'चूहे की हत्या' केस: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट, आरोपी को हो सकती है 5 साल की जेल?

उत्तर प्रदेश के बदायूं में 'चूहे की हत्या' के केस में पुलिस ने 30 पन्ने का आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में दाखिल कर दिया है. आरोप पत्र को मजबूत बनाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि चूहे के फेफड़े ख़राब थे, उनमें सूजन थी, लीवर में भी इन्फेक्शन था.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

अंकुर चतुर्वेदी

  • बदायूं,
  • 11 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

उत्तर प्रदेश के बदायूं में 'चूहे की हत्या' का केस देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. चूहे का पोस्टमार्टम भी हुआ और अब पुलिस ने 30 पन्ने का आरोप पत्र (चार्जशीट) कोर्ट में दाखिल कर दिया है. चार्जशीट लगने के बाद आम आदमी से लेकर कानूनी जानकार भी जानना-पढ़ना चाहते हैं कि आखिर इसमें क्या लिखा है?

25 नवंबर को हुई थी चूहे की हत्या  

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मामला बदायूं की सदर कोतवाली का है. यहां के पनवाड़ी चौक में रहने वाले मनोज ने 25 नवंबर को एक चूहे को नाले में डूबाकर रखा था. साथ ही चूहे को पत्थर से बांध दिया था. उधर से गुजर रहे पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने चूहे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन चूहा मर गया. इसके बाद पशु प्रेमी थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ एफआईआर लिखवा दी. 

एफआईआर के शव का पोस्टमार्टम कराने की बारी आई तो जिले में चूहे के पोस्टमार्टम की सुविधा ही नहीं थी. पुलिस मामले को गंभीर नहीं ले रही थी लेकिन विकेंद्र कड़ी कानूनी कार्यवाही के लिए पोस्टमार्टम कराने की जिद पर अड़े थे. चूहे के पोस्टमार्टम के लिए आइवीआरआई बरेली रेफर किया गया तो विकेंद्र पुलिस के साथ चूहे के शव को लेकर वहां पहुंचे.

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चूहे के पोस्टमार्टम में हुआ था ये खुलासा

चूहे की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आई, जिसमें कहा गया है कि चूहे का लीवर और फेफड़े पहले से खराब थे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चूहे की मौत नाली के पानी में डूबने से नहीं हुई है. उसकी मौत दम घुटने की वजह से हुई है. वह पहले से कई बीमारियों से ग्रसित था. लिहाजा, उसका बच पाना मुश्किल था. 

मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बाद में थाने से ही जमानत दे दी थी और फिर मनोज ने पांच दिन बाद कोर्ट पहुंचकर कहा कि मैं समर्पण करने आया हूं. कोर्ट ने मनोज को कुछ देर बाद अग्रिम जमानत भी दे दी थी.

वन विभाग ने कहा- चूहे की हत्या अपराध नहीं, लेकिन... 

इस मामले में वन विभाग के डीएफओ अशोक कुमार सिंह का कहना है कि चूहे को वन विभाग अधिनियम में 5 के तहत वार्मिंग श्रेणी में रखा गया है और इसको मारने पर कोई अपराध नहीं बनता है, लेकिन पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, इसलिए इसको गलत भी नहीं ठहराया जा सकता.

पुलिस की चार्जशीट में क्या?

इन सब तर्क-वितर्क के बीच पुलिस ने मनोज को आरोपी मानते हुए 30 पन्नों का आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया है. सीओ सिटी आलोक मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने आरोप पत्र में एक-एक कड़ी को जोड़ा है. मनोज धारा 11(पशुक्रूरता निवारण अधिनियम) और धारा 29 (पशु हत्या या अपाहिज करना) में आरोपित पाया गया है.

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आरोप पत्र को मजबूत बनाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि चूहे के फेफड़े ख़राब थे, उनमें सूजन थी, लीवर में भी इन्फेक्शन था. इसके आलावा चूहे की माइक्रोस्कोपीक जांच में भी ये स्पष्ट किया गया था कि चूहे की मृत्यु दम घुटने से हुई है.

इन आरोपों में कितनी सजा हो सकती है?

कानूनी जानकारों के अनुसार, पशु क्रूरता अधिनियम के मामले में 10 रूपये से लेकर 2 हजार रूपये तक जुर्माना और तीन साल की सजा का प्रावधान है. धारा 429 के अंतर्गत पांच साल की सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है. चूंकि ऐसा मामला इससे पहले सामने नहीं आया है. ऐसे में कोर्ट मनोज को कितनी सजा और जुर्माना डालेगी ये एक नजीर भी बनेगी.

पिता बोले- फिर मुर्गा-बकरा-मछली काटने वालों को भी मिले सजा

आरोपी मनोज से बात करने की कोशिश की तो उसने बात करने से मना कर दिया लेकिन मनोज के पिता मथुरा प्रसाद ने कहा, 'चूहा और कौवा को मारा जाना गलत नहीं है. यह नुकसान पहुंचाने वाले जीव हैं. अगर ऐसे मामले में हमारे बेटे को सजा होती है तो उन सब पर भी कार्यवाही होनी चाहिए, जो मुर्गा -बकरा मछली काटते है.'

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पशु क्रूरता अधिनियम का पालन होना चाहिए- विकेंद्र शर्मा  

उधर, इस मामले में पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा भी खुलकर सामने आ गए हैं. उनका कहना है कि हमने चूहे को मारने के लिए एफआईआर नहीं कराई है, बल्कि उसके साथ क्रूरता करने पर एफआईआर कराई है, जिन जानवरों को काटकर बेचा जाता है, उनकी पहले ब्रेन सेंसेटिव नस काट कर मौत दी जाती है. उनके मरने के बाद शरीर के टुकड़े किए जाते हैं. इसके लिए अलग से कानून है और इसकी लाइसेंसिंग प्रक्रिया है.

 

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