'प्रतिद्वंदी नहीं, साझेदार हैं भारत-चीन', मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर चीन का बयान

दिल्ली में शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की.

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मोदी-शी की मुलाकात के बाद चीन ने जारी किया बयान. (photo: ITG) मोदी-शी की मुलाकात के बाद चीन ने जारी किया बयान. (photo: ITG)

प्रणय उपाध्याय

  • बीजिंग,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:39 AM IST

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. दोनों शीर्ष नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों पर खुलकर और गहराई से विचार साझा किए. इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच इस बात पर अहम सहमति बनी कि भारत और चीन को एक-दूसरे का सहयोगी और साझेदार होना चाहिए. चीनी पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने पर जोर दिया. इसके साथ ही दोनों देशों द्वारा सीमा विवाद को सुलझाते हुए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील की.

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन हमेशा रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारत-चीन संबंधों को देखता और विकसित करता आया है. पिछले दो सालों में उनकी और पीएम मोदी की दो बार मुलाकात हुई है. इस बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों को एक 'नई शुरुआत' से 'नई ऊंचाई' तक पहुंचाया है.

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उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संस्थागत आदान-प्रदान धीरे-धीरे फिर से शुरू हुआ है. इसके साथ ही सहयोग परियोजनाओं की लिस्ट लगातार बढ़ी है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का स्तर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. भारत-चीन को ये उपलब्धी बहुत कठिनाई से हासिल हुई है, इसे संजोकर रखना चाहिए.

साझेदार हैं भारत-चीन

शी ने ये भी कहा कि दोनों देशों की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं, फिर भी भारत-चीन एक-दूसरे की ताकतों का पूरक बन सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं और साथ मिलकर विकास कर सकते हैं. भारत-चीन इस अशांत बदलते इंटरनेशनल परिदृश्य में दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश और ग्लोबल साउथ के प्रमुख सदस्यों के तौर पर अहम जिम्मेदारी निभाते हैं.

उन्होंने कहा कि इंसानित के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों को बेहतर ब्रिक्स सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देना और वैश्विक शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि से ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा डालने के लिए हाथ मिलाना चाहिए.

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शी ने सुझाए चार पॉइंट्स

शी जिनपिंग ने चीन-भारत संबंधों के स्थिर और दीर्घकालिक (लंबे वक्त तक) विकास को सुनिश्चित करने के लिए चार पॉइंट्स रखें. पहले पॉइंट में उन्होंने कहा कि दोनों देशों को वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत समझ रखनी चाहिए. भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, वह एक-दूसरे के विकास के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर पैदा करते हैं. ये रणनीतिक निर्णय दोनों देशों के विकास के चरणों और अंतरराष्ट्रीय परिवेश पर आधारित है और दोनों देशों तथा उनके लोगों के साझा हितों को पूरा करता है.

दूसरे बिंदु में उन्होंने 'विन-विन' सहयोग पर जोर देते हुए लोगों के बीच आपसी संपर्क और सीधी हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार की बात कही, जिससे आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को संतुलित तरीके से हल किया जा सके.

तीसरे पॉइंट में चीनी राष्ट्रपति ने आपसी सम्मान और राजनीतिक समझदारी से बाधाओं को दूर करने की बात कही. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा मुद्दे को समानांतर पटरियों पर सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए. ये दोनों प्रक्रियाएं एक-दूसरे को मजबूत करेंगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगी.

चौथे बिंदु के तहत शी जिनपिंग ने समावेशी बहुपक्षीय सहयोग के जरिए दुनिया को लाभ पहुंचाने की वकालत की. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन करना चाहिए. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र (UN), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी20 (G20) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय मजबूत करते हुए अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय की रक्षा करनी चाहिए.

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