ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बावजूद खुद को देश का असली 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताने वाले सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो विवादों में घिर गए हैं. उनके एक करीबी सहयोगी ने दावा किया है कि यह गलती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल (ChatGPT) की वजह से हुई थी. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बोल्सोनारो अब भी चुनाव परिणाम को वैलिड नहीं मानते हैं.
ब्राजील के दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो की एक चिट्ठी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इस चिट्ठी में उन्होंने खुद को ब्राजील का असली 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताया था. हालांकि, सोशल मीडिया पर चिट्ठी पोस्ट करने के करीब एक घंटे बाद ही उसे हटा दिया गया और संशोधित संस्करण जारी किया गया. नई चिट्ठी में 'निर्वाचित राष्ट्रपति' की जगह 'ब्राजील का नेता' लिखा गया था.
बोल्सोनारो के करीबी सहयोगी पाउलो फिगुएरेडो ने दावा किया है कि चिट्ठी तैयार करने के दौरान ChatGPT ने गलती से उसका पुराना ड्राफ्ट शामिल कर दिया था. फिगुएरेडो दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर और पॉडकास्ट होस्ट हैं. वह अमेरिका में बोल्सोनारो परिवार के अनौपचारिक प्रवक्ता के तौर पर भी काम करते हैं.
ChatGPT ने शामिल कर दिया पुराना ड्राफ्ट
फिगुएरेडो के मुताबिक, चिट्ठी तैयार करने के दौरान कई बार बदलाव किए गए थे और इसमें कई लोगों ने अपने सुझाव दिए थे. फ्लावियो बोल्सोनारो के छोटे भाई और पूर्व सांसद एडुआर्डो बोल्सोनारो ने इसका अंतिम संस्करण तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद ली थी. हालांकि, फिगुएरेडो का दावा है कि ChatGPT ने अंतिम चिट्ठी में गलती से एक पुराना ड्राफ्ट शामिल कर दिया. इसके साथ ही ब्राजील के राष्ट्रीय प्रतीक का पुराना संस्करण भी इस्तेमाल किया गया.
फिगुएरेडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दस्तावेज तैयार करते समय AI ने टेक्स्ट का एक पुराना संस्करण शामिल कर दिया, जिसमें फ्लावियो ने खुद को असली 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताया था. उन्होंने कहा कि यह गलती तब सामने आई, जब चिट्ठी पत्रकारों के बीच भेजी जा चुकी थी. इसके बाद उसमें सुधार किया गया.
चुनाव में 40 लाख से ज्यादा वोटों से हारे थे बोल्सोनारो
रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो को वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. दोनों उम्मीदवारों के बीच 40 लाख से ज्यादा वोटों का अंतर था. हालांकि, बुधवार को बोल्सोनारो ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए खुद को देश का असली 'निर्वाचित राष्ट्रपति' बताया था. उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया.
फिगुएरेडो ने कहा कि बोल्सोनारो ने कानूनी और नैतिक कारणों से चिट्ठी में 'निर्वाचित राष्ट्रपति' के बजाय 'नेता' शब्द इस्तेमाल करने का फैसला किया. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को ज्यादा गंभीर नहीं बताया और कहा कि इससे जुड़े लोगों को यह गलती मजेदार लगी. इस मामले में OpenAI और बोल्सोनारो के प्रेस अधिकारियों से प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन तत्काल कोई जवाब नहीं मिला.
चुनाव परिणाम मानने से अब भी इनकार
चिट्ठी में सुधार के बावजूद फ्लावियो बोल्सोनारो के राजनीतिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है. फिगुएरेडो ने कहा कि बोल्सोनारो अब भी चुनाव को अवैध मानते हैं और परिणाम स्वीकार नहीं करते. उन्होंने कहा कि फ्लावियो ब्राजील में लोकतंत्र बहाल करने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
कानूनी मुश्किलों में भी घिरे बोल्सोनारो
इस विवाद के बीच फ्लावियो बोल्सोनारो की राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं. वह बुधवार को ब्राजील छोड़कर अमेरिका के मियामी पहुंच गए थे. बोल्सोनारो ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में अपने पासपोर्ट जमा करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है.
वहीं, खुद को ब्राजील का असली नेता घोषित करने के बावजूद बोल्सोनारो को अपने ही राजनीतिक खेमे के प्रमुख नेताओं का समर्थन नहीं मिल सका है. इससे उनका राजनीतिक अलगाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. दूसरी ओर, लूला दा सिल्वा की चुनावी जीत को ब्राजील की संघीय चुनावी अदालत, अंतरराष्ट्रीय नेताओं, चुनाव पर्यवेक्षकों और बोल्सोनारो की अपनी राजनीतिक पार्टी ने भी मान्यता दे दी है.
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