कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच ने ऐसी करवट ली कि पुलिस भी हैरान रह गई. ससुर की मौत के बाद फूट-फूटकर रोती नजर आई करीब 30 साल की बहू शालू अब खुद हत्या की साजिश के आरोप में जेल पहुंच चुकी है. शुरुआत में जिस वारदात को घर में घुसकर की गई हत्या माना जा रहा था, उसकी कड़ियां जोड़ते-जोड़ते पुलिस परिवार के अंदर तक पहुंच गई. CCTV फुटेज, पुराने नौकर का कनेक्शन, डुप्लीकेट चाबी और छह लाख रुपये की कथित सुपारी ने इस हत्याकांड की पूरी तस्वीर बदल दी.
पार्टी के लिए निकला परिवार, घर में छिपे थे हत्यारे
पुलिस की जांच के मुताबिक शनिवार रात करीब 9:36 बजे विनीत मिनोचा का बेटा सुब्रत, बहू शालू और उनका छह साल का बेटा पार्टी के लिए घर से निकले थे. परिवार के बाहर निकलने के कुछ ही मिनट बाद दो संदिग्ध फ्लैट की तरफ जाते CCTV में दिखाई दिए.
आरोप है कि दोनों घर के अंदर दाखिल हुए और विनीत के लौटने का इंतजार करने लगे. पुलिस के मुताबिक दोनों करीब सवा घंटे तक फ्लैट के भीतर छिपे रहे. इस दौरान उन्हें इंतजार था कि विनीत घर लौटें और इसके बाद हत्या की कथित योजना को अंजाम दिया जा सके. करीब 10:58 बजे विनीत मिनोचा घर लौटे. इसके बाद कुछ ही देर में घटनाक्रम ने खौफनाक मोड़ ले लिया.
सोते समय हत्या का था कथित प्लान
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती योजना विनीत को सोते समय तकिए से दबाकर मारने की थी. कथित तौर पर कोशिश यह थी कि उनकी मौत प्राकृतिक या हार्ट अटैक जैसी लगे और किसी को हत्या का शक न हो. लेकिन उस रात हालात बदल गए. बताया गया कि विनीत अचानक बच्चों के कमरे की तरफ चले गए. कमरे का दरवाजा खुला था और अंदर मौजूद दोनों आरोपी उनके सामने आ गए.
इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर विनीत पर चाकू से हमला कर दिया. उनके गले और सीने समेत शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं. हमले के बाद आरोपी वहां से फरार हो गए.
CCTV ने खोली पहली बड़ी कड़ी
हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल के साथ-साथ आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. इसी दौरान दो संदिग्धों की गतिविधियां सामने आईं.
जांच में इनमें से एक की पहचान विशाल के रूप में हुई. विशाल कभी विनीत मिनोचा के घर पर काम करता था. पुलिस के मुताबिक करीब छह साल पहले चोरी के आरोप में उसे नौकरी से निकाल दिया गया था.
इसके बावजूद विशाल का परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. पुलिस का दावा है कि उसे घर की व्यवस्था, परिवार की दिनचर्या और फ्लैट में आने-जाने के बारे में जानकारी थी. यही पुराना परिचय कथित तौर पर हत्या की साजिश में उसके लिए मददगार बना.
डुप्लीकेट चाबी से घर में दाखिल होने का आरोप
जांच में फ्लैट की चाबी भी अहम कड़ी बन गई. पुलिस के मुताबिक विशाल के पास फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी थी और इसी के जरिए वह अपने साथी राजकिशोर के साथ घर के भीतर दाखिल हुआ था. अगर पुलिस का यह दावा जांच में साबित होता है तो इससे यह साफ होगा कि हमलावरों का फ्लैट में प्रवेश अचानक नहीं था, बल्कि पहले से तैयारी की गई थी.
पुलिस ने वारदात से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्या में इस्तेमाल हथियार और कपड़ों से जुड़े सुराग मिलने की बात भी कही है.
छह लाख रुपये में हत्या की कथित सुपारी
इस केस में सबसे बड़ा सवाल हत्या की वजह को लेकर था. घर से बड़ी मात्रा में नकदी या कीमती सामान गायब नहीं हुआ था. ऐसे में पुलिस ने लूट के एंगल पर आगे बढ़ने के बजाय दूसरे पहलुओं की जांच शुरू की.
पुलिस की जांच के मुताबिक, हत्या के लिए कथित तौर पर छह लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी. इसमें दो लाख रुपये हत्या के बाद और बाकी चार लाख रुपये करीब 15 दिन बाद देने की बात सामने आई. पुलिस का आरोप है कि यह हत्या किसी अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि पहले से तैयार की गई कथित साजिश का हिस्सा थी.
करोड़ों की संपत्ति और पैसों को लेकर तनाव?
