बांग्लादेश और अमेरिका ने मिलकर भारत को दिया बड़ा झटका!

बांग्लादेश ने भारत से कपास की खरीद को कम करके अमेरिका से खरीदने का फैसला किया है. उसका कहना है कि इससे उसके वस्त्र उद्योग को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी. अमेरिका ने भी कहा है कि अगर बांग्लादेश अमेरिकी कपास से कपड़े बनाता है तो वो उसे अमेरिकी बाजार में बिना टैरिफ बेच सकता है.

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बांग्लादेश ने अमेरिका से कपास खरीदने की घोषणा की है (Photo: Reuters) बांग्लादेश ने अमेरिका से कपास खरीदने की घोषणा की है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इस रीढ़ को सहारा देते हैं भारत समेत सेंट्रल एशिया के कुछ देश. बांग्लादेश कपड़े बनाता है लेकिन इसके लिए कपास (Cotton) भारत सप्लाई करता है, लेकिन अब बांग्लादेश ने इसमें बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने 9 फरवरी को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता किया था.

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आज यानी गुरुवार को बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं और इस चुनाव से ठीक तीन दिन पहले यूनुस सरकार ने अमेरिका से व्यापार समझौता कर लिया. समझौते की वैधता पर कई सवाल खड़े हुए क्योंकि यूनुस सरकार ने समझौते को काफी सीक्रेट रखा और इसका ड्राफ्ट किसी के साथ शेयर नहीं किया गया.

अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत बांग्लादेश भारत से कपास की खरीद को धीरे-धीरे कम करने जा रहा है. बांग्लादेश ने घोषणा की है कि भारत की जगह अब अमेरिका से कपास खरीदी जाएगी.

'बांग्लादेश के लिए गेमचेंजर साबित होगा अमेरिका से कपास की खरीद'

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सूचना सलाहकार शफीकुल आलम ने एक इंटरव्यू में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को 'गेम चेंजर' बताया. उन्होंने कहा कि इससे बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके लिए बेहद अहम है.

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अमेरिका ने बांग्लादेश से व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में एक प्रतिशत की कटौती कर उसे 19% कर दिया है. कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देश वस्त्र उद्योग में बांग्लादेश के प्रतिस्पर्धी हैं और इन देशों पर भी अमेरिका ने 19% का ही टैरिफ लगाया है.

साथ ही, अमेरिका ने कहा है कि अगर बांग्लादेश अपने कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से बनाता है तो उस पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा यानी बांग्लादेश बिना किसी फीस के उसे अमेरिका में बेच सकेगा.

भारत से बड़ी मात्रा में कपास खरीदता है बांग्लादेश

बांग्लादेश का वस्त्र उद्योग काफी बड़ा है लेकिन वो कपड़ों के लिए पर्याप्त कपास या जरूरी धागे का उत्पादन नहीं कर पाता. इसके लिए वो भारत और सेंट्रल एशिया के देशों पर निर्भर है. लेकिन माना जा रहा है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद अब उसके सप्लायर्स में अमेरिका शीर्ष के देशों में शामिल हो जाएगा.

2024 में भारत ने बांग्लादेश को 1.6 अरब डॉलर का कपास धागा और लगभग 8.5 करोड़ डॉलर का मानव निर्मित फाइबर धागा बेचा था. इनका बड़ा हिस्सा जमीनी बंदरगाहों के रास्ते भेजा गया. लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया.

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भारत ने शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी जिसके बाद से रिश्ते और खराब हुए. इसे देखते हुए 13 अप्रैल 2025 को बांग्लादेश ने जमीनी रास्ते से भारतीय कपास के आयात पर रोक लगा दी. इसके जवाब में भारत ने 16 मई 2025 से बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट्स समेत कई उत्पादों के जमीनी रास्ते से देश में एंट्री पर रोक लगा दी. बांग्लादेश भारत को सबसे अधिक रेडीमेड गारमेंट्स बेचता है.

भारत की जगह अमेरिका से कपास खरीदना बांग्लादेश के लिए क्या इतना आसान है?

तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बांग्लादेश ने भारत के बजाए अब अमेरिका से कपास खरीदने की योजना बनाई है. अमेरिका बांग्लादेशी कपड़ों का सबसे बड़ा बाजार भी है. ऐसे में बांग्लादेश मान रहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में कपास खरीद को शामिल करना टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छा फैसला साबित होगा.

ब्रैक यूनिवर्सिटी के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर सलीम जहान ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि इस समझौते से अमेरिका के कपास उत्पादकों के लिए बांग्लादेश अब आकर्षक जगह बन गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका का कपास भारत और मिस्र के कपास जैसी क्वालिटी वाला होगा या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है.

उन्होंने कहा, 'टेक्सटाइल सेक्टर में कपास की क्वालिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है. अगर अमेरिकी कपास स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतरी, तो अमेरिकी खरीदार भी हमारे कपड़े पसंद नहीं करेंगे.'

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प्रोफेसर जहान ने यह भी कहा कि अमेरिका बांग्लादेश से काफी दूर है और वहां से कपास के आने की वजह से उसका शिपिंग चार्ज काफी बढ़ सकता है जिससे टैरिफ में मिली छूट का फायदा कम हो जाएगा. 

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