UP NEWS: सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले इंटरस्टेट गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. थाना कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य सरगना मोहाली, पंजाब निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है. उसके साथ सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिहार और भदोही के चार अन्य आरोपियों को पकड़ा गया है.
आरोपियों के कब्जे से 20 रुपये के 6400 नकली सिक्के बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत 1 लाख 28 हजार रुपये है. इसके अलावा 10 हजार रुपये के असली नोट, आठ मोबाइल फोन और दो कारें मिली हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपी सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने का नया बेस तैयार करने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले ही टीम ने उन्हें इंटरसेप्ट कर लिया.
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जांच में सामने आया कि गिरोह बड़े पैमाने पर नकली सिक्के तैयार करता था. मौके से छह सिक्का बनाने वाली मशीनें, पांच लोहे की डाई, 39 बिना मोहर वाली डाई और 20 मोहर लगी डाई बरामद की गईं. डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, ब्रश, रेती, हथौड़े, आरी, रिंच, शिकंजा, प्लास, पेचकश और वर्नियर कैलिपर्स समेत पूरा सेटअप भी मिला है.
रोज तैयार होते थे 12 हजार नकली सिक्के
पुलिस के मुताबिक, बरामद उपकरणों से करीब 5 लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के तैयार किए जा चुके थे. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक कांटा, ओवन और हिसाब-किताब के सात रजिस्टर मिले हैं. पुलिस का कहना है कि पूरा सेटअप इंडस्ट्रियल लेवल पर तैयार किया गया था. आरोपी रोज करीब 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के बनाते थे.
इन सिक्कों को बाजार के साथ शराब के ठेकों, टोल टैक्स और छोटे व्यापारियों के बीच खपाया जाता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली करेंसी जैसे दिखने वाले इन सिक्कों को किन-किन इलाकों और राज्यों में पहुंचाया गया. साथ ही नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.
एसएसपी अभिनंदन के मुताबिक, मुख्य आरोपी उपकार लूथरा वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के काम में शामिल बताया जा रहा है. उसे पहले दिल्ली पुलिस भी गिरफ्तार कर चुकी है. एक समय उसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था. पूछताछ में आरोपियों ने अब तक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात कही है.
70 करोड़ से ज्यादा के सिक्कों का दावा
पुलिस की शुरुआती गणना में भी 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बनाए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अभी कोई सटीक रकम नहीं बताई है. इसलिए वास्तविक आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि गिरोह कितने राज्यों में सक्रिय था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे.
पुलिस के अनुसार, गैंग में कुल आठ सदस्यों के सामने आने की बात कही गई है, जिनमें पांच गिरफ्तार हो चुके हैं. एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि नकली सिक्के देखने में काफी हद तक असली जैसे हैं, इसलिए आम लोगों के इनके झांसे में आने की आशंका रहती है. पुलिस आरोपियों के पुराने नेटवर्क और संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है.
अगर जांच में किसी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जानकारी सामने आती है तो उसकी भी पुष्टि की जाएगी. अभी तक पीएनबी चेस्ट कैश से गैंग की कोई लिंकिंग सामने नहीं आई है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलग तरीके से नकली सिक्कों को बाजार में चला रहे थे. अब उनकी अवैध संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी है.
फरार आरोपियों की तलाश, व्यापारियों से अपील
पुलिस नेटवर्क से जुड़े फरार लोगों की तलाश कर रही है. साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने नकली सिक्के बाजार में खपाए जा चुके हैं. जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के नेटवर्क और उसकी वास्तविक पहुंच का खुलासा होने की उम्मीद है.
पुलिस ने व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि अगर उन्हें संदिग्ध सिक्के मिलते हैं तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें. पुलिस आरोपियों के संपर्कों, संपत्ति और नकली सिक्कों की सप्लाई चेन की जांच कर रही है. आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी.
राहुल कुमार