विनीत मिनोचा लंबे समय से दवा कारोबार से जुड़े थे और आर्थिक रूप से संपन्न बताए जाते थे. पुलिस की जांच में परिवार के भीतर पैसों और खर्च को लेकर तनाव का एंगल भी सामने आया.
पुलिस के मुताबिक, विनीत अपने बेटे और बहू के खर्च को लेकर नियंत्रण रखते थे और बेटे को सीमित पैसे दिए जाने की बात सामने आई है. आरोप है कि इसी वजह से परिवार के भीतर नाराजगी थी. साथ ही वह बहू की हर गतिविधि पर CCTV से नजर भी रखते थे. जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी कथित नाराजगी ने आगे चलकर विनीत की हत्या की साजिश का रूप लिया. हालांकि इस दावे की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से ही होगी.
गार्ड को फोन और एंट्री का भी कनेक्शन
जांच में अपार्टमेंट के गार्ड से पूछताछ भी अहम रही. पुलिस के मुताबिक गार्ड को पहले फोन करके एक व्यक्ति के दोस्त के साथ आने की जानकारी दी गई थी. कथित तौर पर उसे अंदर आने देने और रजिस्टर में एंट्री नहीं करने को कहा गया था. पुलिस अब इस कड़ी को CCTV फुटेज और कॉल डिटेल से जोड़कर देख रही है. अगर यह बात साक्ष्यों से पुष्ट होती है तो यह हत्या की कथित पूर्व तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हो सकती है.
विनीत की हत्या के बाद जब उनका बेटा और बहू घर लौटे तो अंदर का मंजर देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई. बहू शालू भी ससुर की मौत पर रोती-बिलखती नजर आईं. उस समय किसी ने शायद ही सोचा होगा कि कुछ समय बाद पुलिस की जांच का रुख उनकी तरफ भी हो सकता है. लेकिन पुलिस ने सिर्फ भावनात्मक तस्वीरों और बयानों पर भरोसा नहीं किया. CCTV, मोबाइल संपर्क, आरोपियों के बयान, अपार्टमेंट में उनकी आवाजाही और हत्या की टाइमलाइन को आपस में जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई. इसी दौरान पुलिस के सामने शालू की कथित भूमिका का एंगल आया.
आरोपियों के बयान से जांच पहुंची बहू तक
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान शालू की भूमिका का जिक्र सामने आया. आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्हें हत्या के लिए परिवार की तरफ से कहा गया था.
हालांकि किसी आरोपी का पुलिस के सामने दिया गया बयान अपने आप में अंतिम दोष सिद्धि नहीं है. अदालत में इस मामले को स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा. इसके बावजूद पुलिस ने CCTV, मोबाइल संपर्क और दूसरे साक्ष्यों के साथ इस एंगल की जांच की और बाद में शालू को भी आरोपी बना दिया.
24 घंटे के भीतर पकड़े गए आरोपी
CCTV और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने दोनों संदिग्धों की पहचान की. उनकी तलाश शुरू हुई और पुलिस के मुताबिक, जवाहरपुरम इलाके के आसपास दोनों आरोपियों से मुठभेड़ हुई.
दोनों के पैरों में गोली लगने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर अस्पताल ले जाया गया. पूछताछ में पुलिस को हत्या की कथित साजिश से जुड़े कई सुराग मिलने का दावा किया गया. इसके बाद जांच की दिशा तेजी से बदलती चली गई.
अब तीन किरदारों पर टिकी जांच
इस पूरे हत्याकांड में फिलहाल तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. पहला नाम है शालू का, जिस पर पुलिस ने हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है. दूसरा नाम पूर्व नौकर विशाल का है, जिस पर हत्या को अंजाम देने में शामिल होने का आरोप है. तीसरा नाम राजकिशोर का है, जो कथित तौर पर विशाल के साथ वारदात में शामिल था. पुलिस के मुताबिक, इन तीनों के बीच की कथित कड़ी से हत्याकांड की साजिश सामने आई.
विनीत मिनोचा हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि जिस बहू को शुरुआत में ससुर की मौत के बाद रोते हुए देखा गया, वही अब पुलिस की जांच में कथित साजिश के केंद्र में है. CCTV फुटेज से शुरू हुई जांच पुराने नौकर तक पहुंची. फिर डुप्लीकेट चाबी का राज सामने आया. इसके बाद छह लाख रुपये की कथित सुपारी और परिवार के भीतर पैसों को लेकर तनाव का एंगल जुड़ता चला गया.
अब पुलिस की जांच यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इस पूरी साजिश की शुरुआत कब हुई, इसमें किसकी क्या भूमिका थी और हत्या के पीछे असल वजह क्या थी. फिलहाल शालू समेत आरोपियों पर लगे आरोपों की अंतिम सच्चाई अदालत में तय होगी. लेकिन पुलिस की जांच ने इस केस को महज घर में हुई हत्या से उठाकर कथित पारिवारिक साजिश के बेहद गंभीर मामले में बदल दिया है.
सिमर चावला