी. इसके कुछ ही घंटों बाद PTI के वकीलों ने आपत्तियों को दूर कर याचिका फिर से दाखिल कर दी.

क्या है पूरा मामला?
18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया था. हालांकि 20-21 अगस्त की रात उन्हें शिफा अस्पताल ले जाने के बजाय सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया. वहां उनकी आंखों की जांच और दूसरी मेडिकल जांच की गई.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का कहना है कि इसके बाद इमरान खान को वापस अदियाला जेल भेज दिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें अगली सुनवाई यानी 16 सितंबर तक अस्पताल में भर्ती रहना था. पार्टी ने इसे अदालत के आदेश की सीधी अवहेलना बताया है.
इस याचिका में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, कानून मंत्री आजम नजीर तरार, सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार और अदियाला जेल के अधीक्षक समेत कई अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है.

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यह भी पढ़ें: 'इमरान खान को अस्तित्व से मिटाने की कोशिश...', अंग्रेज द‍िग्गज ने पाकिस्तान पर क्यों उठाए सवाल?

सरकार ने इमरान खान को शिफा अस्पताल नहीं भेजने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है. PIMS प्रशासन के मुताबिक, शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल के दो विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भी अस्पताल में इमरान खान की आंखों की जांच में हिस्सा लिया था. इस बीच सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उसने अदालत से 18 अगस्त के आदेश की समीक्षा और उसे वापस लेने की मांग की है. सरकार का तर्क है कि किसी एक कैदी को निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति देना भेदभावपूर्ण हो सकता है और इससे दूसरे कैदियों के लिए भी ऐसा ही दावा करने का रास्ता खुल सकता है.

 लंबे समय से जेल में हैं इमरान
इमरान खान 5 अगस्त 2023 को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार हुए थे और तब से जेल में हैं. वह रावलपिंडी के बाहरी इलाके में स्थित अदियाला जेल में बंद हैं. इमरान की पार्टी और परिवार लंबे समय से उनके स्वास्थ्य और इलाज को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. PTI समर्थकों का आरोप है कि इमरान को पर्याप्त मेडिकल सुविधा, परिवार से मुलाकात और कानूनी मदद नहीं मिल रही है. हालांकि सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है. अब इस मामले में सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है. 16 सितंबर की अगली सुनवाई से पहले यह देखना अहम होगा कि अदालत सरकार और PTI की दलीलों पर क्या रुख अपनाती है.

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