पश्चिम बंगाल विधानसभा में विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी और वामपंथी ताकतों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय ध्वज हाथ में लेकर अगर कोई देश विरोधी बयानबाजी करेगा, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
मुख्य सचेतक अकरुज्जमान की टिप्पणी का जवाब देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, 'भगवा कोई राजनीतिक रंग नहीं है, बल्कि ये त्याग और समर्पण का प्रतीक है. स्वामी विवेकानंद और देश के महान संतों ने इसी रंग को धारण किया था.'
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भगवा का अपमान कर रहे हैं, उन्हें आने वाले चुनावों में इसका जवाब मिल जाएगा.
देश विरोधी नारों पर 'नेताजी की भाषा' में जवाब
जादवपुर विश्वविद्यालय की ओर इशारा करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि परिसर में 'कश्मीर मांगे आजादी' या भारत विरोधी नारे लगाने वालों से कड़ाई से निपटा जाएगा. उन्होंने कहा, 'आप रैली निकाल सकते हैं और हाथ में तिरंगा भी थाम सकते हैं. लेकिन अगर देश के टुकड़े करने की बात करेंगे, तो हम गांधी जी की शांति की भाषा छोड़ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आक्रामक भाषा में जवाब देंगे.'
उन्होंने टीचरों और छात्रों के एक खास वर्ग पर सनातन परंपराओं पर हमला करने का आरोप लगाया. साथ ही, दुर्गा पूजा समितियों से अपील की कि जो लोग दुर्गा पूजा का नाम न लिखें या वामपंथी विचारधारा के हों, उन्हें पूजा पंडालों में स्टॉल लगाने की अनुमति न दी जाए.
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर बोलते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा कि देश के खिलाफ बोलने वालों, देशविरोधी नारे लगाने वालों और किसी धर्म या संस्कृति का अपमान करने वालों का तबादला और सजा वाली पोस्टिंग की जाएगी. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस कानून का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा और उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि कोई इसके बारे में क्या सोचता है.
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बाबा बागेश्वर के विरोध पर जताया ऐतराज
शुभेंदु अधिकारी ने लीलुआ में बाबा बागेश्वर के आगमन और भवानीपुर इलाके में उनके विरोध पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पुलिस से उनका विरोध करने वालों की गिरफ्तारी की मांग की. उन्होंने कहा कि कोई क्या खाता है, ये उसका निजी मामला हो सकता है, लेकिन संतों और भारतीय परंपराओं का अपमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अनुपम मिश्रा