डेनमार्क की PM ने मेल सर्जन को दिया ऐसा करार जवाब, कर दी बोलती बंद

एक कॉस्मेटिक सर्जन के नाक सुधारने को ऑफर को डेनमार्क पीएम ने ठुकरा दिया है. पीएम फ्रेडरिक्सन ने कहा कि महिलाओं के शरीर और चेहरे पर टिप्पणी करने की बजाय लोगों को उनके काम और विचारों पर ध्यान देना चाहिए.

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डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने एक मेल सर्जन को करारा जवाब दिया है. (File Photo-Reuters) डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने एक मेल सर्जन को करारा जवाब दिया है. (File Photo-Reuters)

aajtak.in

  • कोपेनहेगन,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, एक कॉस्मेटिक सर्जन ने उन्हें उनकी नाक को लेकर सलाह दी. सर्जन ने फ्रेडरिक्सन को नाक का एक हिस्सा ठीक कराने का ऑफर दिया. प्रधानमंत्री ने इस सलाह को साफ तौर पर ठुकरा दिया.

PM मेटे फ्रेडरिक्सन (48) ने इंस्टाग्राम पर सर्जन के साथ हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया. उन्होंने लिखा कि वह अपने शरीर को लेकर खुश हैं. उन्होंने सर्जन को जवाब दिया कि उन्हें अपने रूप-रंग को लेकर किसी मेल प्लास्टिक सर्जन की राय की जरूरत नहीं है.

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दरअसल, सर्जन ने उन्हें नाक पर मौजूद एक छोटे से निशान को ठीक कराने की सलाह दी थी. फ्रेडरिक्सन ने इस ऑफर का जवाब देते हुए साफ कहा कि वह इसमें कोई दिलचस्पी नहीं रखतीं हैं.

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'मेरे नाक पर बात करने से जरूरी मुद्दे हैं'

फ्रेडरिक्सन ने अपनी पोस्ट में इस तरह के मैसेज पर नाराजगी भी जताई. उन्होंने बताया कि उन्हें लंबे समय से अपने रूप-रंग को लेकर टिप्पणियां मिलती रही हैं. कभी उनके दांतों को लेकर बात होती है. कभी उनके पतले बालों को लेकर टिप्पणी की जाती है.

उन्होंने कहा कि उनके नाक को लेकर भी कई लोग सलाह देते हैं. उन्हें बोटॉक्स कराने की सलाह तक दी जाती है. प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर लोगों को महिलाओं के शरीर और चेहरे को लेकर इतनी चिंता क्यों रहती है.

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उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें मैसेज भेजना चाहता है तो उसका स्वागत है. लेकिन वह चाहती हैं कि लोग उनसे किसी ज्यादा अहम मुद्दे पर बात करें. उनकी नाक को लेकर सलाह देना जरूरी नहीं है.

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फ्रेडरिक्सन ने अपनी पोस्ट में यूक्रेन की हालिया यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कीव में रहते हुए उन्होंने हवाई हमले के सायरन सुने. यूरोप में युद्ध जारी है. इसके बावजूद डेनमार्क लौटने के बाद उन्हें मिले शुरुआती मैसेज में से एक उनकी नाक को लेकर था.

उन्होंने इसे लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि दुनिया में कई गंभीर मुद्दे हैं. ऐसे समय में किसी महिला के चेहरे पर टिप्पणी करना सही नहीं है.

महिलाओं से कहा-अपनी कमियों को अपनाएं

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने महिलाओं समेत सभी लोगों से अपनी कथित कमियों को लेकर सहज रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें वह खुद कमी मान सकता है. इन्हें छिपाने के बजाय अपनाना चाहिए.

फ्रेडरिक्सन ने कहा कि वह अपनी उम्र के इस पड़ाव पर अपने रूप-रंग को लेकर सहज हैं. वह अपने जीवन से खुश हैं. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि किसी बाहरी राय के आधार पर खुद को बदलने की जरूरत नहीं है.

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यूरोप की प्रमुख नेताओं में शामिल हैं फ्रेडरिक्सन

मेटे फ्रेडरिक्सन 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री हैं. वह देश की दूसरी महिला प्रधानमंत्री हैं. वह यूरोप के लंबे समय से पद पर बने प्रधानमंत्रियों में भी शामिल हैं.

फ्रेडरिक्सन यूक्रेन के समर्थन को लेकर मुखर रही हैं. वह रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई का समर्थन करती हैं. इसके अलावा उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षाओं का भी खुलकर विरोध किया है.

नाक पर मिली एक सलाह के जवाब में फ्रेडरिक्सन ने अब अपने अंदाज में साफ मैसेज दिया है कि किसी महिला की पहचान उसके चेहरे या शरीर से नहीं तय होती. उन्होंने लोगों से दूसरों की शक्ल-सूरत के बजाय उनके काम और विचारों पर ध्यान देने की अपील की है.

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