'बिना मुकदमे के कत्ल कर दिया गया बेटा...', सऊदी शासन से गुस्सा, बांग्लादेश से मांगा इंसाफ, नजरुल की कहानी

बांग्लादेश के नजरुल इस्लाम का परिवार सदमे में हैं. मां को यकीन नहीं हो रहा कि बेटे को मौत के घाट उतार दिया गया. एक रिश्तेदार को इतना सदमा पहुंचा कि उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस बीच परिवार अब कम से कम बॉडी वापस चाहता है.

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सऊदी अरब ने बांग्लादेश के 2 नागरिकों को मौत की सजा दी है. (Photo: Reuters) सऊदी अरब ने बांग्लादेश के 2 नागरिकों को मौत की सजा दी है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:42 PM IST

बांग्लादेश की रहीमा बेगम अपने बेटे को कत्ल किए जाने की खबर सुन कर पछाड़ें मार मारकर रो रही हैं. इस परिवार का यह भी कहना है कि बुधवार रात खबर सुनने के बाद नजरुल की बुआ आबिदा बेगम की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. नजरुल के पिता जिन्होंने अपने बेटे को सऊदी अरब भेजने के लिए 7 लाख टका उधार लिए थे, उन्होंने बताया कि अब कर्ज देने वाले लोग उनसे पैसे चुकाने का दबाव डाल रहे हैं.

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 ये नजरुल इस्लाम के परिवार की आपबीती है. 22 साल का नजरुल इस्लाम वही शख्स था जिसे सऊदी अरब की सरकार ने मक्का शहर की एक मस्जिद में कथित 'अश्लील' हरकत के लिए दोषी मानते हुए मौत दे दिया है. नजरुल इस्लाम के साथ सऊदी अरब की एक महिला को भी मौत के घाट उतार दिया गया है. 

14 अक्टूबर को सऊदी अरब में फांसी दिए गए दो बांग्लादेशियों में से एक नज़रुल इस्लाम के परिवार ने आरोप लगाया कि सऊदी अधिकारियों ने उन्हें पहले से कोई सूचना दिए बिना या अपना बचाव करने का मौका दिए बिना ही उसे मौत के घाट उतार दिया. 

परिवार के अनुसार नजरुल चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था. वह 10 नवंबर 2022 को सऊदी अरब गया था और वहां सफाईकर्मी के तौर पर काम करता था.

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सऊदी अरब पहुंचने के छह महीने बाद सऊदी पुलिस ने उसे और एक बांग्लादेशी महिला को मक्का की एक मस्जिद में कथित तौर पर "अनैतिक कृत्य" करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

तीन साल से भी अधिक समय बाद उसके परिवार ने मीडिया रिपोर्टों से जाना कि 14 अक्टूबर को मक्का में उसे मौत की सजा दी गई थी. 

हर संडे होती थी बात, कत्ल के बारे में नहीं दी गई जानकारी

नजरुल इस्लाम की कहानी को बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार ने विस्तार से कवर किया है. अखबार ने लिखा है कि नजरुल की मां ने बताया कि वह हर रविवार जेल से फोन पर परिवार से बात करता था, लेकिन उन्हें उनकी मृत्युदंड के बारे में पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी.

हालांकि अभी तक स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि नज़रुल पर क्या आरोप थे, क्या उन्हें कानूनी मदद मिली थी, या क्या मृत्युदंड दिए जाने से पहले उन्हें अपना बचाव करने का मौका दिया गया था. 

बांग्लादेश सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर उन दो लोगों की पहचान की पुष्टि नहीं की है जिन्हें मृत्युदंड दिया गया है. 

नजरुल के पिता अब्दुल बशीर ने कहा, "अगर मेरे बेटे को बिना किसी उचित कारण के फांसी दी गई है, तो मुझे न्याय चाहिए."

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वापस लाई जाए बॉडी

परिवार ने सरकार से अपील की है कि नजरुल को मौत दिए जाने से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कराई जाए और सरकारी खर्च पर उसके शव को घर वापस लाने की व्यवस्था की जाए. पड़ोसियों ने भी परिवार की मदद के लिए लोगों से अपील की है. 

नजरुल के पिता जिन्होंने अपने बेटे को सऊदी अरब भेजने के लिए 7 लाख टका उधार लिए थे, उन्होंने बताया कि अब कर्ज देने वाले लोग उनसे पैसे चुकाने का दबाव डाल रहे हैं. 

ब्राह्मणबेरिया के डिप्टी कमिश्नर मो. अबू सईद ने कहा कि हमें उच्च अधिकारियों से कोई निर्देश नहीं मिले हैं और परिवार की ओर से भी कोई आवेदन नहीं आया है. अगर शव को बांग्लादेश वापस लाया जाता है, तो हम नियमों के अनुसार मदद करेंगे, क्योंकि वह ब्राह्मणबेरिया के रहने वाले थे."

बांग्लादेश के विपक्ष के नेता और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने कल दो बांग्लादेशियों को मौत के घाट उतारे जाने के बाद इस मामले में सरकार और सऊदी अरब में मौजूद बांग्लादेशी मिशन की भूमिका पर सवाल उठाए.

शाम करीब 7:30 बजे एक फेसबुक पोस्ट में शफीकुर ने कहा, "सरकार और बांग्लादेश दूतावास का यह फर्ज है कि वे इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करें."

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उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी सऊदी अरब और मध्य पूर्व के अन्य देशों में काम करते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि विदेशों में बांग्लादेश के राजनयिक मिशन इसलिए होते हैं ताकि वहां रह रहे बांग्लादेशियों के हितों की रक्षा की जा सके, और साथ ही देश की गरिमा और राष्ट्रीय हितों को भी सुरक्षित रखा जा सके. 
 

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