कांगो में इबोला आउट ऑफ कंट्रोल, देश भर में अब तक 8,067 मामले, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से बिगड़े हालात

कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है. मौतों का आंकड़ा तेजी से ऊपर जा रहा है और बीमारी से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मी भी कम पड़ रहे हैं. ऊपर से डर, अविश्वास, हिंसा और कर्मचारियों की हड़ताल ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं.

Advertisement
 कांगो में इबोला से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं (Photo-Reuters) कांगो में इबोला से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं (Photo-Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST

कांगो में इबोला का प्रकोप अब बेकाबू होता दिख रहा है. देश में इस बीमारी के 8,067 मामले सामने आ चुके हैं और 3,901 लोगों की मौत हो चुकी है. 26 सितंबर तक का यह आंकड़ा देश के 26 में से 7 प्रांतों के 63 हेल्थ जोन का है. यानी हर 100 संक्रमित लोगों में 48 से ज्यादा की जान जा रही है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बीमारी से लड़ने के लिए अब कांगो में स्वास्थ्य कर्मी भी कम पड़ रहे हैं.

Advertisement

यह कांगो में इबोला का 17वां और अब तक का सबसे घातक प्रकोप है. इसकी वजह है खतरनाक Bundibugyo वायरस, जिसका अभी तक कोई स्वीकृत इलाज और वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मुताबिक, अस्पताल में पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है. इसका साफ मतलब यह है कि लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा. इसके साथ ही बीमारी की पहचान में देरी और समय पर इलाज ना मिल पाना भी इन मौतों का बड़ा कारण है. 

वहीं इस बीमारी में सबसे बड़ी चुनौती है लोगों का अविश्वास. कुछ लोग इस बीमारी को झूठ मान रहे हैं. इसका असर इतना गंभीर है कि कई जगह स्वास्थ्य कर्मी और इलाज केंद्रों पर हमले तक हो चुके हैं.

सरकार के कदम का बचाव किया तो हमला

Advertisement

रविवार को कांगो की सत्तारूढ़ पार्टी UDPS के अधिकारी मैरी-सेलेस्टिन करोंडवा पर भी हमला किया गया. पार्टी के मुताबिक, उन्होंने रेडियो कार्यक्रम में सरकार के इबोला से जुड़े कदमों का बचाव किया था. हमले के बाद उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है. करोंडवा नॉर्थ किवु प्रांत के बुटेम्बो में पार्टी के कार्यकारी संघीय अध्यक्ष हैं. अब हमले के बाद उनकी पार्टी ने सरकार से मामले की जांच करने की मांग की है.

इबोला की भयावहता को देखते हुए रोकथाम के लिए तेजी से संसाधन लगाए जा रहे हैं. इसका असर दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के OCHA के मुताबिक, इतुरी प्रांत में अप्रैल से जून के बीच नियमित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं 13% घट गईं. डर के कारण लोग अस्पताल जाने से भी बच रहे हैं.

यह भी पढ़ें: कांगो में 7 हजार से ज्यादा लोग इबोला पीड़ित, वायरस नए राज्य में फैला

हालांकि इस हालात में स्वास्थ्य कर्मी की कमी सबसे बड़ी मुश्किल है. वेतन में देरी और भुगतान न मिलने से कई जगह हड़ताल हुई है. Africa CDC के मुताबिक, प्रकोप शुरू होने के बाद 50 स्वास्थ्य कर्मी की मौत हो चुकी है.

कुछ इलाकों में नए मामले कम हुए हैं, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में बीमारी फैलती जा रही है. Africa CDC के आंकड़ों में मौजूदा प्रकोप की रफ्तार 2014-16 के पश्चिमी अफ्रीका वाले इबोला प्रकोप से भी तेज दिखी है.

Advertisement

WHO ने चेतावनी दी है कि अगर यही रफ्तार रही तो यह प्रकोप उस पुराने संकट के स्तर तक पहुंच सकता है, जिसमें करीब 11 हजार लोगों की मौत हुई थी. कांगो के लिए अब इस वायरस पर काबू पाना बड़ी चुनौती है. वहीं हिंसा, स्वास्थ्य कर्मी की हड़ताल और लगातार पलायन ने बीमारी को रोकने की हर कोशिश को और मुश्किल बना दिया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »