यमन में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने एक बार फिर पूरे इलाके की चिंता बढ़ा दी है. इसका असर सिर्फ अरब देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के तेल बाजारों पर भी पड़ सकता है. लाल सागर में तेल की सप्लाई का रास्ता खतरे में नजर आ रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में हूतियों ने यमन के कई इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है और अब सऊदी से जुड़े जहाजों और तेल के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है.
इसका असर यमन में भी दिखाई दे रहा है. ताजा लड़ाई से करीब 1.25 लाख लोग अपना घर छोड़ चुके हैं. वहीं यमन में लंबे समय से चल रहे गृह युद्ध में 1.50 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
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लाल सागर का अहम रास्ता हूतियों की पहुंच में
हूतियों ने लाल सागर के अहम बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है. इसके बाद बाब अल-मंदेब के पास कई द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण बढ़ाया है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है. सामान्य हालात में दुनिया के करीब 12 फीसदी व्यापार की आवाजाही इसी रास्ते से होती है. हूती अब जिबूती से करीब 32 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच चुके हैं. जिबूती में अमेरिका समेत कई देशों के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.l
सऊदी के तेल पर बढ़ता दबाव
हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे सऊदी अरब पर दबाव बनाने के लिए उसके जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बना रहे हैं. उनकी प्रमुख मांग है कि सऊदी उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर लगी नाकाबंदी हटाए.
इसी बीच सऊदी अरब की एक तेल पाइपलाइन पर भी हमला हुआ. इसकी जिम्मेदारी इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया पर डाली गई है. इन घटनाओं से सऊदी की चिंता बढ़ी है, क्योंकि वह दुनिया के बड़े तेल सप्लाई करने वाले देशों में शामिल है.
पहले घटे जहाज, फिर बढ़ी आवाजाही
हूती हमलों के बाद बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी प्रभावित हुई. शिपिंग कंपनी विंडवर्ड के मुताबिक, हूतियों की बढ़त से पहले यहां रोज करीब 35 जहाज गुजरते थे. यह संख्या घटकर 25 तक पहुंच गई. हालांकि रविवार को करीब 45 जहाजों ने इस रास्ते से आवाजाही की. इसके बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आशंका है कि हूती आगे सऊदी से जुड़े दूसरे जहाजों को भी निशाना बना सकते हैं.
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बातचीत की कोशिश, लेकिन संकट बरकरार
तनाव कम करने के लिए बातचीत की कोशिश भी चल रही है. पिछले हफ्ते ओमान में अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई. अमेरिका का कहना है कि वह लगातार सऊदी अरब के संपर्क में है. तुर्की भी ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है. यह संकट सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के नए रक्षा समझौते की भी पहली बड़ी परीक्षा बन गया है.
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर यमन के आम लोगों पर पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, ताजा लड़ाई में 8 नागरिकों की मौत और 32 लोग घायल हुए हैं. सऊदी अरब ने भी बताया कि एक हूती ड्रोन को रोकने के बाद गिरे मलबे से एक व्यक्ति की मौत और दो लोग घायल हुए.
यमन में मानवीय मदद की स्थिति भी गंभीर है. संयुक्त राष्ट्र की अपील का अब तक सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा ही फंड हो पाया है. ऐसे में लाखों लोगों के लिए खाना, इलाज, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाएं जुटाना मुश्किल होता जा रहा है.
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