अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच आगे बढ़ रही है. जांच एजेंसियों ने अब मंदिर के पुराने लेजर और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस का मानना है कि चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब इन्हीं दस्तावेजों में छिपा हो सकता है. अब तक ट्रस्ट पदाधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों और बैंककर्मियों समेत 100 से अधिक लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है.
अब बारी उन पुराने लेजर की है, जिनमें वर्षों से दान की रकम का हिसाब दर्ज होता आया है. जांच अधिकारियों का मानना है कि अगर रिकॉर्ड और वास्तविक जमा राशि के बीच कहीं कोई अंतर है, तो उसकी झलक इन्हीं दस्तावेजों में मिल सकती है. यही वजह है कि अब पुराने लेजर के हर पन्ने को बारीकी से खंगाला जा रहा है.
किस तारीख को कितना दान दर्ज हुआ? कितनी राशि जमा दिखाई गई? रिकॉर्ड में दर्ज रकम और उपलब्ध दस्तावेजों में कोई अंतर तो नहीं? जांच टीम इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है.
यह भी पढ़ें: बैंक लॉकर में रखे सोने-चांदी के रिकॉर्ड का लिया जायजा, चढ़ावा चोरी जांच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कदम
सूत्रों के मुताबिक, लेजर में दर्ज तारीख, रकम और अन्य प्रविष्टियों का बैंक रिकॉर्ड और उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों से मिलान किया जा रहा है. जिन एंट्री पर संदेह है, उनसे जुड़े लोगों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है. इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) की निगरानी में चल रही है, जबकि विवेचना सीओ अयोध्या कर रहे हैं.
जांच अधिकारी नियमित रूप से मंदिर पहुंच रहे हैं. वित्तीय रिकॉर्ड देख रहे हैं. दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं. और एक-एक कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इस जांच का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है. अब तक ट्रस्ट पदाधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों और बैंककर्मियों समेत 100 से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं. कई लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं.
जांच एजेंसियों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो कुछ लोगों को दोबारा भी बुलाया जा सकता है. यानी जांच अभी खत्म होने से काफी दूर है. अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुराने लेजर में दर्ज आंकड़े बाकी रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल खाते हैं? या फिर कहीं ऐसी विसंगतियां हैं, जो कथित वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करती हैं? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं. जांच एजेंसियां अभी दस्तावेजों, बयानों और रिकॉर्ड को जोड़कर पूरी तस्वीर समझने की कोशिश कर रही हैं.
आशीष श्रीवास्तव