बुलंदशहर के खुर्जा की पॉटरी अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी एक अलग पहचान बना रही है. एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) में शामिल होने के बाद इस उद्योग को सरकारी योजनाओं का फायदा मिल रहा है. कारोबारियों को लोन, सब्सिडी और प्रशिक्षण के साथ बेहतर सड़क, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाएं भी मिल रही हैं.
खुर्जा का पॉटरी उद्योग मुगलकाल से चला आ रहा है. यहां तैयार किए चीनी मिट्टी के बर्तनों की अब मांग काफी बढ़ गई है. इनकी डिजाइनिंग, फिनिशिंग, ग्लेजिंग और फायरिंग में बहुत ध्यान रखा जाता है. इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग कर उन्हें बाजार में भेज दिया जाता है. पहले पॉटरी उद्योग कोयले और डीजल की भट्टियों पर निर्भर था. लेकिन अब सरकार ने इस उद्योग को गैस आधारित कर दिया है. करीब 300-400 यूनिटों के गैस पाइपलाइन से जोड़ने का काम किया गया है.
सब्सिडी वाली गैस मिलने से कारोबारियों को काफी राहत मिली है. एक जिला, एक उत्पाद के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, कारोबारियों को वित्तीय सहायता और कर्मचारियों को बीमा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा गया है. खुर्जा के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए लगातार कई प्रयास किए जा रहे हैं.
यहां टी-सेट, डिनर सेट समेत टाइल्स और कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं. खुर्जा की ब्लू पॉटरी और मुगलकालीन डिजाइन भी काफी चर्चित है. इसी कारण खुर्जा को सिरेमिक्स कैपिटल के नाम से भी जाना जाता है.
खुर्जा में वेस्ट सिरेमिक्स पार्क भी बनाया गया, यह छह करोड़ की लागत से बना है. इसमें 100 से ज्यादा उत्पाद लगाए गए हैं और करीब 80 टन सिरेमिक कचरे का इस्तेमाल किया गया है.
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सरकारी योजनाओं के तहत खुर्जा के कई कारोबारियों को लगभग दो से ढाई करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मंजूर हुई है. कई ऐसे कारोबारी हैं जो एक जिला एक उत्पाद योजना के जरिए अपने उत्पाद को आगे बढ़ा रहे हैं. जिला केंद्र उपायुक्त धनंजय सिंह का कहना है कि एक जिला, एक उत्पाद के तहत सभी कारोबारियों को इसका लाभ दिया गया है. साथ ही उन्होंने बताया कि समय-समय पर कारोबारियों को इसके बारे में जागरूक भी किया जाता है.
कारोबारियों का कहना है कि ODOP के जरिए सभी उत्पादों के एक छत में आने के कारण उन्हें अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और बेचने में सुविधाएं मिली हैं. इसके जरिए वे अपने उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं. उनका कहना है कि सरकारी मदद और प्रशिक्षण से उत्पादन बढ़ा है और कुशल श्रमिक भी आसानी से मिल रहे हैं. पहले मजदूरों की कमी रहती थी लेकिन ट्रेनिंग के बाद यह समस्या भी बहुत हद तक दूर हो गई है. कारोबारियों के मुताबिक, अब विदेशी ग्राहकों को खुर्जा के उत्पाद आसानी से मिल रहे हैं.
नए उद्यमियों को 20-25% तक फंडिंग मिलने के कारण वे आसानी से अपना कारोबार शुरू कर पा रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि पहले डीजल जनरेटर से प्रदूषण की बड़ी समस्या होती थी लेकिन सरकारी मदद से अब ज्यादातर फैक्ट्रियों में गैस आधारित जनरेटर लगाए गए हैं. साथ ही, सब्सिडी को बढ़ाकर 5 लाख से 10 लाख रुपये किया गया है.
एक जिला एक उत्पाद के तहत चार प्रमुख योजनाएं लॉन्च की गई हैं. इसमें से एक है, ODOP वित्त पोषण, इस योजना में हर वर्ष 50 नई इकाइयों की स्थापना की जाती है. या फिर पुरानी इकाइयों का ही नवीनीकरण किया जाता है. साथ ही, इसमें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी प्रावधान भी किया गया है.
दूसरी योजना ट्रेनिंग और कौशल विकास की है. हर साल लगभग 400 लोगों को 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर उन्होंने टूलकिट दी जाती है जिससे वे अपना रोजगार स्थापित कर पाएं. तीसरी योजना एक्सपोर्ट और एक्सपो में भागीदारी से जुड़ी है. बड़े उद्यमियों को देश-विदेश के एक्सपो में स्टॉल लगाने के खर्च का 75% तक रीइंबर्समेंट कर दिया जाता है. इससे हर साल 20-25 बड़े उद्यमियों को लाभ होता है.
चौथी योजना कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की है. खुर्जा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब और रॉ मैटेरियल बैंक बनाने की भी योजना है. इससे पॉटरी उत्पादों की गुणवत्ता की जांच यहीं हो पाएगी और एक्सपोर्ट के दौरान उत्पादों के रिजेक्ट होने की समस्या भी खत्म होगी. कुल मिलाकर एक जिला, एक उत्पाद योजना के जरिए हर साल 500 लाभार्थियों को लोन, ट्रेनिंग और एक्सपो जैसी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है.
मुकुल शर्मा