दीवारें पुतवाने के 24 घंटे बाद फिर लिखे नारे, जादवपुर यूनिवर्सिटी में गरमाया मामला

जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवारों पर फिर से सियासी जंग छिड़ चुकी है. सफेदी के 24 घंटे के अंदर दिवारों पर नारे लिके गए हैं. इस मामले पर फ्री स्पीच बनाम 'एंटी-नेशनल' विवाद फिर गरमा गया है.

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जादवपुर युनिवर्सिटी में दीवारों पर लिखे नारों को लेकर एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है. (Photo-फाइल) जादवपुर युनिवर्सिटी में दीवारों पर लिखे नारों को लेकर एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है. (Photo-फाइल)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:07 PM IST

जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवारों पर लिखे नारों को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कथित अल्टीमेटम के बाद यूनिवर्सिटी परिसर की विवादित दीवारों पर सफेदी कर दी गई, लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते कि ताजा नारे फिर सामने आ गए. ओपन एयर थिएटर के बाहर की दीवार पर कार्ल मार्क्स का एक उद्धरण भी लिखा मिला. इसके बाद कैंपस में दीवारों की राजनीति और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस फिर तेज हो गई है.

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सफेदी के बाद फिर सामने आए नारे
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परिसर में लिखे विवादित राजनीतिक नारों को हटाने के लिए दीवारों पर पेंट करा दिया था. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब मुख्यमंत्री की ओर से कथित तौर पर 'एंटी-नेशनल' नारों को हटाने की मांग की गई थी.  प्रशासन की कार्रवाई के कुछ ही समय बाद नई वॉल राइटिंग सामने आने से सवाल उठने लगे कि क्या दीवारों पर लिखे संदेशों को पूरी तरह रोक पाना संभव होगा.
नए लेखन में कार्ल मार्क्स का उद्धरण भी शामिल है. बल्कि विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक विचारों की मौजूदगी और उनकी अभिव्यक्ति को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

यह भी पढ़ें: 'नंदीग्राम से कम्युनिस्टों को खदेड़ दिया', जादवपुर में बोले CM शुभेंदु अधिकारी

VC बोले- सोशल मीडिया के दौर में पुराना तरीका
जादवपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में दीवारों पर लिखना अब पुराना तरीका हो चुका है. उन्होंने साफ किया कि कार्रवाई का फोकस केवल विवादित राजनीतिक नारों को हटाने पर था.
यूनिवर्सिटी प्रशासन अब दीवारों की निगरानी करने और छात्रों के साथ बातचीत करने की योजना बना रहा है, ताकि इस विवाद का कोई रास्ता निकाला जा सके.

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छात्र संगठनों ने कार्रवाई का किया विरोध
दूसरी ओर, छात्र समूहों ने वॉल राइटिंग को अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा बताया है. उनका कहना है कि इन नारों के पीछे कोई 'एंटी-नेशनल' मंशा नहीं थी. छात्र संगठनों ने बीजेपी और RSS पर यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया.
अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन दीवारों पर दोबारा लिखे जा रहे नारों को कैसे रोकता है और छात्रों के साथ बातचीत से इस विवाद का क्या समाधान निकलता है.

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