शुभेंदु सरकार ने मदरसा एजुकेशन बजट में की बड़ी कटौती, अब आधे से भी कम

पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का पहला बजट पेश किया है. इसमें मदरसा एजुकेशन और माइनॉरिटी अफेयर्स का बजट पिछली टीएमसी सरकार के मुकाबले आधा कर दिया गया है.

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बंगाल बजट में मदरसा एजुकेशन को 2165 करोड़ रुपए दिए गए. (Photo- ITGD) बंगाल बजट में मदरसा एजुकेशन को 2165 करोड़ रुपए दिए गए. (Photo- ITGD)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:25 PM IST

पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए आज का दिन काफी अहम है. आज राज्य की बीजेपी सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया है. शुभेंदु सरकार में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने वित्ती वर्स 2026-27 के लिए सदन में बजट पेश किया. इस बार बंगाल में मदरसा एजुकेशन का बजट घटाकर आधा कर दिया गया है.

सदन में बजट पेश करते हुए स्वपन दासगुप्ता ने कहा, 'हमारा टारगेट विकसित भारत और विकसित बंगाल है. मैं घोषणा करता हूं कि सभी मौजूदा और चल रही सामाजिक योजनाएं जारी रहेंगी. हम जिम्मेदार होंगे और पारदर्शिता के साथ कानून का पालन करेंगे. हमें लोगों का भरोसा जीतना होगा.'

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गुप्ता ने आगे बताया, 'हम इमरजेंसी हेल्पलाइन के लिए डायल 112 शुरू कर रहे हैं. कांथी में एक नया पुलिस जिला होगा. कुछ नई नगर पालिकाएं खोली जाएंगी. नए फायर स्टेशन भी खोले जाएंगे.'

पिछली सरकार के मुकाबले आधे से भी कम बजट

वहीं, स्वप्नदास गुप्ता ने बताया कि बंगाल में बीजेपी सरकार ने माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 2165 करोड़ रुपए कर दिए हैं. ये रकम पिछली TMC सरकार की तुलना में आधी से भी कम है. बता दें कि तत्कालीन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 5713 करोड़ रुपए आवंटित किए थे.

महिलाओं, बच्चों और शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च

बता दें कि बंगाल के बजट में इस बार सबसे ज्यादा पैसा महिलाओं, बच्चों, गांवों के विकास और शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है. बजट में सबसे बड़ी रकम 'महिला और बाल विकास और समाज कल्याण' विभाग को दी गई है, जिसके लिए 52,308.50 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

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इसके ठीक बाद 'पंचायत और ग्रामीण विकास' के लिए 51,836.55 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और 'स्कूली शिक्षा' को बेहतर बनाने के लिए 44,948.21 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

'स्वास्थ्य और परिवार कल्याण' विभाग को 24,753.62 करोड़ रुपये मिले हैं. इसके अलावा, 'गृह और पहाड़ी मामलों' के विभाग के लिए 7,925.42 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

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