दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल चला अरविंद, सेवा और श्रद्धा की मिसाल, Video

सावन में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे दिल्ली के विकास नगर निवासी अरविंद अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर पैदल यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने दादी से किया वादा निभाने के लिए यह संकल्प लिया. गाजियाबाद पहुंची उनकी अनोखी कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

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कांवड़ यात्रा के जरिए रिश्तों और बड़ों के सम्मान का दिया संदेश. (Photo: Screengrab) कांवड़ यात्रा के जरिए रिश्तों और बड़ों के सम्मान का दिया संदेश. (Photo: Screengrab)

मयंक गौड़

  • गाजियाबाद ,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:27 PM IST

सावन के पवित्र महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ यात्रा भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, जो भक्ति के साथ सेवा और पारिवारिक संस्कार का संदेश दे रही है. दिल्ली के विकास नगर निवासी अरविंद अपनी बुजुर्ग दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल यात्रा कर रहे हैं. जहां भी उनकी यह अनोखी कांवड़ यात्रा पहुंच रही है, लोग रुककर उन्हें देख रहे हैं और उनके जज्बे की सराहना कर रहे हैं.

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अरविंद हरिद्वार से मां गंगा का पवित्र जल लेकर निकले हैं. पिछले दस दिनों से वह प्रतिदिन करीब 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं. गुरुवार को वह गाजियाबाद पहुंचे. यहां भगवान भोलेनाथ के जयघोष के बीच उनकी अनोखी कांवड़ यात्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट गए. लोगों ने इसे परिवार के प्रति समर्पण और सेवा भावना का प्रेरक उदाहरण बताया.

दस दिनों से रोज करीब 10 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं शिवभक्त

अरविंद ने बताया कि उन्होंने अपनी दादी से वादा किया था कि वह उन्हें धार्मिक यात्रा कराएंगे. इसी वचन को पूरा करने के लिए उन्होंने दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल यात्रा करने का संकल्प लिया. उनका कहना है कि भगवान शिव की कृपा और दादी के आशीर्वाद से अब तक की पूरी यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से चल रही है. उन्हें पूरा विश्वास है कि वह अपना संकल्प भी पूरा करेंगे.

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उन्होंने बताया कि भगवान शिव से उनकी केवल एक ही प्रार्थना है कि उनकी दादी को लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और हमेशा खुशहाल जीवन का आशीर्वाद मिले. अरविंद अविवाहित हैं और पेशे से डीजे का काम करते हैं. उनका कहना है कि दादी की सेवा करना ही उनके लिए सबसे बड़ी पूजा है.

गाजियाबाद में इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. कई लोगों ने अरविंद के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, जबकि कई श्रद्धालुओं ने उनकी दादी का आशीर्वाद लिया. लोगों का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ गंगाजल लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने वचन, परिवार और संस्कारों के प्रति समर्पण का भी संदेश देती है.

भगवान शिव से दादी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना

श्रद्धालुओं का मानना है कि आज के समय में जब रिश्तों में दूरियां बढ़ती दिखाई देती हैं, ऐसे में अरविंद की यह कांवड़ यात्रा सेवा, सम्मान और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आई है. उनकी यह यात्रा रास्ते में मिलने वाले लोगों को भी रिश्तों की अहमियत और बड़ों के सम्मान का संदेश दे रही है. अरविंद अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं. उनकी यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का ऐसा उदाहरण बन गई है, जिसकी चर्चा पूरे रास्ते में हो रही है.
 

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