UP धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर इलाहाबाद HC का अहम फैसला, कहा- असंवैधानिक नहीं हैं 2 धाराएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर अहम बात कही है. कोर्ट ने कहा कि इस कानून की धारा तीन और पांच असंवैधानिक नहीं है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने फतेहपुर में दर्ज प्राथमिकी पर राहत देने से इंकार कर दिया.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी याचियों को धर्मांतरण कानून को लेकर राहत इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी याचियों को धर्मांतरण कानून को लेकर राहत

पंकज श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 17 जून 2023,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन और पांच को असंवैधानिक करार देने वाली याचिका पर विचार करते हुए शुआट्स वीसी सहित सात अन्य को राहत देने से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया इन धाराओं में कोई असंवैधानिकता नहीं नजर आती है. लिहाजा, इन्हें गैर संवैधानिक नहीं कहा जा सकता है. यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने दिया. कोर्ट ने डॉ. आरबी लाल व सात अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया.

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कोर्ट ने दिया ये बयान

कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी के आधार पर याचियों के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा सीधे लालच देकर धर्म परिवर्तन करने का आरोध लगाया गया है. इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन के तहत आरोप बनता है. मामले में याचियों के खिलाफ फतेहपुर जिले के कोतवाली थाने में फरवरी 2023 में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.

की गई थी ये मांग

याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा तीन, पांच और 12 को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी. याचियों की ओर से कहा गया कि धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के प्रावधानों का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है. क्योंकि, अधिनियम की धारा आठ और नौ में निहित कानून के प्रावधान का पालन नहीं किया गया. जबकि, इनका पालन किया जाना अनिवार्य है.

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नहीं दी राहत

कहा गया कि वास्तव में कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया गया है. यह याचिका अधिनियम की धारा तीन, पांच और 12 को चुनौती देती है. लिहाजा, याचियों को अंतरित राहत दी जा सकती है. हालांकि, सरकारी अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया. हालांकि, कोर्ट ने याचियों को कोई राहत नहीं दी लेकिन यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

 

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