यूपी STF को बड़ी सफलता, डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख की ठगी करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है. टीम ने डिजिटल अरेस्ट करके 48 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है.

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गिरफ्तार मास्टरमाइंड सुरेश सैन गिरफ्तार मास्टरमाइंड सुरेश सैन

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 26 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है. एसटीएफ टीम ने सीबीआई और नारकोटिक्स का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख की ठगी करने वाले गैंग के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है. ये गिरफ्तारी इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे नई दिल्ली से हुई है.

जानकारी के अनुसार गिरफ्तार मास्टरमाइंड राजस्थान के अलवर का रहने वाला है. आरोपी का नाम सुरेश सैन है. बीते दिनों सैन अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद कंबोडिया भाग गया था. कंबोडिया से लौटते ही एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जबकि उसके दो साथियों को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है.

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पुलिस ने बताया कि डा. अशोक सोलंकी निवासी लखनऊ ने थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में मुकदमा पंजीकृत कराया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि सीबीआई, नारकोटिक्स, क्राइमब्रांच के अधिकारी बनकर दो दिन तक जांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर 48 लाख रुपये की ठगी की गई.

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केस की जांच के बाद एसटीएफ ने 14 नवंबर 2024 को गुरुग्राम हरियाणा से 05 अभियुक्तों को गिरफ्तारी किया. वहीं, 16 नवंबर 2024 को लखनऊ से 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया. इसके बाद 3 दिसंबर 2024 को लखनऊ से 03 अभियुक्तों व 26 दिसंबर को 2024 को लखनऊ से 01 अभियुक्त सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

इस गिरोह का मास्टरमाइंड सुरेश गिरफ्तारी से बचने के लिए कंबोडिया फरार हो गया था. उसकी कंबोडिया से भारत आने की सूचना प्राप्त होने पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया. सुरेश के पास से कई सिम भी बरामद हुई है.

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सुरेश कुमार ने बताया कि अप्रैल 2023 में मैं दिल्ली से कोलकाता, बैंकॉक, होते हुए कंबोडिया गया था. एजेंट रफीक भाटी झुंझुनू, राजस्थान के जानने वाले एजेंट नितिन निवासी मुंबई के माध्यम से कंबोडिया में एक बांग्लादेशी नागरिक से मिला था. बांग्लादेशी नागरिक मुझे एक होटल में लेकर गया. जहां मैं 5 दिन तक रुका था. इसके बाद बांग्लादेशी नागरिक मुझे पाकिस्तान निवासी यासीन चौधरी के पास लेकर गया. 

जहां से चौधरी मुझे फ्नोमपेन्ह शहर और उसके आस-पास के कथित चाइनीज लोग द्वारा संचालित साइबर ठगी करने वाली 5 कंपनियों के पास लेकर गया. मेरे साथ नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि देशों के लोग भी गये थे. इन कंपनियों और कॉल सेंटरों में पहले हम लोगों का इंटरव्यू हुआ. जहां इन सेंटरों में हम लोगों को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेष व नेपाल आदि देशों में साइबर ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती थी.

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इसके बाद मैंने यहां पर लगभग 10 महीने तक साइबर ठगी का काम किया. साथ ही मैं कॉलिंग की जॉब के लिए कमीशन लेकर भारत से कॉलर को बुलाने का भी काम करने लगा. अपने पर्सनल कॉन्टैक्ट व नितिन के माध्यम से लोगों को कंबोडिया बुलाने लगा. मेरे व यासीन के माध्यम से किसी का सेलेक्शन इन ठगी की कम्पनियों/कॉल सेंटरों में होने पर 1000 डालर का कमीशन मिलता था. जिसे मैं व यासीन चौधरी आपस में बांट लेते थे. यहां पर मैं कॉलरों को सेंटरों में ले जाता था. 

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इसके बाद मैनें मार्च 2024 में यासीन चौधरी से अलग होकर अपना खुद का रेस्टोरेंट फ्नोमपेन्ह (कम्बोडिया) में खोल लिया था. पर दो माह बाद इसको बंद कर कैंपोट शहर (कम्बोडिया) में मनोरथ नाम से दूसरा रेस्टोरेन्ट खोला. इसी रेस्टोरेन्ट के पते पर मैं साइबर ठगी के लिए कॉलरों को वीजा दिलाकर बुलाता हूं. मैं भारत से कंबोडिया भेजने के लिए लोगों से 01 लाख 50 हजार रुपये लेता हूं. इसके बाद कंबोडिया में कथित चाइनीज कॉल सेंटरों में सिलेक्शन कराकर बतौर कमीशन-1000 डॉलर लेता हूं. मै कुछ कॉलरों को भारत से कंबोडिया ले जाने के लिए भारत आया था.

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