'दो दिन पहले इसी कमरे में एक नाग मारा गया था... और अब उसी कमरे में नागिन ने दो मासूमों को डस लिया.' झांसी के हरदौलपुर मोहल्ले में यह बात आग की तरह फैल गई. कोई इसे महज संयोग बता रहा था, तो कोई कह रहा था कि यह सांप के जोड़े की कहानी है. गली-गली, चौपाल और घरों के बाहर खड़े लोगों की जुबान पर एक ही सवाल था कि क्या यह उसी सांप के जोड़े का दूसरा साथी था?
रात तक सब ठीक था... सुबह होते-होते घर में मातम पसर गया
दरअसल, झांसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरदौलपुर मोहल्ला निवासी प्रदीप कुशवाहा एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. देर रात उनके घर में सब कुछ सामान्य था. सात साल का मयंक स्कूल से लौटने के बाद दोस्तों के साथ खेला था. चार साल की प्रगति पूरे दिन घर में चहकती रही. रात को दोनों भाई-बहन ने मां नेहा के हाथ का खाना खाया और रोज की तरह उनके पास ही सो गए. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह दोनों भाई-बहन साथ बिताई उनकी आखिरी रात होगी. तड़के करीब साढ़े तीन बजे प्रदीप रोज की तरह काम पर निकल गए. घर में पत्नी नेहा दोनों बच्चों के साथ कमरे में सो रही थीं. तभी मौत दबे पांव उस कमरे में दाखिल हो चुकी थी.
पहले बेटी चीखी... फिर बेटा भी तड़पने लगा
कुछ देर बाद अचानक चार वर्षीय प्रगति दर्द से चीख उठी. उसकी आवाज सुनकर मां नेहा की नींद खुल गई. उन्होंने बेटी को गोद में उठाया तो वह दर्द से तड़प रही थी. मां अभी समझने की कोशिश ही कर रही थीं कि आखिर हुआ क्या है, तभी बगल में सो रहा सात वर्षीय मयंक भी जोर-जोर से रोने लगा. परिजनों ने कमरे में देखा तो एक जहरीला सांप मौजूद था. तब तक वह दोनों बच्चों को डस चुका था. घर में अफरा-तफरी मच गई. पड़ोसी भी दौड़कर पहुंच गए. किसी ने प्रदीप को फोन किया तो किसी ने वाहन का इंतजाम किया. कुछ ही मिनटों में दोनों बच्चों को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया.
मां डॉक्टरों से कहती रही- 'मेरे बच्चों को बचा लीजिए'
मेडिकल कॉलेज पहुंचने तक परिवार की सांसें अटकी हुई थीं. मां नेहा लगातार दोनों बच्चों को सीने से लगाए रहीं. उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे. वह डॉक्टरों से बार-बार बस एक ही गुहार लगा रही थीं कि मेरे बच्चों को बचा लीजिए. लेकिन कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने सात साल के मयंक को मृत घोषित कर दिया. यह सुनते ही मां की चीख पूरे अस्पताल में गूंज उठी. जिस बेटे को उन्होंने रात में अपने हाथों से खाना खिलाया था, सुबह वही बेटा हमेशा के लिए उनसे दूर हो चुका था. दूसरी ओर चार साल की प्रगति को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं.
'काश... हमें पहले पता चल जाता'
मृतक बच्चे की मां नेहा का रो-रोकर बुरा हाल है. वह बार-बार यही कह रही हैं कि रात में किसी को जरा भी आभास नहीं हुआ कि कमरे में सांप घुस आया है. अगर समय रहते सांप दिखाई दे जाता तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता. अब उनकी हर प्रार्थना सिर्फ एक ही बात पर आकर रुक जाती है कि भगवान... मेरा बेटा तो चला गया, अब मेरी बेटी को बचा लो... उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं.
एक ही पल में उजड़ गया पूरा परिवार
परिजनों ने बताया कि प्रदीप और नेहा के केवल यही दो बच्चे थे. एक बेटा... एक बेटी... अब बेटा हमेशा के लिए चला गया है और बेटी अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है. जिस घर में कल तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां हैं. घर के आंगन में पड़े खिलौने वहीं हैं. स्कूल बैग भी उसी जगह रखा है, लेकिन उसे उठाने वाला मयंक अब कभी वापस नहीं आएगा.
ताऊ ने बताई पूरी घटना
मृतक के ताऊ हरचरण कुशवाहा ने बताया कि बच्चों के पिता काम पर निकल चुके थे. उसी दौरान सांप कमरे में घुस आया. पहले उसने प्रगति को डसा. बच्ची के रोने पर मां उसे लेकर बाहर आईं, लेकिन कुछ ही मिनट बाद मयंक भी चीखने लगा. अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. उन्होंने बताया कि घटना के बाद सांप कुछ देर तक कमरे में दिखाई भी दिया, लेकिन फिर मकान के अंदर बने एक सुराख में घुस गया. काफी तलाश और खुदाई के बावजूद वह अब तक नहीं मिला है. इससे पूरे परिवार और आसपास के लोगों में डर का माहौल है. दो दिन पहले भी निकला था सांप, अब गांव में तरह-तरह की चर्चा क्षेत्रीय पार्षद सुशील कुमार कुशवाहा ने बताया कि दो-तीन दिन पहले भी इसी कमरे में एक सांप निकला था. ग्रामीणों ने मिलकर उसे मार दिया था. अब दोबारा उसी तरह का सांप निकलने के बाद गांव में तरह-तरह की बातें होने लगी हैं. कई लोग इसे सांप के जोड़े से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि वन विभाग या किसी सरकारी एजेंसी ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि दोनों सांप जोड़े के थे. विशेषज्ञ भी सांप के बदला लेने जैसी मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं मानते. फिर भी इस घटना के बाद मोहल्ले में यह चर्चा लोगों के डर को और बढ़ा रही है.
करैत का जहर बेहद खतरनाक माना जाता है
स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्चों को जिस सांप ने काटा, वह संभवतः करैत था. करैत भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है. इसका जहर शरीर के तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर करता है. कई मामलों में शुरुआत में दर्द या सूजन भी नहीं होती, जिससे खतरे का अंदाजा देर से लगता है. यही वजह है कि करैत के काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना और एंटी-स्नेक वेनम मिलना बेहद जरूरी माना जाता है.
अजय झा