यूपी में बारिश का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है. 3 सितंबर को सात जिलों में भारी बारिश दस्तक दे सकती है. IMD ने बांदा, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर के लिए भारी बारिश की संभावना जताई है. इसके अलावा प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं.
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 3 सितंबर सुबह 8:30 बजे से 4 सितंबर सुबह 8:30 बजे तक बांदा, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भारी बारिश की संभावना ज्यादा है. यानी इन जिलों के लोगों को अगले 24 घंटे के दौरान मौसम को लेकर विशेष सतर्क रहने की जरूरत है. इन इलाकों में कई जगहों पर अचानक तेज बारिश हो सकती है. ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़क पर फिसलन बढ़ने और स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है. खासकर बारिश के दौरान खुले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी बरतना जरूरी होगा.
पश्चिमी यूपी में कई जगह बारिश, पूर्वी यूपी में भी बौछारें
3 सितंबर को सिर्फ बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है. IMD के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है. दोनों हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश भी हो सकती है. इसका मतलब साफ है कि 3 सितंबर को प्रदेश में मौसम एक जैसा नहीं रहेगा. कुछ जिलों में सामान्य बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ इलाकों में अचानक तेज बारिश परेशानी बढ़ा सकती है.
आखिर क्यों सक्रिय हुआ यूपी का मौसम
मौसम में इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी और उससे जुड़े मौसम तंत्र की भूमिका है. IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा और गंगीय पश्चिम बंगाल तथा उससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा, झारखंड और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में मौजूद रहा. इससे मानसूनी गतिविधियां मजबूत हुई हैं. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में आने वाले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना बनी हुई है. मौसम विभाग ने राज्य में अगले पांच दिनों तक बारिश की गतिविधि की चेतावनी दी है. शुरुआती 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई गई थी.
4 सितंबर को भी कई जिलों में बारिश का अलर्ट
बारिश का असर 3 सितंबर के बाद भी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है. 4 सितंबर सुबह 8:30 बजे से 5 सितंबर सुबह 8:30 बजे के बीच मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, जालौन, हमीरपुर, झांसी और ललितपुर तथा आसपास के इलाकों में भारी बारिश की संभावना ज्यादा बताई गई है. इसके बाद 5 सितंबर से 6 सितंबर की सुबह तक अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, झांसी और ललितपुर तथा आसपास के इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. यानी बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है.
सितंबर में कैसा रहेगा यूपी का मौसम
IMD के सितंबर महीने के आउटलुक में भी उत्तर प्रदेश के मौसम को लेकर अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग अनुमान दिया गया है. दक्षिणी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश सामान्य से कम रह सकती है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में बारिश सामान्य के आसपास रहने का अनुमान है. तापमान को लेकर भी सितंबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना जताई गई है. ऐसे में बारिश के बीच उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर भी देखने को मिल सकता है. भारी बारिश के साथ कई जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी रहेगा. मौसम विभाग के पूर्वानुमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर समेत कई जिलों के लिए गरज-चमक की अधिक संभावना बताई गई है. इसके अलावा आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर समेत कई जिले भी इस सूची में शामिल हैं. ऐसे मौसम में लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए. तेज बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहना ज्यादा बेहतर होगा.
बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
मौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान निचले और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है. तेज बारिश के दौरान अचानक पानी बढ़ने वाले नालों, नदी-नालों और पुलों के आसपास जाने से बचना जरूरी है. जलभराव वाली सड़क पर वाहन चलाते समय भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए. ग्रामीण और खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए.
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